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अनुच्छेद 370 फैसले पर हताश क्यों हैं नेता?

बेंगलुरू। राज्य सभा ने सोमवार को जम्‍मू कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 को खत्‍म करते हुए जम्‍मू कश्‍मीर पुर्नगठन विधेयक पारित हो गया। उच्‍च सदन में 125 वोट इसके पक्ष में थे और 61 इसके विरोध में पड़े। इसके बाद पूरे देश में जहां जश्‍न का माहौल है वहीं केन्‍द्र सरकार की यह उपलब्धि दक्षिण भारत की कुछ राजनीतिक पार्टियों के गले नही उतर रही। सीधे तौर पर कहें तो वह 370 को हटाये जाने से वह बखौलाए और हताश से नजर आ रहे हैं।

reaction on article 370

अब यह सवाल उठता है कि आखिर इन नेताओं के बौखलाने की वजह क्‍या है? कहीं इस विरोध का कारण भाषा प्रेम और मुस्लिम वोट बैंक तो नहीं? विरोध में खडेे़े़ ज्‍यादातर नेता दक्षिण भारतीय राज्‍यों से हैं। ऐसा माना जा रहा है कि केन्‍द्र में बैठी मजबूत मोदी सरकार भविष्‍य में जबरन उन पर कोई मनमाना कानून न थोप दे? वहीं तमिलनाडु और केरल की वामपंथी एवं अन्‍य राजनीतिक पार्टियां इसका विरोध करके अपने मुस्लिम वोटरों का वोट साधना चाहती हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञ के अनुसार दक्षिण भारत के कुछ राज्‍यों, जिन्‍होंने कभी बंटवारे का दर्द झेला नही हैं, इसलिए वहां के अधिकांश लोग इस फैसले का विरोध कर स्‍वार्थ की राजनीति कर रहे हैं। उनका यह भी मानना है कि विरोधी पार्टिंयां ऐसे मामलों पर विरोध करके भाजपा का दक्षिण भारत की राजनीति में पैर जमाने के प्रयास को तहस-नहस करना चाहती हैं।

स्‍टालिन ने कहा "लोकतंत्र की हत्या"

इसी बौखलाहट में डीएमके अध्यक्ष एम के स्टालिन ने इस फैसले को "लोकतंत्र की हत्या" कह दिया। स्टालिन ने कहा, "इस कदम को बुनियादी मुद्दों से लोगों के ध्यान हटाने एक प्रयास है और यह चिंता का विषय है।" उन्‍होंने कहा कि केंद्र ने जम्मू-कश्मीर के लोगों की सहमति प्राप्त किए बिना अपने प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। उनकी पार्टी ने धारा 370 को खत्म करने के किसी भी कदम का लगातार विरोध किया है और सरकार चाहती है कि वह जल्दबाजी में कदम उठाए। वहीं एमडीएमके संस्थापक वाइको ने कहा कि आज दु:ख का दिन है क्योंकि हमने अपना वादा नहीं निभाया है।

कांग्रेस पार्टी ने इसे "भयावह कदम" करार देते हुए, भाजपा पर "वोटों के लिए" निर्णय लेने का आरोप लगाया और कहा कि यह भारत के संवैधानिक इतिहास में एक "काला दिन" है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने सोमवार को आरोप लगाया कि भारत के मुकुट के रूप में माने जाने वाले कश्मीर के प्रमुख के सिर को काट दिया गया है और उसकी पहचान हटा दी गई। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, "हम (कांग्रेस) कश्मीर जीत गए और आप कश्मीर हार गए।"

वाम नेताओं ने भी अपना विरोध जताया। हालांकि सीपीआई महासचिव डी राजा ने कहा कि "प्रतिगामी कदम जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों को अलग कर देगा", सीपीआई (एम) ने इसे संविधान पर "हमला" कहा। विपक्षी दलों के कोरस में शामिल होते हुए, तृणमूल के राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, "तृणमूल आज की संवैधानिक अनैतिकता और आज की प्रक्रियात्मक प्रक्रिया के खिलाफ है।"जब गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में बोल रहे थे तो टीएमसी सांसद भी बाहर चले गए।

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