अमेरिकी दूतावास के ऊपर दिखा हथियारबंद ड्रोन, सुरक्षाबलों ने मार गिराया
वाशिंगटन, 06 जुलाई। इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी सेना ने सोमवार रात बगदाद में अपने दूतावास के ऊपर एक सशस्त्र ड्रोन को मार गिराया है. अमेरिकी सेना ने यह कार्रवाई देश के पश्चिम में अपने बेस हाउसिंग पर हुए रॉकेट हमले के कुछ घंटे बाद की.

एएफपी के पत्रकार के मुताबिक अमेरिकी रक्षा प्रणालियों ने बगदाद में हवा में रॉकेट दागे. इराकी सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि लगातार फायरिंग के बाद विस्फोटकों से लदे एक ड्रोन को मार गिराया गया है.
इस साल की शुरुआत के बाद से देश में 47 अमेरिकी हितों को लक्षित किया जा चुका है. इराक में 2,500 अमेरिकी सैनिक जिहादी इस्लामिक स्टेट समूह से लड़ने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के हिस्से के रूप में तैनात हैं.
47 हमलों में से छह इस प्रकार के ड्रोन हमले शामिल थे. ड्रोन द्वारा हमले गठबंधन के लिए नया सिरदर्द बन गया है क्योंकि यह हवाई सुरक्षा प्रणाली को चकमा दे सकता है.
सेना पर हमले के लिए ड्रोन बना हथियार
अप्रैल में विस्फोटकों से भरे एक ड्रोन ने इराकी कुर्द क्षेत्रीय राजधानी इरबिल में गठबंधन सेना के हवाई अड्डे के सैन्य हिस्से पर हमला किया था. इसके बाद मई के महीने में विस्फोटकों से लदा एक ड्रोन हमला आइन-अल-असद हवाई अड्डे पर हुआ था, यह अमेरिकी सैनिकों के लिए एयर बेस है.
9 जून को विस्फोटकों से लदे तीन ड्रोन से बगदाद हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया, जहां अमेरिकी सैनिक भी तैनात हैं. एक ड्रोन को इराकी सेना ने मार गिराया था.
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चुनौती बने ड्रोन हमले
ड्रोन हमलों से चिंतित अमेरिका ने हाल ही में इराक स्थित अपने ठिकानों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमलों के बारे में सूचना देने वालों के लिए 30 लाख डॉलर तक का इनाम देने की पेशकश की है.
अंतरराष्ट्रीय जिहादी विरोधी गठबंधन ने कहा कि सोमवार को तीन रॉकेटों ने पश्चिमी रेगिस्तान में एक इराकी हवाई अड्डे को निशाना बनाया, जिसमें अमेरिकी सैनिक भी मौजूद थे.

भारत में ड्रोन को लेकर बढ़ी चिंता
27 जून को जम्मू के एयर फोर्स स्टेशन पर ड्रोन हमला हुआ था. ये देश में पहला ड्रोन हमला था. रिपोर्टों के मुताबिक हमले में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक आरडीएक्स था, जिसे सैन्य विस्फोटक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.
इस हमले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है. हमले के बाद फोरेंसिक एनालिसिस ने सुझाव दिया है कि हमले में इस्तेमाल किया विस्फोटक आरडीएक्स था. मीडिया में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि एयर फोर्स स्टेशन में जीपीएस युक्त ड्रोन संभवतया चीन में बना था.
जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेश्क दिलबाग सिंह ने आशंका जताई है कि ड्रोन हमले के पीछे पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का हाथ है.
हमले के बाद श्रीनगर-कठुआ और जम्मू जिले में ड्रोन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. बाकी जिले भी इस पर जल्द ही फैसला ले सकते हैं. श्रीनगर पुलिस ने कहा है कि जिनके पास भी ड्रोन हैं वे तत्काल उसे पुलिस स्टेशन में जमा करा दें. श्रीनगर पुलिस ने ड्रोन रखने, बेचने और इस्तेमाल करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.
आमिर अंसारी (एएफपी)
Source: DW












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