DU Women Hostel Protest: ‘जबरन हॉस्टल खाली कराने' के खिलाफ छात्राओं का मिडनाइट प्रोटेस्ट, रातभर कैंपस में धरना
DU Women Hostel Protest: देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) के विमेंस हॉस्टल (UHW) में शुक्रवार 22 मई को करीब 2 बजे जारी सेमेस्टर परीक्षाओं के बीच एक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।
हॉस्टल प्रशासन के कथित तानाशाही रवैये से परेशान होकर सैकड़ों छात्राओं ने गुरुवार की रात करीब 9:30 बजे से लेकर आधी रात के बाद तक हॉस्टल के मुख्य गेट के बाहर सड़क पर बैठकर धरना दिया। इस प्रदर्शन को 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) का भी पूरा समर्थन मिला है।

"वार्डन बाहर आओ, बाहर आकर बात करो!"
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) की रिपोर्ट के अनुसार, रात के सन्नाटे में पूरा कैंपस छात्राओं के नारों से गूंज उठा। छात्राएं हॉस्टल के गेट पर बैठकर लगातार नारे लगा रही थीं: "हॉस्टल वार्डन बाहर आओ, बाहर आओ, बाहर आओ! बाहर आकर बात करो, बात करो, बात करो!" छात्राओं का गुस्सा इस बात को लेकर था कि एक तरफ उनकी महत्वपूर्ण सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं, और दूसरी तरफ प्रशासन उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है।
छात्राओं को 'दीवार से लगाने' के लगे आरोप: ये हैं 4 मुख्य शिकायतें
छात्र संगठन AISA ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान जारी कर हॉस्टल प्रशासन और प्रोवोस्ट (Provost) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। आइसा का कहना है कि पिछले एक हफ्ते से छात्राओं को प्रशासनिक कार्रवाइयों के जरिए बिल्कुल किनारे (पूंछ) पर धकेल दिया गया है।
छात्राओं ने प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
मूलभूत सुविधाओं की तालाबंदी: हॉस्टल के दो प्रमुख ब्लॉकों में पानी की सप्लाई (Water Supply) को जानबूझकर बंद कर दिया गया, जिससे इस भीषण गर्मी में छात्राएं बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गईं।
रीडिंग रूम से कुर्सियां हटाना: परीक्षाओं के इस महत्वपूर्ण समय में, जब छात्राओं को रात-रात भर पढ़ना होता है, हॉस्टल के कॉमन रीडिंग रूम से कुर्सियां हटा दी गईं ताकि वे वहां बैठकर पढ़ न सकें।
एडवांस फीस के बाद भी बेदखली: छात्राओं का दावा है कि उन्होंने जून और जुलाई महीने की हॉस्टल फीस पहले ही एडवांस में जमा कर दी है। इसके बावजूद प्रोवोस्ट द्वारा उन्हें जबरन कमरा खाली करने (Forced Eviction Drive) की धमकियां दी जा रही हैं।
प्रतिदिन ₹450 की अवैध वसूली: इससे पहले 16 मई को हुए विरोध के बाद प्रोवोस्ट ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया था कि सुविधाएं बहाल की जाएंगी और हॉस्टल में रुकने की समय-सीमा बढ़ाई जाएगी। लेकिन बाद में प्रशासन अपने वादे से मुकर गया और हॉस्टल में रुकने वाली छात्राओं पर ₹450 प्रति दिन का दंडात्मक जुर्माना (Penalties) ठोक दिया, जिसे छात्राएं 'उगाही' और 'अवैध वसूली' बता रही हैं।
DU विमेंस हॉस्टल विवाद क्या हैं छात्राओं की मुख्य मांगें?
प्रोवोस्ट का तत्काल इस्तीफा: अमानवीय व्यवहार और तानाशाही रवैये के कारण हॉस्टल प्रोवोस्ट से तुरंत पद छोड़ने की मांग की गई है। हॉस्टल के सभी ब्लॉकों में चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के पानी की सप्लाई बहाल करने की लिखित गारंटी मांगी गई है। सेमेस्टर परीक्षाओं और एडवांस फीस को ध्यान में रखते हुए बिना किसी वित्तीय जुर्माने (Financial Penalties) के हॉस्टल में रुकने की अवधि को बिना शर्त बढ़ाया जाए। परीक्षाओं की तैयारी के लिए रीडिंग रूम की कुर्सियों और अन्य सुविधाओं को तुरंत वापस व्यवस्थित किया जाए।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे और छात्राओं के गंभीर आरोपों के बाद भी दिल्ली विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारियों और UHW प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। परीक्षाओं के बीच आधी रात को देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले यूनिवर्सिटी कैंपस की सड़कों पर छात्राओं का इस तरह बैठना डीयू की सुरक्षा और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़ा दाग लगाता है।














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