Online Gambling: कोरोना से बड़ी महामारी बनता इंटरनेट पर जुआ खेलने का नशा
अमेरिकन राजनीतिज्ञ जॉन मिल्टन ने कहा था कि सच्चा भाग्यशाली वह है, जो जुआ नहीं खेलता। लेकिन तुरंत धन पाने के लालच के कारण कुछ लोग जुए के दलदल में ऐसा धँसते हैं कि बर्बाद हो जाते हैं।

Online Gambling: कुछ ही दिन पहले पंजाब एंड सिंध बैंक के एक अधिकारी द्वारा दिल्ली के एक कॉलेज में स्थित बैंक की शाखा से 34.1 करोड़ रुपये का गबन किये जाने की खबर आयी थी। बेदांशु शेखर नाम के इस अधिकारी ने यह सारी रकम इंटरनेट पर जुआ खेलकर गंवा दी थी। ऐसी ही कुछ घटनाएं और भी हैं, जो पिछले कुछ अर्से में सामने आयी हैं। अगस्त में हैदराबाद के सॉफ्टवेयर इंजीनियर एम. श्रीसाई ने इंटरनेट पर जुआ खेलने के लिए पहले पॉंच लाख रुपये उधार लिये और बाद में कर्ज चुकाने के लिए अपने ही एक दोस्त के घर से सोना लूटने की कोशिश की। सितंबर में, मुंबई के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट कपिल खुंट ने अपने एम्पलॉयर के यहॉं से 15 करोड़ रुपये चुरा लिए। इन सभी घटनाओं में एक ही चीज कॉमन थी, इंटरनेट पर जुआ खेलने की लत।
लालच में फंसते जाते हैं खिलाड़ी
बेदांशु, श्रीसाई और कपिल देश के उन 27 करोड़ लोगों में से है, जो रियल मनी गेम में दांव लगाते हैं। इनमें से सिर्फ पॉंच फीसदी ही ऐसे होते हैं, जो गेम जीतते हैं। बाकी सिर्फ अपनी रकम गंवाते चले जाते हैं। पहले छोटे से दांव से शुरू होने वाले जुए में खिलाड़ी जीते या हारे, उसे खेल की लत लगना तय है। वह हार जाये तो उसमें हारी रकम को वापस हासिल करने और घाटे को मुनाफे में बदलने का जूनून उसे अगले दांव के लिए उकसाता है, और अगर वह जीत जाता है तो उसका बढ़ता लालच उसे आगे खेलते रहने के लिए प्रेरित करता जाता है।
धीरे-धीरे यह शौक व्यसन में बदल जाता है और फिर एक लाइलाज बीमारी में। अफसोस की बात तो यह है कि इंटरनेट पर जुआ या फिर ऑनलाइन गैम्बलिंग वाले बहुत सारे प्लेटफॉर्म तो यूजर्स का केवाईसी तक नहीं कराते। इसकी वजह से अवयस्क यूजर्स भी जुए और अपराध के दुष्चक्र में फँस रहे हैं।
यह समस्या विश्व के अधिकतर देश झेल रहे हैं। ब्रिटेन में बीते चार साल में ऑनलाइन गैम्बलिंग के शिकार लोगों ने डेढ़ लाख करोड़ रुपये गंवाये हैं और चार सौ से ज्यादा लोग खुदकुशी कर चुके हैं। हालत यह है कि वहॉं विशेषज्ञ इसे कोरोना से भी बड़ी बीमारी मानने लगे हैं।
50 अरब डॉलर का है बाजार
गृह मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय बिजनेस एडवाइजरी कंपनी केपीएमजी के आंकड़ों के मुताबिक, आरएमजी यानी ऑनलाइन रीयल मनी गेमिंग का भारतीय बाजार लगातार फल-फूल रहा है। वित्त वर्ष 2021 में यह लगभग 50 अरब डॉलर का था, जिसके वर्ष 2025 में बढ़कर 61 अरब डॉलर तक हो जाने का अनुमान है।
ऑनलाइन गैम्बलिंग का यह फैलता बाजार बड़ी तादाद में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को लुभा रहा है। इसी का नतीजा है कि ऑनलाइन गैम्बलिंग के लिए आज यहॉं फैंटेसी क्रिकेट, प्ले एंड विन, माई 11 सर्किल, ऑनलाइन रमी, पोकर, तीन पत्ती, बबल गेम, फेयर प्ले, कैसिनो जैसे दर्जनों गैम्बलिंग प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जो धड़ल्ले से पूरे देश में लोगों को लूटने में लगे हैं। कोई क्रिकेट में सट्टा लगवाता है, कोई ताश के खेल खिलाता है तो कोई लूडो खिलवाकर पैसे कमाता है।
मकसद सबका एक ही है, इंस्टेंट मनी हासिल करने के पीछे पागल लोगों की कमजोरी का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठायें। मुनाफे की इस अंधी दौड़ में इन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इनकी वजह से कौन अपराधी बन रहा है, कौन साइबर अपराधों का शिकार बन रहा है, कौन अवसाद में पहुँच चुका है और कौन खुदकुशी कर रहा है। रही-सही कसर इसे हमारे यहॉं गैम्बलिंग को लेकर पुख्ता कानूनों की कमी पूरी कर देती है।
सवा सौ साल पुराने कानून से कैसे लगेगी लगाम
अभी जिस कानून के तहत गैम्बलिंग निषिद्ध है, वह 1867 का पब्लिक गेमिंग एक्ट है। सवा सौ साल पुराना यह कानून, महज दो दशक पहले ही चलन में आयी ऑनलाइन गैम्बलिंग के मामले में कितना कारगर होगा, इसका अंदाजा लगाना कोई मुश्किल काम नहीं है। इसके अलावा गैम्बलिंग को लेकर राज्यों के कानूनों में भी एकरूपता का अभाव है। संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए अगर राज्य चाहे तो सट्टेबाजी और जुए पर कानून बना सकते हैं। लेकिन, इसे लेकर उनमें बहुत ज्यादा इच्छाशक्ति नजर नहीं आती।
इस साल तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और राजस्थान जैसे कुछ राज्यों में इसे लेकर कुछ प्रयास अवश्य हुए हैं, लेकिन वहॉं भी अभी तक इन्हें कानून का रूप नहीं दिया जा सका है। अधिकतर जगहों पर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा की जा रही है। गोवा, सिक्किम और दमन आदि कुछ राज्यों में ऑनलाइन गैम्बलिंग को कानूनी मान्यता मिली हुई है। जहॉं नहीं है, वहॉं ये कंपनियॉं इसकी आड़ में कार्रवाई से बच जाती हैं कि कई अदालतों ने ऑनलाइन गेमिंग को जुए की बजाय स्किल गेमिंग के तहत मान्यता दे रखी है। इसके अलावा, ये कंपनियॉं भारतीय कानूनों के तहत, किसी भी अथॉरिटी से पंजीकृत नहीं हैं, इसकी वजह से भी इनकी कोई जवाबदेही तय नहीं की जा सकती है।
केंद्र सरकार के सख्त कदम
ऐसा नहीं कि केंद्र सरकार, इस समस्या को लेकर बेखबर है। 1 अप्रैल 2022 को सरकार ऑनलाइन गेमिंग (रेगुलेशन) बिल लाई थी। हालांकि अभी वह अटका हुआ है, लेकिन अगर यह कानून बन जाता है तो ऑनलाइन गेमिंग को लेकर पूरे देश में एक ही प्रकार की व्यवस्था व नियमन होगा।
इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 3 अक्टूबर को एक एडवाइजरी जारी करते हुए ऑनलाइन सट्टेबाजी वाले प्लेटफॉर्मों के विज्ञापन पर रोक लगायी है। इससे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजीटल, सोशल मीडिया और ओटीटी आदि पर गैम्बलिंग एड नहीं दिखाये जा सकेंगे। पिछले ही हफ्ते केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने गूगल को चिट्ठी लिखकर फटकार लगायी है कि रोक के आदेशों के बावजूद गूगल और यूट्यूब पर विदेशी सट्टेबाजी के विज्ञापन दिखाया जाना जारी है, इसे तुरंत बंद किया जाये।
स्वनियामक संगठन, ई-गेमिंग फेडरेशन इस मामले में बीच का रास्ता चाहती है। उसकी सरकार से अपेक्षा है मॉंग है कि वह ऐसी व्यवस्था करे, जो इंडस्ट्री और खिलाड़ियों, दोनों के हित में हो। वहीं कुछ अर्थशास्त्री गैम्बलिंग पर जीएसटी की उच्च दरें लगाने की सिफारिश कर रहे हैं।
रेगुलेशन से बेहतर रहेगी रोक
गेमिंग/या गैम्बलिंग को कानूनी दर्जा देकर, कर लगाकर, या कर की दरें बढ़ाकर भी इस समस्या का समाधान निकल पायेगा, इसमें संदेह है। वैध होने के बाद तो ये कंपनियॉं अपना कारोबार और भी जोर-शोर से चलायेंगी। उनका मुनाफा बढ़ेगा, सरकार का राजस्व। लेकिन, पैसा तो अंतत: खिलाड़ी की जेब से ही जाना है। इसलिए, उन्हें ऑनलाइन गैम्बलिंग के चक्कर में बर्बाद होने से बचाने के लिए इसके हर फॉर्मेट पर पूरी तरह रोक लगाना ही एक सही रास्ता हो सकता है। गेम ऑफ चांस और गेम ऑफ स्किल के बीच का फर्क इतना धुंधला नहीं है कि उसकी आड़ में किसी को भी कुछ भी करते रहने की छूट दी जाती रहे।
यह भी पढ़ें: Indians Leaving India: विदेश के मोह में देश से विछोह
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
-
IAS IPS Love Story: 'ट्रेनिंग के दौरान कर बैठे इश्क',कौन हैं ये IAS जिसने देश सेवा के लिए छोड़ी 30 लाख की Job? -
Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 8 March: आज के मैच का टॉस कौन जीता- भारत vs न्यूजीलैंड -
Aaj Ka Match Kon Jeeta 8 March: आज का मैच कौन जीता- भारत vs न्यूजीलैंड फाइनल, टी20 विश्व कप -
Gold Rate Today: जंग में ठंडी पड़ी सोने की कीमत! ₹5060 सस्ता गोल्ड, आपके शहर में आज क्या है 22K-18K का भाव? -
Aaj Ke Final Match Ka Toss Kitne Baje Hoga: आज के फाइनल मैच का टॉस कितने बजे होगा- भारत vs न्यूजीलैंड -
Athira Struggle Story: याददाश्त गंवाई-व्हीलचेयर बनी साथी, फिर भी UPSC में गाढ़े झंडे! IAS बनने में कितनी दूरी? -
Bihar Next CM:कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री? बेटे की राजनीति में एंट्री से पहले CM नीतीश ने कर दिया ऐलान! -
Aaj Ka Final Match Free Mei Live Kaise Dekhe: आज का फाइनल मैच फ्री में लाइव कैसे देखें- भारत vs न्यूजीलैंड -
Mumbai Gold Silver Rate Today: महिला दिवस पर सोना-चांदी ने फिर किया हैरान, कहां पहुंचा मुंबई में भाव? -
Weather Delhi NCR: दिल्ली में गर्मी और पॉल्यूशन के टॉर्चर से कब मिलेगी राहत? बारिश पर आ गया IMD का बड़ा अपडेट -
T20 World Cup 2026 : सच निकली मशहूर ज्योतिषी की भविष्यवाणी, भारत बना विश्वविजेता? -
PM Kisan 22nd Installment: 22वीं किस्त से पहले सरकार ने हटाये लाखों नाम, आपके खाते में कब आएंगे पैसे?












Click it and Unblock the Notifications