Hormuz Tension: होर्मुज में एक और भारतीय नाविक की मौत, 5 दिनों के भीतर 4 की गई जान, मृतक निशांत उर्थनाथन कौन?
Nishant Urthnathan Death Duqm port Oman: ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े एक कमर्शियल जहाज पर सवार भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन की स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण मौत हो गई। इसके साथ ही पिछले 5 दिनों के भीतर खाड़ी क्षेत्र में जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है।
दरअसल, इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना और ईरान के बीच भारी तनाव चल रहा है। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है, जिसके चलते वहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी हमले हो रहे हैं। इन सैन्य हमलों और विपरीत परिस्थितियों के बीच भारतीय नाविक लगातार अपनी जान गंवा रहे हैं।

कौन थे निशांत उर्थनाथन और कैसे हुई मौत?
निशांत उर्थनाथन एक भारतीय नाविक थे, जो मोटर टैंकर (एमटी) सेलेस्टियल पर तैनात थे। शनिवार, 14 जून को मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने उनकी मौत की पुष्टि की। दूतावास के मुताबिक, निशांत की मौत किसी सैन्य हमले में नहीं, बल्कि अचानक उभरीं स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं (Health Complications) के कारण हुई है। उनका शव फिलहाल डुक्म बंदरगाह पर खड़े पोत पर ही है। भारतीय दूतावास लगातार जहाज प्रबंधन कंपनी के संपर्क में है ताकि औपचारिकताएं पूरी करके उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजा जा सके।
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पिता ने कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप
भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन के पिता ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, निशांत 10 महीने से जहाज पर था। कंपनी ने मौत की खबर देने के बाद फोन बंद कर लिया और 3 दिन बाद भी कोई मदद नहीं की। निशांत की हालत बिगड़ने पर हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू की मांग की गई थी, लेकिन कंपनी ने ध्यान नहीं दिया। यहाँ तक कि शव को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज भी नहीं दिया गया। पीड़ित परिवार ने शव वापस लाने और जांच की मांग की है। निशांत अपने पीछे दो छोटी बेटियां छोड़ गए हैं।
अमेरिकी हमलों में मारे गए 3 अन्य भारतीय नाविक
निशांत से अलग, बाकी 3 भारतीय नाविकों की मौत अमेरिकी सेना के सीधे हमलों के कारण हुई है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने के जवाब में अमेरिकी नौसेना वहां कड़ा पहरा दे रही है। इसी दौरान 10 जून को अमेरिका ने पलाऊ के ध्वज वाले तेल टैंकर 'सेटेबेलो' पर हमला किया था, जिसमें सवार 24 भारतीयों में से 3 नाविकों की मौत हो गई। इसके अलावा 8 जून को 'मैरीवेक्स' और 11 जून को 'जलवीर' नाम के जहाजों पर भी अमेरिकी हमले हुए, लेकिन वहां भारतीय क्रू सुरक्षित बच गया।
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कड़ा रुख और अमेरिकी जवाब
इस गंभीर मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात की और भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कमर्शियल जहाजों पर इस तरह के घातक और जानलेवा हमले किसी भी कीमत पर उचित नहीं ठहराए जा सकते। इसके जवाब में अमेरिकी विदेश विभाग ने साफ किया कि ईरानी तेल के अवैध परिवहन और अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिका के अनुसार, सभी जहाजों को उनकी सेना के आदेश मानने होंगे।
नई दिल्ली में अमेरिकी राजनयिक तलब, बढ़ा तनाव
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने कड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जेसन मीक्स को दो बार तलब किया जा चुका है। भारत ने अमेरिकी अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कह दिया है कि ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी सेना के ये जानलेवा हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। दुनिया का 20 प्रतिशत तेल-गैस व्यापार इसी रास्ते से होता है, जिससे वहां फंसे सैकड़ों भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।












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