राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, कब होगी वोटिंग? HC ने दी डेडलाइन
Rajasthan Panchayat Chunav: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गर्म हो गया है। लंबे समय से टल रहे चुनाव अब जल्द होने की संभावना के चलते गांवों से लेकर शहरों तक हलचल तेज हो गई है। राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेजी से शुरू कर दी गई हैं। अदालत ने साफ कर दिया है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का बहाना बनाकर चुनाव को और आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
इसके बाद जयपुर ग्रामीण क्षेत्र की पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवार सक्रिय हो गए हैं। गांव-ढाणियों में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और राजनीतिक माहौल धीरे-धीरे चुनावी रंग में रंगता नजर आ रहा है।

31 जुलाई से पहले चुनाव कराने की तैयारी
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शहरी निकायों के वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम 20 जून 2026 तक पूरा किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि तय समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। अब 31 जुलाई 2026 से पहले चुनाव कराने को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
इससे पहले अदालत ने 15 अप्रैल तक चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने का हवाला देकर असमर्थता जताई थी। अब कोर्ट के सख्त रुख के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर तेजी दिखाई देने लगी है।
गांवों में फिर लौटने लगी चुनावी हलचल
चुनाव की संभावनाओं के बीच ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य बनने की तैयारी कर रहे लोग अब गांवों में जनसंपर्क कर रहे हैं। कई जगह छोटी बैठकों और सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों से संपर्क बढ़ाया जा रहा है।
लंबे समय से चुनाव टलने के कारण गांवों में राजनीतिक माहौल ठंडा पड़ गया था, लेकिन अब संभावित प्रत्याशी फिर सक्रिय हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज हो चुकी हैं।
हजारों पदों पर होगा चुनाव
जयपुर जिले में जिला परिषद के 7 वार्ड हैं। इसके अलावा जिले की 22 पंचायत समितियों में 386 पंचायत समिति सदस्य वार्ड शामिल हैं। इनके अंतर्गत 596 ग्राम पंचायतें आती हैं। इन पंचायतों में हजारों वार्ड पंचों के पदों पर भी चुनाव होना है।
इतने बड़े स्तर पर चुनाव होने के कारण पूरे जिले में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार स्थानीय मुद्दे चुनाव में सबसे अहम रह सकते हैं।
सड़क, पानी और रोजगार बनेंगे बड़े मुद्दे
गांवों में अब सड़क, पेयजल, बिजली, रोजगार और विकास कार्य जैसे मुद्दों पर चर्चा शुरू हो गई है। संभावित उम्मीदवार भी अपनी रणनीति इन्हीं मुद्दों के आसपास तैयार कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार युवाओं की भागीदारी बढ़ सकती है। कई युवा चेहरे भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।
निकाय चुनावों को लेकर भी बढ़ी उम्मीद
ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी निकायों में भी चुनाव को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। बस्सी नगरपालिका का गठन करीब पांच साल पहले हुआ था, लेकिन अब तक यहां चुनाव नहीं हो सके हैं। इसी तरह जमवारामगढ़ और कानोता में भी निकाय चुनाव लंबे समय से लंबित हैं।
हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद इन इलाकों में भी चुनाव होने की संभावना मजबूत मानी जा रही है। स्थानीय लोगों और संभावित उम्मीदवारों में इसे लेकर उत्साह बढ़ता नजर आ रहा है।













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