Iran vs America: पेट्रोल-डीजल फिर होगा महंगा? होर्मुज पर देना होगा टोल, क्या है ईरान का प्लान?
Iran Oman Hormuz Strait Toll: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा संकेत दिया है। ईरान और ओमान इस अहम समुद्री रास्ते पर स्थायी टोल सिस्टम बनाने पर चर्चा कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई महंगी पड़ सकती है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और एलएनजी गुजरता है।
ईरान का कहना है कि सुरक्षा और समुद्री ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए खर्च होता है, इसलिए जहाजों को फीस देनी होगी। अमेरिका और खाड़ी देशों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। सवाल है कि क्या इससे पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें फिर बढ़ेंगी?

Iran Oman Shipping Control: क्या है ईरान-ओमान का नया प्लान
Iran और Oman होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर नया ढांचा तैयार करने पर बात कर रहे हैं। ईरान चाहता है कि इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से तय फीस ली जाए। उसका तर्क है कि सुरक्षा, निगरानी और समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल पर भारी खर्च आता है। फ्रांस में ईरानी राजदूत मोहम्मद अमीन नेजाद ने भी कहा कि जो देश और कंपनियां इस रास्ते का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें इसका हिस्सा चुकाना चाहिए। हालांकि ओमान ने अभी तक इस पर खुलकर कुछ नहीं कहा है।
Iran vs America: दुनिया के लिए इतना अहम क्यों है होर्मुज
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री रूट्स में गिना जाता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला तेल और एलएनजी इसी रास्ते से एशिया और यूरोप तक पहुंचता है। दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल कारोबार का रास्ता यही है। यही वजह है कि यहां किसी भी तनाव का असर सीधे ग्लोबल मार्केट पर पड़ता है। अगर यहां टोल लगता है या जहाजों की आवाजाही धीमी होती है, तो तेल कंपनियों का खर्च बढ़ेगा और उसका असर आम लोगों तक पहुंचेगा।
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अमेरिका-इजरायल हमले के बाद बदला माहौल
United States और Israel के साथ बढ़े तनाव के बाद ईरान ने होर्मुज में अपनी पकड़ और मजबूत करनी शुरू कर दी है। फरवरी में हुए हमलों के बाद ईरान ने कई जहाजों की आवाजाही रोक दी थी। अब तेहरान इसे अस्थायी कदम नहीं बल्कि स्थायी रणनीति बनाना चाहता है। ईरान का कहना है कि उसकी सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी वजह से वह समुद्री रास्ते पर औपचारिक नियंत्रण और फीस सिस्टम लागू करने की तैयारी में है।
तेल-गैस की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा
अगर होर्मुज स्ट्रेट में स्थायी टोल सिस्टम लागू होता है तो सबसे बड़ा असर तेल और गैस की कीमतों पर दिख सकता है। जहाज कंपनियों को अतिरिक्त फीस देनी पड़ेगी, जिससे ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं, वहां पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस महंगी हो सकती है। एक्सपर्ट मानते हैं कि सिर्फ तनाव की खबर से ही बाजार में कीमतें ऊपर जाने लगती हैं।
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ईरान का सख्त संदेश और बढ़ी चिंता
ईरान साफ कर चुका है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका रुख नहीं बदलेगा। ईरानी संसद में भी इससे जुड़ा प्रस्ताव पास किया जा चुका है। तेहरान का कहना है कि इस इलाके की सुरक्षा उसके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। दूसरी तरफ खाड़ी देश और पश्चिमी ताकतें इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खतरा मान रही हैं। अगर आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनी तो मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है। इसका असर सिर्फ राजनीति नहीं बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखेगा।












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