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आखिर पूजा-पाठ में क्यों जलाते हैं दीपक, क्या है इसका महत्व?

By पं. गजेंद्र शर्मा
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नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में हर धार्मिक कार्य के प्रारंभ में दीपक प्रज्जवलित करने का नियम है। चाहे पूजा-पाठ हो या कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम, सबसे पहले दीपक जलाए जाने की परंपरा स्थापित है। हमारे यहां दीपक प्रज्वलित करने के बाद ही किसी काम को शुरू किया जाता है।

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आखिर दीपक जलाया जाना इतना आवश्यक क्यों है और इसे जलाए जाने के कारण क्या हैं? आइए जानते हैं-

हमारे देश में हर कार्य से पहले दीपक जलाना इतना जरूरी माना जाता है कि यह हमारी आदत में शामिल होे चुका है। यहां तक कि भारत में हर सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रारंभ भी मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलित करने के साथ होता है। सभी सरकारी कार्यक्रमों के प्रसारण में भी हम देखते हैं कि पहले दीपक ही जलाया जाता है। इसके पीछे हमारी संस्कृति की एक मान्यता उत्तरदायी है।

सूर्य को ब्रह्मांड की समस्त ऊर्जा का केंद्र

सूर्य को ब्रह्मांड की समस्त ऊर्जा का केंद्र

हमारे यहां सूर्य को ब्रह्मांड की समस्त ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। सूर्य ही समस्त ग्रहों की चेतना का आधार है, उससेे ही जीवन प्रारंभ और पोषित होता है। इसीलिए भारतीय संस्कृति में सूर्य को देवता मान पूजा जाता है। इसी तारतम्य में धरती पर अग्नि को सूर्य की ऊर्जा का परिवर्तित रूप माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अग्नि की उपस्थिति में प्रारंभ किए गए समस्त कार्य अवश्य ही सफल होते हैं। इस प्रकार हर कार्यक्रम की सफलता की कामना के लिए प्रारंभ में दीपक जलाया जाता है।

हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है

हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है

दूसरी बात यह है कि हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है, जिनमें धरती, आकाश, अग्नि, वायु और जल सम्मिलित हैं। इनमें भी अग्नि हमारे अस्तित्व का एक अटूट हिस्सा है। माना जाता है कि जब हम किसी कार्यक्रम, पूजा-पाठ आदि के प्रारंभ में दीप प्रज्वलित करते हैं तो उसी के साथ हम अपने अस्तित्व को जीवंत कर रहे होते हैं।

हमारे शरीर का अग्नि तत्व

हमारे शरीर का अग्नि तत्व

दीपक जलाने के साथ ही हमारे शरीर का अग्नि तत्व जागृत हो जाता है और हम उस कार्यक्रम से आंतरिक रूप से जुड़ जाते हैं। अंतर्मन से तादात्म्य स्थापित हो जाने के बाद हम पूरी निष्ठा से उस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सक्रिय हो जाते हैं।

सूर्य या अग्नि

सूर्य या अग्नि

तीसरी बात यह है कि ब्रह्मांड का निर्माण भी पंचतत्वों के न्यूनाधिक संयोजन से हुआ माना जाता है। इसीलिए पंचतत्वों में सम्मिलित अग्नि महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वह ऊर्जा का मुख्य स्रोत होती है। समस्त ब्रह्मांड सूर्य या अग्नि से ही ऊर्जा पाता है। इसीलिए जब हम किसी धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम से पहले दीपक जलाते हैं तो समस्त ब्रह्मांड की ऊर्जा वहां केंद्रीभूत हो जाती है।

सकारात्मक ऊर्जा

सकारात्मक ऊर्जा

भारतीय संस्कृति में कोई भी नियम या परंपरा खोखली नहीं है। हमारे मनीषी ऋषियों ने गहन शोध के बाद ही हर उस नियम को जीवन से जोड़ा है, जो सार्वजनिक रूप से सकारात्मकता लाता है। दीपक जलाना भी एक ऐसा ही नियम है, जो जीवन को उसके मूलतत्वों से जोड़ता है और व्यक्ति को सकारात्मक रूप से ऊर्जावान बनाता है।

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English summary
Lamp or deepak is a Hindu religious ritual of worship, a part of puja, in which light from wicks soaked in ghee (purified butter) or camphor is offered to one or more deities.
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