'आत्मदाह' की कोशिश के बाद अमित शाह को खून से चिट्ठी, किन 4 मांगों पर अड़े विधायक रविंद्र सिंह भाटी?

Giral Lignite Mines Protest: राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस के बाहर पिछले डेढ़ महीने से चल रहा मजदूर आंदोलन अब प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। स्थानीय श्रमिकों और ड्राइवरों की मांगों को लेकर शुरू हुआ यह धरना अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां भावनाएं, राजनीति और प्रशासन तीनों आमने-सामने नजर आ रहे हैं। शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी (Ravindra Singh Bhati) पिछले करीब 20 दिनों से खुद धरना स्थल पर डटे हुए हैं, जिससे आंदोलन को नई पहचान मिली है।

हाल ही में जिला कलेक्ट्रेट पर उनके आत्मदाह के प्रयास ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया था। अब आंदोलनकारियों ने देश के गृह मंत्री Amit Shah को अपने खून से पत्र लिखकर इस लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की है। खास बात यह है कि अमित शाह 25 और 26 मई को राजस्थान दौरे पर बीकानेर आने वाले हैं, ऐसे में यह आंदोलन अचानक सुर्खियों के केंद्र में आ गया है।

MLA Ravindra Bhati

खून से लिखा गया पत्र

रविवार को धरना स्थल पर मौजूद मजदूरों ने सुइयों की मदद से अपने शरीर से खून निकाला और उसी खून से गृह मंत्री अमित शाह के नाम पत्र लिखा। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी आवाज स्थानीय स्तर पर दबाई जा रही है, इसलिए अब वे सीधे केंद्र सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं।

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धरने पर बैठे लोगों का मानना है कि प्रशासन और स्थानीय राजनीतिक स्तर पर उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया। ऐसे में अमित शाह के राजस्थान दौरे को उन्होंने अपनी बात देश के सबसे बड़े नेताओं तक पहुंचाने का मौका माना है।

क्या हैं मजदूरों की मुख्य मांगें?

धरने का नेतृत्व कर रहे विधायक रविंद्र सिंह भाटी और श्रमिक प्रतिनिधियों ने चार प्रमुख मांगों को लेकर मोर्चा खोला हुआ है।

स्थानीय मजदूरों की नौकरी वापस मिले

आंदोलनकारी आरोप लगा रहे हैं कि नए ठेकेदार के आने के बाद पुराने स्थानीय कर्मचारियों को धीरे-धीरे बाहर कर दिया गया और उनकी जगह बाहरी राज्यों के लोगों को रखा जाने लगा।

वहीं कंपनी का कहना है कि किसी को निकाला नहीं गया, बल्कि नया टेंडर आने के बाद कई कर्मचारी खुद काम छोड़कर धरने में शामिल हो गए।

8 घंटे की शिफ्ट लागू करने की मांग

मजदूरों का आरोप है कि उनसे तय समय से ज्यादा काम कराया जाता है और पूरा ओवरटाइम भी नहीं दिया जाता। उनका कहना है कि श्रम कानूनों की अनदेखी हो रही है।

दूसरी तरफ कंपनी का दावा है कि कर्मचारियों को नियमों के तहत काम दिया जा रहा है और वेतन उनकी स्किल के हिसाब से तय किया गया है।

स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता

आंदोलनकारियों का कहना है कि स्थानीय युवाओं को छोटी-छोटी तकनीकी वजहें बताकर बाहर किया जा रहा है। उनका आरोप है कि कम वेतन में बाहरी लोगों से काम कराने की कोशिश हो रही है।

कंपनी की ओर से कहा गया है कि बिना जरूरी लाइसेंस या नियम पूरे किए किसी को भारी वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

पुराने समझौते को लागू करने की मांग

धरना दे रहे प्रतिनिधियों का आरोप है कि प्रशासन की मौजूदगी में पहले समझौता हुआ था, लेकिन बाद में कंपनी पीछे हट गई। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य वीर सिंह थूबली ने कहा कि मजदूरों को दिए गए आश्वासन जमीन पर लागू नहीं हुए। कंपनी का कहना है कि वह नियमों के खिलाफ किसी नए दबाव में आकर समझौता नहीं करेगी।

रविंद्र सिंह भाटी का भावुक बयान

पूरे आंदोलन को लेकर भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया है। पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष स्वरूपसिंह खारा ने कहा कि बातचीत के कई प्रयास किए गए, लेकिन आंदोलनकारी पक्ष गंभीर नहीं दिखा। इन आरोपों पर विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह गरीब मजदूरों के सम्मान और हक की लड़ाई है, इसे राजनीति से जोड़ना गलत है।

भाटी ने कहा कि धरने में हर वर्ग और हर विचारधारा के लोग शामिल हैं। उनका आरोप है कि अगर सरकार समय रहते मजदूरों की बात सुन लेती तो लोगों को अपने खून से पत्र लिखने जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

कंपनी ने क्या कहा?

श्री मोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रतिनिधि मनोहर सिंह पाबड़ा ने कहा कि कंपनी मजदूरों की जायज मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन नियमों से बाहर की मांगें मानना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनकी योग्यता के हिसाब से वेतन दिया जा रहा है और आंदोलन के जरिए कंपनी पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

धरना लगातार लंबा खिंचने के बाद अब प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है और जल्द समाधान निकलने की उम्मीद है। हालांकि आंदोलनकारी पूछ रहे हैं कि शिव उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी अब तक क्या कर रही है। उनका कहना है कि धरातल पर अब तक कोई बड़ा समाधान नजर नहीं आया है।

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