क्यों झूठे होते हैं 'घड़ियाली आंसू'? जानिए किसलिए कही गई ये कहावत
नई दिल्ली, 19 जुलाई। दुख हो या फिर किसी तरह की पीड़ा आंख में आंसू आ ही जा जाते हैं। ये तो सामान्य बात है लेकिन अगर कोई आंसू बहाने के लिए मजबूर हो तो उसके रोने या फिर इमोशन के बारे पता लगा पाना मुश्किल हो जाता है। लगभग एक जैसे दिखने वाले दो जीवों के आंसू कुछ इस कदर मशहूर हुए कि वो एक कहावत बन गए। 'घड़ियानी आंसू बहाना' ये वही कहावत है जिसे लोग बहाने बनाना या फिर सच को छिपाने के लिए भावुक होने पर किसी व्यक्ति को कहते हैं।

12वीं शताब्दी के आसपास कही गई कहावत
'मगरमच्छ के आँसू' एक पुरानी कहावत है। जिसे वैज्ञानिकों ने गलत साबित कर दिया है। ऐसा माना जाता है कि मिथक 12वीं शताब्दी के आसपास प्रचलित हुआ। हालांकि रिसर्च में ये सामने आ चुका है कि इन जीवों में किसी भावना के कारण आंसू नहीं निकलते। शायद ये लोगों को पहले से पता था कि उनके आंसू सच में किसी दुख की वजह से नहीं होते ये उनके लिए सामान्य है।

क्यों फेमस हुई कहावत?
मगरमच्छों के बारे में एक मिथक है कि ये बहुत चालाक प्राणी होते हैं। इनके बारे में कहानी कही गई कि ये अक्सर अपने शिकार को धोखा देने या फिर अपने किए का पछतावा दिखाने के लिए आंखों में आंसू दिखाते हैं। इसलिए इसे कहावत का नाम दिया गया।

घड़ियाली आंसुओं पर रिसर्च
साइंटिस्ट्स ने घड़ियाल और मगमच्छ के आंसुओं को लेकर रिसर्च किया। जिसमें ये तथ्य सामने आए कि सभी जीवों की आंसुओं से एक जैसे केमिकल निकलते हैं। जो टियर डक्ट के साथ बाहर निकलते हैं। जीवों की आंख से आंसू एक विशेष ग्लैंड के जरिए बाहर आते हैं। आंसुओं में मिनरल्स और प्रोटीन होते हैं। इसीलिए ये कहा जाता है कि ज्यादा रोने कमजोरी आती है।

घड़ियाल की आंसू का सच
साल 2006 में न्यूरोलॉजिस्ट डी मैल्कम शैनर और जूलॉजिस्ट केंट ए व्लिएट (D Malcolm Shaner and Kent A Vliet) ने अमेरिकन घड़ियालों पर रिसर्च की थी। रिसर्च के दौरान घड़ियालों को पानी से बाहर निकाला गया और उन्हें खाना दिया गया। जब वे खाना खा रहे थे तो उनकी आंखों से लगातार आंसू निकल रहे थे। जब इस पर अध्ययन किया गया तो पता चला कि मगरमच्छ खाते वक्त आंसू बहाते हैं। ये किसी भावना की वजह से नहीं होता।

कई जीवों में भावनाओं से आते हैं आंसू
मगरमच्छ और घड़ियाल को छोड़कर अधिकतर आंख वाले जीव ऐसे हैं जिन्हें कष्ट या फिर दुख में आंसू आते हैं। ये आंसू सच भी होते हैं। लेकिन घड़ियाल या फिर मगरमच्छों की आंसू पर यकीन नहीं किया जा सकता।












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