LPG Crisis: 5 साल तक गैस और तेल की रहेगी किल्लत! दुनिया की सबसे बड़ी एनर्जी कंपनी के CEO के दावे से हड़कंप
LPG Crisis: ईरान और इजराइल के बीच छिड़ी जंग अब पूरी दुनिया की रसोई और गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लगाने की दहलीज पर आ गई है। इजराइल द्वारा ईरान के 'साउथ पार्स' गैस फील्ड पर किए गए हमले के जवाब में ईरान ने कतर, सऊदी अरब और यूएई के तेल-गैस ठिकानों को निशाना बनाया है। सबसे ज्यादा चोट कतर को लगी है, जो दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी (LNG) सप्लायर है।
कतरएनर्जी के CEO साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि उनके मुख्य प्लांट 'रास लाफान' को इतना नुकसान पहुंचा है कि उसे ठीक करने में 3 से 5 साल लग सकते हैं। यह संकट सिर्फ खाड़ी देशों का नहीं, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया के लिए ऊर्जा की भारी किल्लत और बेतहाशा महंगाई का संकेत है।

कतर का 'कोल्ड बॉक्स' तबाह: क्यों है यह बड़ी मुसीबत?
कतर के रास लाफान प्लांट में ईरान की मिसाइलों ने 'कोल्ड बॉक्स' को निशाना बनाया है। आसान भाषा में समझें तो यह वह मशीन है जो गैस को ठंडा करके तरल (Liquid) बनाती है ताकि उसे जहाजों के जरिए दूसरे देशों में भेजा जा सके। कतर के पास ऐसी 14 मशीनें हैं, जिनमें से मुख्य यूनिट्स पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। CEO साद अल-काबी का कहना है कि इन मशीनों को दोबारा खड़ा करना कोई दो-चार दिन का काम नहीं है, इसमें सालों का वक्त लगेगा। जब तक ये ठीक नहीं होतीं, कतर अपनी पूरी क्षमता से गैस एक्सपोर्ट नहीं कर पाएगा।
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Qatar LNG crisis: दुनिया भर में गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतें
कतर दुनिया की कुल एलएनजी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा कंट्रोल करता है। इस हमले से कतर की निर्यात क्षमता का 17 प्रतिशत हिस्सा तुरंत ठप हो गया है। इसका सीधा असर यूरोप और एशिया के देशों पर पड़ेगा। चीन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देश जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कतर पर निर्भर थे, अब वहां गैस की भारी कमी हो सकती है। जब बाजार में सप्लाई कम होगी और मांग ज्यादा, तो गैस की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे बिजली से लेकर खाद (Fertilizer) तक सब कुछ महंगा हो जाएगा।
Iran missile attack on Qatar: भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत की लगभग आधी गैस विदेशों से आयात करता है और इसमें कतर हमारा सबसे बड़ा पार्टनर है। अगर कतर से सप्लाई 5 साल तक प्रभावित रहती है, तो भारत को महंगे दामों पर दूसरे देशों से गैस खरीदनी पड़ेगी। इसका सीधा असर हमारे यहां CNG और PNG की कीमतों पर पड़ेगा। इतना ही नहीं, खेती के लिए जरूरी यूरिया बनाने में भी गैस का इस्तेमाल होता है, जिससे खेती की लागत बढ़ सकती है। यह संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
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Middle East War impact: 20 साल पीछे चली जाएगी खाड़ी की अर्थव्यवस्था
साद अल-काबी ने एक डराने वाली बात कही है कि इस युद्ध ने खाड़ी देशों (Gulf Countries) को 10 से 20 साल पीछे धकेल दिया है। इन देशों की पूरी कमाई तेल और गैस पर टिकी है। जब प्रोडक्शन और सप्लाई ही बंद हो जाएगी, तो इनकी आय शून्य हो जाएगी। इसका असर पर्यटन, एयरलाइंस और व्यापार पर भी दिखना शुरू हो गया है। पोर्ट्स खाली पड़े हैं और बड़े प्रोजेक्ट्स रोक दिए गए हैं। यह मंदी सिर्फ खाड़ी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्लोबल मार्केट को भी अपनी चपेट में ले लेगी।
क्या अमेरिका और इजराइल को इस खतरे का अंदाजा था?
हैरानी की बात यह है कि कतर लगातार अमेरिका को आगाह कर रहा था। साद अल-काबी के मुताबिक, उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री और बड़ी कंपनियों को बार-बार चेताया था कि अगर ईरान के गैस फील्ड पर हमला हुआ, तो पलटवार में कतर का इंफ्रास्ट्रक्चर बर्बाद हो जाएगा। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने भी माना है कि उन्हें सप्लाई रुकने का अंदाजा था। बावजूद इसके यह हमला हुआ, जिससे अब पूरी दुनिया एक ऐसे ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है जिसे सुलझाने में शायद आधा दशक लग जाए।












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