Middle East Conflict: सऊदी और UAE की ईरान को सबक सिखाने की तैयारी, अमेरिका को दिया बड़ा आफर!
Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक अहम अपडेट सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका और इजरायल का समर्थन करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मिडिल ईस्ट आई (MEE) की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एलब्रिज कोलबॉय ने सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की थी। खालिद, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (Mohammed bin Salman) के भाई भी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने पश्चिमी हिस्से में स्थित किंग फहद एयरबेस (King Fahd Air Base) को अमेरिकी सेना के उपयोग के लिए खोलने पर सहमति जताई है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़े हैं और अमेरिका को नए सैन्य ठिकानों की जरूरत महसूस हो रही है।

Saudi Arab खोलेगा अपना महत्वपूर्ण एयरबेस
- सऊदी अरब का किंग फहद एयरबेस प्रिंस सुल्तान एयरबेस (Prince Sultan Air Base) की तुलना में ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। यह एयरबेस ईरान के 'शाहिद' ड्रोन की मारक क्षमता से अपेक्षाकृत दूर है।
- प्रिंस सुल्तान एयर बेस पहले कई बार हमलों का निशाना बन चुका है। प्रिंस सुल्तान एयरबेस की रणनीतिक स्थिति भी अमेरिका के लिए ज्यादा उपयोगी है।
- ताइफ में स्थित प्रिंस सुल्तान एयरबेस जेद्दा के करीब है, जो लाल सागर के किनारे एक अहम लॉजिस्टिक्स हब बन चुका है।
Middle East Crisis: अमेरिकी सेना के लिए मददगार बनेगा एयरबेस
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बाधित कर दिया है। ऐसे में जेद्दाह से अमेरिकी सेना को रसद और सपोर्ट पहुंचाना आसान हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी नेतृत्व के बीच भी हाल के हफ्तों में कई बार चर्चा हुई है। वहीं, यूएई (UAE) ने भी अमेरिका को संकेत दिया है कि वह लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के लिए तैयार है।
Iran के खिलाफ एकजुट हुए सऊदी और यूएई
यूएई ने भी अमेरिका को खुले तौर पर समर्थन दे दिया है। सूूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि यूएई प्रशासन ने अमेरिका को 9 महीने तक के लिए युद्ध की तैयारी होने की बात कही है। मौजूदा हालात यह स्पष्ट कर रहा है कि खाड़ी देशों का रुख धीरे-धीरे बदल रहा है। पहले जहां ये दोनों देश दबे-छुपे अंदाज में ही सही लेकिन तनाव कम करने की बात कर रहे थे। अब दोनों देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।












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