जब Periyar की मूर्ति ने डाला था मायावती की सरकार को संकट में, जानें किस नेता ने दी थी उन्हें धमकी
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की चार बार की मुख्यमंत्री रहीं मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को एक गरीब परिवार में हुआ था। चार बार सीएम बनी मायावती को मुख्यमंत्री बनाने में दो बार बीजेपी का समर्थन भी प्राप्त हुआ।
मायावती जब तीसरी बार यूपी की सीएम बनी उनके उस कार्यकाल की कहानी काफी दिलचस्प है। 15 महीने की सरकार में बीएसपी और बीजेपी के बीच जमकर बवाल हुआ था। सरकार बनने के तीन महीने बाद ही राम मंदिर आंदोलन के एक बड़े नेता ने मायावती की सरकार गिराने की धमकी दे दी थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार मायावती ने अपने तीसरे कार्यकाल में सहयोगी बीजेपी की बातों को नजरअंदाज करते हुए लखनऊ के अंबेडकर पार्क में पेरियार की मूर्ति स्थापित करने का फैसला किया था। दक्षिण भारत के प्रमुख नास्तिक विचारक और नेता ई.वी.रामासामी नायकर पेरियार हिंदू-देवी देवताओं के प्रखर आलोचक थे और पेरियार को राम से विशेष नाराजगी थी।
यह भी देखें: Ram Mandir: जब पहली बार गूंजा 'मंदिर वहीं बनाएंगे' का नारा, जानें कैसे हुई 'राम नाम' की राजनीति में इंट्री
पेरियार का मानना था कि रामायण द्रविड़ों को आर्यों के जाल में फंसाने के लिए लिखा गया था। अगस्त 1956 में त्रिची के एक समुद्र तट पेरियार के अनुयायियों ने राम की तस्वीर जलाई थी। पेरियार ने रामायण के काउंटर में सच्ची रामायण नाम से एक किताब भी लिखी थी, जिसमें राम सहित कई चरित्रों को खलनायक के रूप में पेश किया गया है।
मायावती इन्हीं पेरियार की मूर्ति लखनऊ में लगवाना चाहती थीं। तब केंद्र में बीजेपी की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। मायावती की इस घोषणा के बाद राम मंदिर आंदोलन के नेता और तत्कालीन प्रदेश बीजेपी प्रमुख विनय कटियार ने राज्य सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर पेरियार की मूर्ति लखनऊ में स्थापित की गई तो ये उत्तर प्रदेश में मायावती के सरकार का अंत होगा।
यह भी देखें: VIDEO: पीएम मोदी ने नासिक के मंदिर में की सफाई, राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा से पहले लोगों से की ये खास अपील
कटियार के अल्टीमेटम के 24 घंटे के अंदर ही मायावती का बयान बदल गया। रेडिफ डॉट कॉम में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार मायावती ने कहा, "किसने कहा कि हमारी कभी लखनऊ में या यूपी में कहीं भी पेरियार की मूर्ति स्थापित करने की कोई योजना थी। पेरियार दक्षिण के थे, इसलिए अगर हमें उनकी मूर्ति स्थापित करनी है, तो हम वहां करेंगे ताकि हमें इसका कुछ लाभ मिल सके।"
इसी विरोध की वजह से मायावती अपने तीसरे कार्यकाल में पेरियार की मूर्ति नहीं लगा सकी। बावजूद इसके सरकार नहीं बची। साल 2007 में जब बीएसपी अपने बूते पर यूपी की सत्ता में आई और मायावती चौथी बार मुख्यमंत्री बनीं तो लखनऊ में पेरियार की मूर्ति लगी।
यह भी देखें: Dehradun news: यहां शहर की गलियों में चहलकदमी करता दिखा गुलदार, सीसीटीवी में कैद होने से मचा हड़कंप












Click it and Unblock the Notifications