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मलेशिया में लगेगी मृत्युदंड पर सीमित रोक

Provided by Deutsche Welle

कुआलालंपुर, 10 जून। मलेशिया में मृत्युदंड को हटाने की मांग करने वालों ने सरकार की इस घोषणा का स्वागत किया लेकिन साथ ही चेताया कि इससे पहले भी ऐसी घोषणाएं हो चुकी हैं लेकिन उन्हें लागू नहीं किया गया. मलेशिया में हत्या और ड्रग्स की तस्करी समेत कई अपराधों के लिए आज भी मृत्युदंड एक अनिवार्य सजा है.

2018 में एक सुधारवादी गठबंधन सरकार ने घोषणा की थी वो मृत्युदंड को पूरी तरह से खत्म कर देगी लेकिन उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदियों और मारे गए लोगों के परिवार के विरोध के बाद योजना को रोक दिया गया. तब से मूल योजना को हल्का कर यह प्रस्ताव दिया गया था कि मृत्युदंड को सिर्फ उन मामलों से हटा दिया जाएगा जिनमें वो अनिवार्य है.

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जज के विवेक पर मृत्युदंड

कानून मंत्री वान तुआंकू जाफर ने शुक्रवार 10 जून को बताया कि मंत्रिमंडल ने अनिवार्य मृत्युदंड को खत्म कर देने का फैसला किया है. उन्होंने यह भी कहा कि उसकी जगह किस तरह की सजा को लाया जा सकता है उसके लिए और अध्ययन किया जाएगा.

कुआला लुंपुर में सिंगापुर के दूतावास के बाहर मृत्युदंड के खिलाफ प्रदर्शन

उन्होंने आगे कहा, "इस मामले पर लिए गए फैसले ने सबके अधिकारों को संरक्षित करने और गारंटित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाया है." मलेशिया में अनिवार्य मृत्युदंड वाले अपराधों के अलावा, कई ऐसे अपराध भी हैं जिनका दोषी पाए जाने पर जज अपने विवेक पर मृत्युदंड की सजा सुना सकता है.

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इस व्यवस्था को बदलने के लिए संसद को नया कानून पारित करना पड़ेगा और वान जुनैदी ने एएफपी समाचार एजेंसी को बताया कि इसमें "थोड़ा समय लगेगा." उन्होंने इसके लिए कोई समय सीमा नहीं दी. उन्होंने यह भी कहा कि प्रक्रिया "उतनी भी सरल नहीं है जितनी लोग कल्पना कर रहे होंगे."

ठोस कदम की जरूरत

अधिकार समूहों ने भी घोषणा का स्वागत करते हुए चिंता जताई. ह्यूमन राइट्स वॉच के एशिया निदेशक फिल रॉबर्टसन ने एफपी को बताया, "यह आगे बढ़ने की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम है...लेकिन इससे पहले कि सब लोग इसका जश्न मनाने लगें, हम मलेशिया को इसे हकीकत में बदलने के लये सक्रिय कानूनी संशोधन करते देखना चाहेंगे."

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उन्होंने बताया कि देश में एक के बाद एक सरकारों ने "मानवाधिकारों के मोर्चे पर काफी वादे किए लेकिन अंत में काम बहुत कम किया." विपक्ष के सांसद रामकृपाल सिंह ने संकेत दिया कि वो कदम के समर्थन में हैं. जब पहली बार किसी सरकार ने मृत्युदंड को खत्म करने का प्रस्ताव दिया था, तब सिंह की ही पार्टी सत्ता में थी. उन्होंने कहा, "हमने हमेशा अनिवार्य मृत्युदंड को खत्म करने की वकालत की है."

सीके/एए (एएफपी)

Source: DW

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