Gujarat UCC: मुस्लिम महिलाओं को हलाला से आजादी, दूसरी शादी पर 7 साल जेल! लिव-इन तक पर सख्त नियम, 5 बड़े फैसले
Gujarat UCC: उत्तराखंड के बाद अब गुजरात भी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। राज्य कैबिनेट ने 'गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC), 2026' के मसौदे को मंजूरी दे दी है और इसे विधानसभा सचिवालय भेज दिया गया है। सरकार की कोशिश है कि मौजूदा बजट सत्र में ही इस विधेयक को पास करा लिया जाए। अगर ऐसा होता है तो गुजरात देश का दूसरा राज्य बन जाएगा जहां सभी धर्मों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू होगा।
सभी के लिए एक जैसा कानून (Uniform Law for All)
UCC लागू होने के बाद राज्य में शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियम सभी समुदायों के लिए समान हो जाएंगे। इसका मतलब है कि धर्म, जाति या पंथ के आधार पर अलग-अलग कानून खत्म हो जाएंगे। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (STs) को इस कानून से बाहर रखा जा सकता है, क्योंकि उनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित हैं। आइए जानते हैं गुजरात UCC के 5 बड़े फैसले।

▶️ 1. हलाला प्रथा पर सख्त रोक (Ban on Halala Practice)
इस विधेयक का सबसे बड़ा और चर्चित प्रावधान मुस्लिम महिलाओं से जुड़ा है। मसौदे में हलाला प्रथा पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। अब कोई भी दंपति तलाक के बाद बिना किसी शर्त के दोबारा शादी कर सकता है। यानी पहले किसी तीसरे व्यक्ति से शादी करने की बाध्यता खत्म हो जाएगी।
अगर कोई इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसे तीन साल तक की जेल या एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यह कदम मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
▶️ 2. एक से ज्यादा शादी पर सजा (Ban on Polygamy)
UCC में बहुविवाह पर भी पूरी तरह रोक लगाने की बात कही गई है। अगर कोई व्यक्ति बिना कानूनी तलाक लिए दूसरी या तीसरी शादी करता है, तो उसे सात साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही सभी धर्मों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र भी तय कर दी गई है, जिसमें पुरुषों के लिए 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल की उम्र अनिवार्य होगी।
▶️ 3. लिव-इन रिलेशनशिप भी कानून के दायरे में (Rules for Live-in Relationship)
गुजरात UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी रूप से मान्यता देने का प्रस्ताव है। इसके तहत साथ रहने वाले जोड़े को अपने रिश्ते का रजिस्ट्रेशन जिला रजिस्ट्रार के पास कराना होगा। इतना ही नहीं, अगर दोनों अलग होते हैं तो उसकी जानकारी भी देनी होगी।
लिव-इन से जन्म लेने वाले बच्चे को पूरी तरह वैध माना जाएगा और उसे सभी कानूनी अधिकार मिलेंगे। यदि किसी महिला को उसका पार्टनर छोड़ देता है, तो वह गुजारा भत्ता मांग सकती है।
▶️ 4. शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य (Mandatory Registration)
विधेयक में यह भी साफ किया गया है कि शादी धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार हो सकती है, लेकिन उसका रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। इसी तरह तलाक का भी पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो उस पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कानूनी विवाद कम होंगे।
▶️ 5. उत्तराधिकार के नियम भी एक जैसे (Uniform Inheritance Law)
उत्तराधिकार के मामलों में भी सभी धर्मों के लिए एक समान नियम लागू होंगे। अगर कोई व्यक्ति वसीयत नहीं करता है, तो संपत्ति को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली श्रेणी में पति या पत्नी, बच्चे और माता-पिता शामिल होंगे। दूसरी श्रेणी में दादा-दादी, नाना-नानी और सौतेले माता-पिता आएंगे। इसके अलावा अन्य रिश्तेदार तीसरी श्रेणी में शामिल होंगे।
▶️ कब पास होगा बिल? (When Will Bill Be Passed)
सरकार की योजना है कि इस विधेयक पर 24 मार्च को चर्चा की जाए और 25 मार्च को इसे पास कराया जाए। इससे पहले राज्य की समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंप दी थी। सरकार का कहना है कि यह कानून समानता, लैंगिक न्याय और सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम है।
▶️ गुजरात के बाहर रहने वाले भी दायरे में (Applicability of Law)
यह कानून केवल राज्य के भीतर ही नहीं, बल्कि गुजरात के बाहर रहने वाले राज्य के निवासियों पर भी लागू होगा। हालांकि, कुछ पारंपरिक समुदायों और अनुसूचित जनजातियों को इससे छूट दी जाएगी।
▶️ FAQs Gujarat UCC
1. गुजरात UCC क्या है?
यह एक ऐसा कानून है, जिसमें सभी धर्मों के लिए शादी, तलाक और संपत्ति के नियम समान होंगे।
2. क्या हलाला प्रथा पूरी तरह खत्म हो जाएगी?
हाँ, प्रस्तावित कानून में हलाला जैसी प्रथा पर रोक लगाने का प्रावधान है।
3. क्या एक से ज्यादा शादी करने पर सजा होगी?
हाँ, बिना तलाक दूसरी शादी करने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है।
4. लिव-इन रिलेशनशिप पर क्या नियम होंगे?
लिव-इन को रजिस्टर करना जरूरी होगा और महिला को गुजारा भत्ता का अधिकार मिलेगा।
5. क्या यह कानून पूरे भारत में लागू होगा?
नहीं, फिलहाल यह सिर्फ गुजरात राज्य में लागू होगा।












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