मिर्जापुर: महाशिवरात्रि पर नहाने गए भाई-बहन डूबे, किसी को पता न चला!
पर्व पर गंगा में स्नान करने का महात्मय सुनकर संजय की 10 वर्षीय बेटी पूजा और 8 वर्षीय बेटा अतुल बंधी में नहाने चले गए। नहाते समय दोनों पता नहीं कब गहरे पानी में चले गए और डूबने से दोनों की मौत हो गई।
मिर्जापुर। महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व पर दो मासूम बच्चों के बंधी में डूबने से हुई मौत का मामला सामने आया है। माता-पिता के काम पर जाने के बाद दोनों बहन-भाई घर के पास बने बंधी में गंगा स्नान करने गए थे। मामला मिर्जापुर जिले के मड़िहान थाना क्षेत्र के पचोखरा गांव का है। चरवाहों की सूचना पर पहुंचे परिजनों ने लोगों के साथ मिलकर बंधी से दोनों बच्चों का शव बाहर निकाला। वहीं इस घटना से पूरे परिवार में कोहराम मच गया। ये भी पढ़ें: मुस्लिम महिला के सपने में आए शिव, हुई एक अनहोनी, फिर शिवालय बनने की पूरी कहानी

महाशिवरात्रि के महात्मय को सुनकर गए नहाने
शिवरात्रि पर जहां पूरा इलाका हवन, पूजन में व्यस्त रहा और कई स्थानों पर मेलों का आयोजन हुआ। ऐसे में पचोखरा गांव से सटी दलित बस्ती है और यहां से सौ मीटर की दूरी पर एक सरकारी बंधी है। इसमें बारह महीने पानी भरा रहता है। बंधी से कुछ ही दूरी पर मजदूर संजय राम का घर है। पर्व पर गंगा में स्नान करने का महात्मय सुनकर संजय की 10 वर्षीय बेटी पूजा और 8 वर्षीय बेटा अतुल बंधी में नहाने चले गए। नहाते समय दोनों पता नहीं कब गहरे पानी में चले गए और डूबने से दोनों की मौत हो गई।
चारवाहों ने दी घटना की सूचना
वहीं, दोपहर में करीब एक बजे के जब चरवाहे पशुओं को लेकर बंधी पर पहुंचे तो दोनों बच्चों का शव देखकर अवाक रह गए। चरवाहों ने घटना की जानकारी बच्चों के परिजनों को दी। कुछ ही देर में परिजन और ग्रामीणों की मौके पर भीड़ जुट गयी। लोगों ने बंधी से बच्चों का शव निकालकर स्थानीय चिकित्सक को दिखाया जहां दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया। घटना से पूरे गांव में कोहराम मच गया। शाम को चार बजे तक परिवार के सदस्यों की ओर से घटना की जानकारी पुलिस को नहीं दी गई थी।
मजदूरी के चक्कर में बच्चों पर ध्यान न देना पड़ा भारी
रोजी रोजगार के चक्कर में पति पत्नी बच्चों का ध्यान नहीं रख पाए और दोनों शिवरात्रि के दिन भी में काम में व्यस्त रहे। इसी कारण उसके दोनों बच्चे बंधी में नहाने चले गए और दोनों की डूबने से मौत हो गई। संजय और उसकी पत्नी यह कहकर रोते रहे कि मजदूरी के चक्कर में वे दोनों अपने बच्चों की सही से देखरेख नहीं कर पाए और उनकी मौत हो गई। ये भी पढ़ें: इस शिव मंदिर पर हुई थी वो घटना जिसके बाद हुआ 1857 का संग्राम











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