UAE Drone Attack: अबू धाबी के परमाणु प्लांट पर ड्रोन अटैक, बाल-बाल बचा अरब देश, किसने रची बड़ी साजिश?
UAE Nuclear Plant Drone Attack: संयुक्त अरब अमीरात के 'बराकह न्यूक्लियर पावर प्लांट' पर एक ड्रोन हमला हुआ है, जिससे वहां आग लग गई। गनीमत यह रही कि इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ और न्यूक्लियर सेफ्टी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका-इरान और इजरायल के बीच तनाव बहुत बढ़ा हुआ है।
प्रशासन के मुताबिक, आग बाहरी सुरक्षा घेरे में मौजूद एक जनरेटर में लगी थी और प्लांट के सभी हिस्से सुरक्षित रूप से काम कर रहे हैं।

Barakah Nuclear Power Plant strike: प्लांट पर हमला और नुकसान
अबू धाबी के इस परमाणु प्लांट पर पहली बार ऐसा हमला हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन हमले के बाद बाहरी सुरक्षा दीवार के पास रखे एक जनरेटर में आग लग गई थी। अच्छी बात यह है कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ। न्यूक्लियर प्लांट के सुरक्षा सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित हैं और रेडिएशन फैलने का कोई खतरा नहीं है। प्लांट सामान्य रूप से काम कर रहा है।
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तनाव का माहौल और आरोप
इस हमले के लिए जिम्मेदार कौन है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, इस इलाके में चल रहे अमेरिका-इरान युद्ध के बीच यूएई पर पहले भी कई मिसाइल और ड्रोन हमले हो चुके हैं। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे हमलों के पीछे इरान का हाथ हो सकता है, जो अक्सर ऊर्जा और समुद्री रास्तों को निशाना बनाता आया है।
नया तेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट
इस हमले के बीच यूएई एक नए तेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस ने सरकारी तेल कंपनी ADNOC को इस काम को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इस नई पाइपलाइन की मदद से यूएई 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' रास्ते पर निर्भर रहे बिना फुजैराह के जरिए अपना तेल निर्यात दोगुना कर सकेगा। यह प्रोजेक्ट अगले साल शुरू होगा।
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बराकह न्यूक्लियर प्लांट का इतिहास
यह न्यूक्लियर पावर प्लांट अबू धाबी के रेतीले इलाके में सऊदी अरब की सीमा के पास स्थित है। इसे यूएई ने दक्षिण कोरिया की मदद से करीब 20 बिलियन डॉलर की लागत से बनाया था और यह साल 2020 में शुरू हुआ था। पूरे अरब क्षेत्र में यह पहला और एकमात्र चालू परमाणु ऊर्जा संयंत्र है, जो देश की बिजली जरूरतों को पूरा करता है।
अमेरिका-इरान युद्ध और तेल संकट
अमेरिका और इरान के बीच बातचीत रुकी हुई है, जिसके कारण तनाव चरम पर है। इरान ने 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' के समुद्री रास्ते को बंद कर दिया है, जहां से दुनिया का 20% तेल और गैस गुजरता था। इस रास्ते के बंद होने से दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा तेल संकट पैदा हो गया है और इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।












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