SU-75 Checkmate: F-35 की बादशाहत खत्म करने निकला रूस का S-75 चेकमैट, कब से भरेगा उड़ान?
SU-75 Checkmate: रूस की सरकारी एयरोस्पेस कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने अपने नए फिफ्थ जनरेशन के लड़ाकू विमान S-75 Checkmate के पहले फ्लाइंग प्रोटोटाइप पर काम शुरू कर दिया है। यह जानकारी UAC के CEO वादिम बडेखा ने दी है।
हालांकि इस प्रोजेक्ट को लेकर एक बड़ा ट्विस्ट भी सामने आया है। 2021 में जब इस विमान को पहली बार दुनिया के सामने पेश किया गया था, तब उम्मीद थी कि यह 2026 तक सेवा में शामिल हो जाएगा। लेकिन अब रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी पहली उड़ान 2027 तक होने की संभावना है। यानी प्रोजेक्ट अपने शुरुआती शेड्यूल से कई साल पीछे चल रहा है।

2021 वाला मॉडल अब शायद दिखे ही नहीं
रिपोर्ट्स के मुताबिक S-75 का मौजूदा डिजाइन 2021 में दिखाए गए मॉडल से काफी अलग होगा। बीते कुछ सालों में रूस ने अपने Su-57 फिफ्थ जेनरेशन फाइटर पर काफी काम किया है और माना जा रहा है कि उसी प्रोग्राम से मिले अनुभव और तकनीकों को S-75 में शामिल किया गया है।
यही वजह है कि नए डिजाइन में कई बदलाव किए गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स तो यह भी कह रही हैं कि भविष्य में इस विमान का नाम भी बदल सकता है और "Checkmate" सिर्फ मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल किया गया अस्थायी नाम था।
कम खर्च में फिफ्थ जेनरेशन फाइटर बनाने का प्लान
S-75 प्रोग्राम की शुरुआत एक खास सोच के साथ हुई थी। रूस ऐसा फाइटर बनाना चाहता था जो Su-57 की तुलना में सस्ता हो, लेकिन उसकी कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करे। योजना के मुताबिक इसमें Su-57 जैसा इंजन, कॉम्पोजिट मटेरियल, हथियार सिस्टम और एवियोनिक्स का छोटा व हल्का वर्जन इस्तेमाल किया जाना था। सीधे शब्दों में कहें तो रूस एक ऐसा सिंगल-इंजन स्टील्थ फाइटर बनाना चाहता था जो कम कीमत में मॉर्डन कैपेसिटी और टेक्नोलॉजी को भर सके।
Su-57 का छोटा भाई बन सकता है S-75
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि S-75 को उसी तरह डिजाइन किया गया है जैसे चीन ने J-16 और J-10C या अमेरिका ने F-15 और F-16 को विकसित किया था। यानी एक महंगा और बेहद ताकतवर फाइटर, और उसके साथ एक सस्ता लेकिन आधुनिक विकल्प। रूस के लिए Su-57 हाई-एंड प्लेटफॉर्म है, जबकि S-75 को लो-कॉस्ट विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
सिर्फ एक्सपोर्ट नहीं, रूस भी खरीद सकता है
शुरुआत में S-75 को मुख्य रूप से विदेशी ग्राहकों के लिए तैयार किया जा रहा था। रूस की योजना थी कि जो देश Su-57 नहीं खरीद सकते, उन्हें कम कीमत वाला S-75 ऑफर किया जाए। लेकिन अब रूसी रक्षा हलकों से ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि रूसी एयरोस्पेस फोर्स भी भविष्य में इस विमान को खरीदने पर विचार कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो S-75 केवल एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट नहीं रहेगा, बल्कि रूस की अपनी वायुसेना का भी हिस्सा बन सकता है।
Su-57 आगे बढ़ रहा, लेकिन S-75 का भविष्य अभी भी धुंधला
जहां Su-57 प्रोग्राम ने हाल के सालों में तेज़ी से प्रगति की है, वहीं S-75 अभी भी कई सवालों से घिरा हुआ है। नवंबर 2025 में Su-57 की पहली एक्सपोर्ट डिलीवरी की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा वॉर टेस्टिंग भी लगातार बढ़ रही है।
लेकिन S-75 के सामने सबसे बड़ी चुनौती फंडिंग और ग्राहकों की है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित ग्राहक ज्यादा पैसे खर्च करके Su-57 खरीदना पसंद कर सकते हैं, क्योंकि उसकी रेंज, हथियार क्षमता और युद्ध प्रदर्शन बेहतर माना जाता है।
साबित हो सकता है गेम चेंजर, लेकिन...
इसके बावजूद S-75 को लेकर उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं। अगर रूस इस विमान को वास्तव में कम ऑपरेटिंग कॉस्ट और कम मेंटेनेंस वाले फाइटर के रूप में विकसित कर लेता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
कई छोटे और मीडियम डिफेंस बजट वाले देशों के लिए यह एक आकर्षक विकल्प बन सकता है, जिन्हें आधुनिक स्टील्थ फाइटर चाहिए लेकिन F-35 या Su-57 जैसी महंगी मशीनें नहीं खरीदनी हैं।
भारत, उत्तर कोरिया और कजाकिस्तान जैसे देशों पर नजर
डिफेंस के क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भविष्य में भारत, उत्तर कोरिया और कजाकिस्तान जैसे देश S-75 में रुचि दिखा सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी देश ने आधिकारिक ऑर्डर नहीं दिया है, लेकिन रूस की उम्मीदें मुख्य रूप से एक्सपोर्ट मार्केट पर टिकी हुई हैं।
बेलारूस के साथ मिलकर उत्पादन की भी तैयारी
मई 2025 में यह जानकारी सामने आई थी कि UAC ने बेलारूस के साथ S-75 के संभावित को-प्रोडक्शन पर बातचीत शुरू कर दी है। बेलारूस को लंबे समय से इस फाइटर का संभावित ग्राहक माना जाता रहा है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि बेलारूस का रक्षा बजट सीमित है और उसका एयरस्पेस भी बहुत बड़ा नहीं है।ऐसी स्थिति में कम लागत वाला S-75 उसके लिए एक व्यावहारिक विकल्प बन सकता है।
F-35 का जवाब बनने की कोशिश
बेलारूस और रूस दोनों के सामने एक और चुनौती है। नाटो देशों द्वारा लगातार F-35 जैसे फिफ्थ जनरेशन के लड़ाकू विमान पूर्वी यूरोप में तैनात किए जा रहे हैं। ऐसे में रूस और उसके सहयोगी देशों को लगता है कि उन्हें भी आधुनिक स्टील्थ फाइटर की जरूरत है जो इन विमानों का मुकाबला कर सके।
यही कारण है कि S-75 को केवल एक एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट नहीं बल्कि भविष्य की सुरक्षा जरूरतों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
रूस अभी भी अमेरिका और चीन से पीछे
हालांकि रूस ने फिफ्थ जेनरेशन फाइटर टेक्नोलॉजी में अच्छी खासी स्पीड हासिल की है, लेकिन कई डिफेंस एक्सपर्ट मानते हैं कि वह अभी भी अमेरिका और चीन से पीछे है। विशेषज्ञों के मुताबिक Su-57 और भविष्य का S-75, स्टील्थ तकनीक और एवियोनिक्स के मामले में चीन के J-20 या अमेरिका के F-35 के स्तर तक नहीं पहुंचे हैं। यही तकनीकी अंतर रूस के लिए आने वाले सालों में एक बड़ी चुनौती बना रह सकता है।
क्या 2030 के बाद ही मिलेगा नया रूसी फाइटर?
सबसे बड़ा सवाल अब समय को लेकर है। पहली उड़ान 2027 में होने की उम्मीद है। इसके बाद परीक्षण, उत्पादन और सैन्य मंजूरी की लंबी प्रक्रिया होगी। कई विश्लेषकों का मानना है कि S-75 शायद तब तक सेवा में नहीं आ पाएगा, जब तक चीन अपने छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को 2030 के शुरुआती दशक में तैनात करना शुरू नहीं कर देता। यानी जिसे सस्ता स्टील्थ फाइटर बताया जा रहा है उसे आसमान में देखने में अभी वक्त है।
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