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नूपुर शर्मा विवाद: मकबूल फिदा हुसैन को सम्मानित करने वाला कतर अपने गिरेबां में क्यों नहीं झांकता?

नई दिल्ली, 08 जून। आरोप है कि नूपुर शर्मा ने प्रोफेट मोहम्मद पर विवादित बयान दिया। भाजपा ने इस आरोप में नूपुर शर्मा को पार्टी से निकाल दिया। इसके आधार पर करीब 15 मुस्लिम देशों ने भारत का विरोध किया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ लोग भारत की छवि खराब करने पर तुले हुए हैं। भारत की राजनीतिक परिस्थितियों को मुस्लिम विरोधी दिखाने की कोशिश हो रही है। पश्चिम एशिया के देश कतर ने कह दिया कि इस घटना पर भारत को माफी मांगनी चाहिए। लेकिन कतर को भी अपने गिरेबां में झांक कर जरूर देखना चाहिए।

Nupur Sharma statement Controversy Why Qatar doesnt look at its own?

जब मकबूल फिदा हुसैन ने हिंदू-देवी देवताओं की आपत्तिजनक पेंटिंग्स बनायी थी तब कतर ने क्या धार्मिक सहिष्णुता का परिचय दिया था ? कतर ने मकबूल फिदा को अपने देश की नागरिकता दे कर सम्मानित किया था। क्या धर्म के प्रति आदर के मामले में यह दोहरा रवैया नहीं है ? जो गलती नूपुर शर्मा ने की वहीं गलती तो मकबूल फिदा ने की थी। लेकिन कतर के लिए मकबूल सही हो गये और नूपुर गलत हो गयीं। कतर ही क्यों भारत में भी कुछ लोगों का रवैया ऐसा है कि वे नूपुर को सूली पर लटका देना चाहते हैं। उन्हें रेप की धमकियां मिल रहीं हैं। कोई जान से मारने की धमकी दे रहा है। अगर नूपुर के साथ कोई अनहोनी हो गयी तब इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा ? यह एक संवेदनशील मामला है। फिर भी कुछ लोग राजनीतिक फायदे के लिए आग में घी डाल रहे हैं। इससे भारत की एकता और अखंडता प्रभावित होगी।

भारत की छवि खराब करने की कोशिश

भारत की छवि खराब करने की कोशिश

टेलीविजन डिबेट का यह मामला भारत से निकल कर अब विदेश तक जा पहुंचा है। करीब 15 मुस्लिम देशों ने भारतीय राजनयिकों से जवाब तलब कर इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय रूप दे दिया है। अर्थनीति और कूटनीति के प्रभावित होने की आशंका में भारत दबाव झेल रहा है। इसलिए नूपुर शर्मा को पार्टी से निकाल दिया। लेकिन इस मामले में नीदरलैंड और फ्रांस के राजनीतिज्ञों की सोच अलग है। नीदरलैंड के सांसद गिर्ट विल्डर्स ने नूपुर शर्मा का समर्थन किया है। उनका कहना है कि तुष्टिकरण कभी काम नहीं करता। इससे चीजें और खराब होती हैं। भारत को मुस्लिम देशों की धमकी से दबाव में नहीं आना चाहिए। गिर्ट ने जब नूपुर शर्मा का समर्थन किया तो अब उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी जा रही है। क्या किसी धार्मिक विवाद के आधार पर किसी की हत्या जायज हो सकती है ? क्या किसी को जान से मार देने के बाद नफरत की आग और नहीं भड़केगी ? ऐसा ही एक घटना जब फ्रांस में हुई थी तब क्या हुआ था ?

फ्रांस में जब ऐसा हुआ था तब क्या हुआ था ?

फ्रांस में जब ऐसा हुआ था तब क्या हुआ था ?

अक्टूबर 2020 की बात है। फ्रांस की राजधानी पेरिस के उपनगर का एक हाईस्कूल। एक शिक्षक अभिव्यक्ति की आजादी का पाठ्यक्रम पढ़ा रहे थे। शिक्षक का नाम सैमुअल पाटी था। वे आठवीं कक्षा में पढ़ा रहे थे। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वाली घंटी में प्रोफेट मोहम्मद का एक कार्टून दिखा दिया। इसके बाद बवाल मच गया। मुस्लिम देशों में इसका विरोध शुरू हो गया। फ्रांस के खिलाफ धरना प्रदर्शन होने लगे। इसी बीच चेचन्या के एक मुस्लिम शरणार्थी ने स्कूल के बाहर सैमुअल पाटी की हत्या कर दी। पुलिस ने फौरन कार्रवाई की जिसमें चेचन शरणार्थी भी मारा गया। उसने फ्रांस में शरण ले रखी थी । सन 2000 में रूसी सैनिकों ने चेचन्या में भारी कत्लेआम मचाया था। तब चेचन्या के कई मुसलमानों ने भाग कर फ्रांस में शरण ली थी। इसके बाबजूद वह चेचन शरणार्थी हत्या का दुष्साहस कर बैठा। इस घटना की फ्रांस में तीखी प्रतिक्रिया हुई। पूरे देश में सैमुअल पाटी के प्रति सहानुभूति की लहर दौड़ गयी। फ्रांसीसी लोग सैमुअल के समर्थन में सड़कों पर उतर गये। सरकार भी सैमुअल के समर्थन में खड़ी हो गयी। राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी सैमुअल के प्रति सम्मान प्रगट किया। मरने के बाद सैमुअल को सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया गया। राष्ट्रपति इमैनुअल ने तब कहा था, फ्रांस अभिव्यक्ति की आजादी का हमेशा समर्थन करेगा। कार्टून बनाना भी इसी आजादी का हिस्सा है। देश में हिंसा के लिए कार्टून को बहाना नहीं बनाया जा सकता। हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। लेकिन किसी भी कीमत पर हिंसा बर्दाश्त नहीं करेंगे। सैमुअल के इस रूख से फ्रांस की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ा। बल्कि उनके प्रति समर्थन और बढ़ गया था। अप्रैल 2022 में जब फ्रांस में राष्ट्रपति पद का चुनाव हुआ तो इमैनुअल ने लगातार दूसरी बार चुनाव जीत लिया। 20 साल में लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतने वाले वे पहले फ्रांसीसी नेता हैं।

भारत पर दबाव बनाने की कोशिश

भारत पर दबाव बनाने की कोशिश

फ्रांस एक मजबूत और समपन्न देश है इसलिए उसने मुस्लिम देशों के विरोध की परवाह नहीं की। लेकिन भारत अपने आर्थिक हितों की पूर्ति के लिए पश्चिम एशिया के मुस्लिम देशों पर निर्भर है। भारत की कुल खपत का 60 फीसदी खनिज तेल पश्चिम एशिया के देशों से आता है। सऊदी अरब और इराक, भारत के बड़े तेल आयातक देश हैं। पश्चिम एशिया के देशों में करीब 90 लाख भारतीय लोग काम करते हैं। इससे भारत को बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है। पेट्रोलियम पदार्थों की निर्बाध आपूर्ति और विदेशी मुद्रा की आमद भारत की अर्थव्यवस्था को सुचारु रखने के लिए बेहद जरूरी है। संयुक्त अरब आमिरात के साथ भारत का बहुत बड़ा व्यापारिक हित जुड़ा है। इसलिए भारत पश्चिम एशिया के मुस्लिम देशों को नाराज नहीं करना चाहता। इन देशों की नाराजगी को दूर करने के लिए ही भाजपा ने नूपुर शर्मा पर कार्रवाई की है। अब इस मामले में तालिबान भी दखल देने लगा है। लेकिन क्या तालिबानी दूसरे धर्म के प्रति आदर का भाव रखते हैं ? दूसरों को सीख देना सबसे आसान है। लेकिन ऐसे लोगों को आइना जरूर देखना चाहिए ताकि वे अपने असली अक्स से रू-बरू हो सकें।

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