Balen Shah Controversy: खतरे में बालेन शाह की कुर्सी! काठमांडू की सड़कों पर उतरे नेपाल के Gen-Z, मांगा इस्तीफा
Balen Shah Border Controversy: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अपने एक बयान के बाद बड़े राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। भारत-नेपाल सीमा विवाद पर संसद में दिए गए उनके बयान ने नेपाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। बालेन शाह ने कहा था कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कुछ जगहों पर भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है।
इस बयान के बाद विपक्षी दलों के साथ-साथ बड़ी संख्या में युवा और छात्र संगठन भी उनके खिलाफ सड़क पर उतर आए। सोशल मीडिया से लेकर संसद और सड़कों तक, बालेन शाह को लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

क्या था बालेन शाह का विवादित बयान?
संसद में बोलते हुए बालेन शाह ने दावा किया कि जांच के दौरान उन्हें पता चला कि सीमा विवाद सिर्फ एकतरफा मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि नेपाल ने भी कुछ इलाकों में भारतीय भूमि पर अतिक्रमण किया है। इसके साथ ही उन्होंने सीमा विवाद के समाधान में चीन और ब्रिटेन जैसे देशों की भूमिका का भी जिक्र किया। यही बयान विवाद की सबसे बड़ी वजह बना। नेपाल के कई राजनीतिक दलों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रधानमंत्री को ज्यादा सावधानी से बोलना चाहिए था।
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Gen-Z और छात्र संगठन क्यों हुए नाराज?
नेपाल के कई छात्र और युवा संगठनों का आरोप है कि प्रधानमंत्री का बयान देश के आधिकारिक रुख से अलग है। उनका कहना है कि सीमा विवाद नेपाल की संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा है और इस पर दिया गया बयान देश की स्थिति को कमजोर कर सकता है। काठमांडू में छात्रों ने प्रदर्शन करते हुए बालेन शाह के खिलाफ नारे लगाए। कई युवाओं ने सोशल मीडिया पर भी उनकी आलोचना की। विरोध करने वालों का कहना है कि प्रधानमंत्री को अपने बयान पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
संसद के अंदर भी बढ़ा विरोध
बालेन शाह के बयान के बाद नेपाल की संसद में लगातार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री से बयान वापस लेने की मांग की। कुछ दलों ने इसे राष्ट्रहित के खिलाफ बताया और संसद की कार्यवाही तक बाधित कर दी। विरोध इतना बढ़ गया कि दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष का तर्क है कि आज तक भारत ने भी ऐसा दावा सार्वजनिक रूप से नहीं किया, फिर प्रधानमंत्री ने यह बात संसद में क्यों कही।
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भारत ने भी दिया साफ संदेश
भारत ने इस पूरे विवाद पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। भारत का कहना है कि सीमा से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच बातचीत से होना चाहिए। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी तीसरे देश की भूमिका की जरूरत नहीं है। भारत और नेपाल के बीच सीमा के अधिकांश हिस्से का निर्धारण पहले ही हो चुका है। ऐसे में नई बहस के बीच दोनों देशों के रिश्तों और सीमा वार्ता पर भी राजनीतिक नजरें टिक गई हैं।












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