Petrol Diesel Crisis: पेट्रोल-LPG की कमी से 27 देशों की अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर, वर्ल्ड बैंक से मांगी मदद
Petrol Diesel Crisis: World Bank की एक रिपोर्ट ने दुनिया की बढ़ती आर्थिक चिंता को सामने ला दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद 27 देशों ने इमरजेंसी आर्थिक मदद के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इन देशों ने ऐसे सिस्टम एक्टिव करने की प्रक्रिया शुरू की है, जिससे जरूरत पड़ने पर वे जल्दी से वर्ल्ड बैंक से फंड ले सकें।
तेल-गैस की बढ़ती कीमतें, सप्लाई चेन में दिक्कत और खाद संकट की वजह से कई देशों की अर्थव्यवस्था दबाव में आ गई है। खासकर गरीब और विकासशील देशों पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे रहा है। अब दुनिया की नजर वर्ल्ड बैंक और IMF की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।

ईरान युद्ध के बाद क्यों बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ने के बाद दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है। इसका असर सीधे उन देशों पर पड़ा है जो ऊर्जा आयात पर ज्यादा निर्भर हैं। कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है, जबकि कुछ जगह बिजली और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी तेजी से बढ़ा है। इसके अलावा खाद और जरूरी सामान की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे तो कई कमजोर अर्थव्यवस्थाएं गंभीर संकट में फंस सकती हैं।
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27 देशों ने शुरू की फंड प्रक्रिया
World Bank की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 देशों ने इमरजेंसी फंड लेने के लिए जरूरी प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि किन देशों ने आवेदन किया है और कितनी रकम मांगी गई है, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि तीन देशों को नए क्राइसिस सपोर्ट सिस्टम की मंजूरी भी मिल चुकी है। बाकी देश अभी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। इसका मकसद संकट की स्थिति में तुरंत आर्थिक मदद हासिल करना है ताकि जरूरी खर्च जारी रह सके।
केन्या और इराक ने मदद की पुष्टि की
Kenya और Iraq ने पुष्टि की है कि उन्होंने वर्ल्ड बैंक से जल्दी आर्थिक मदद मांगी है। केन्या में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि इराक को तेल से होने वाली कमाई घटने का झटका लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये देश उस रैपिड रिस्पॉन्स योजना का हिस्सा हैं जिसके तहत पहले से मंजूर लेकिन इस्तेमाल न किए गए फंड का 10 प्रतिशत तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है।
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वर्ल्ड बैंक कितनी मदद दे सकता है
Ajay Banga ने हाल ही में कहा था कि जरूरत पड़ने पर वर्ल्ड बैंक 20 से 25 अरब डॉलर तक की तत्काल मदद दे सकता है। उन्होंने बताया कि पुराने प्रोजेक्ट्स के बचे हुए फंड और दूसरी योजनाओं को जोड़कर अगले छह महीनों में यह सहायता 60 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। आगे चलकर यह रकम 100 अरब डॉलर तक भी जा सकती है। इससे साफ है कि वैश्विक आर्थिक दबाव को देखते हुए बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है।
IMF से क्यों बच रहे हैं कई देश
International Monetary Fund की प्रमुख Kristalina Georgieva ने कहा है कि करीब 12 देश IMF से भी मदद मांग सकते हैं। लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि देश IMF की बजाय वर्ल्ड बैंक को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। वजह यह है कि IMF आमतौर पर खर्च कम करने और सख्त आर्थिक शर्तें लागू करने को कहता है। इससे पहले से परेशान देशों में सामाजिक और आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।












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