West Asia Crisis: पाकिस्तान फेल, अब रूस-ईरान को भारत से उम्मीद, ईरानी राष्ट्रपति ने दिया बड़ा सिग्नल
West Asia Crisis: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच अब दुनिया की नजर भारत पर टिकती दिखाई दे रही है। पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता कोई ठोस नतीजा नहीं निकाल पाई, जिसके बाद अब खुद ईरान और रूस ने भारत से मध्यस्थता करने की अपील की है। यह घटनाक्रम सिर्फ कूटनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि इस बात का संकेत भी माना जा रहा है कि पाकिस्तान से शांति की उम्मीद करना बेकार है जबकि भारत इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मजूबत भूमिका में है।
ईरान ने भारत को बताया क्रिएटिव पावर
Abbas Araghchi ने 15 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स कॉन्क्लेव के दौरान साफ कहा कि वेस्ट एशिया संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है और बातचीत ही इसका रास्ता है। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए बड़ी भूमिका निभा सकता है। अराघची ने कहा, "भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का हम स्वागत करेंगे।"

यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच भरोसे का संकट लगातार गहराता जा रहा है। अराघची ने साफ कहा कि ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा न करने के सभी कारण हैं।
होर्मुज संकट के बीच भारत पर भरोसा
ईरानी विदेश मंत्री ने Strait of Hormuz को बेहद कठिन क्षेत्र बताते हुए वहां जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में मदद की पेशकश भी की। यह बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा संभालता है। भारत जैसे बड़े तेल इम्पोर्ट करने वाले देश के लिए इस क्षेत्र में स्थिरता बेहद जरूरी है।
रूस ने भी जताया भारत पर भरोसा
सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि Sergey Lavrov ने भी भारत को वेस्ट एशिया में लंबे समय के लिए शांति मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है। नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद लावरोव ने कहा कि भारत के पास बड़ा कूटनीतिक अनुभव और अंतरराष्ट्रीय कद है, जो उसे इस भूमिका के लिए सबसे परफेक्ट बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका और ईरान किसी स्थायी मध्यस्थ की तलाश कर रहे हैं, तो भारत यह जिम्मेदारी निभा सकता है।
पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल
हालांकि पाकिस्तान, तुर्की और ओमान ने अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल संवाद शुरू कराने की कोशिश की थी, लेकिन इस्लामाबाद वार्ता किसी बड़े समाधान तक नहीं पहुंच सकी। 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई बातचीत में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरानी संसदीय अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf शामिल हुए थे, लेकिन इसके बावजूद तनाव कम नहीं हुआ। यही वजह है कि अब रूस और ईरान जैसे बड़े देश भारत की ओर देख रहे हैं।
भारत को क्यों मिल रहा भरोसा?भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी संतुलित विदेश नीति मानी जा रही है। एक तरफ भारत अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी रखता है, तो दूसरी तरफ रूस और ईरान के साथ भी मजबूत रिश्ते बनाए हुए है। इसी वजह से भारत को ऐसे देश के तौर पर देखा जा रहा है जो किसी एक पक्ष का एजेंडा नहीं चलाता, बल्कि स्थिरता और संवाद पर जोर देता है।
लावरोव ने भारत को दिया खास सुझाव
रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने यह भी सुझाव दिया कि भारत, ब्रिक्स अध्यक्ष होने के नाते, ईरान और UAE को बातचीत के लिए एक मंच पर ला सकता है। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र से बड़े स्तर पर तेल आयात करता है, इसलिए उसके पास शांति बहाली में सक्रिय भूमिका निभाने का मजबूत कारण भी है। लावरोव ने आरोप लगाया कि कुछ देश जानबूझकर ईरान और उसके अरब पड़ोसियों के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि रूस इसका उल्टा चाहता है।
क्या अब मिडिल ईस्ट में भारत बनेगा नया पावर सेंटर?
वेस्ट एशिया में लगातार बढ़ते संकट, ईरान-अमेरिका तनाव और तेल आपूर्ति पर मंडराते खतरे के बीच भारत की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण होती दिख रही है। रूस और ईरान दोनों का सार्वजनिक रूप से भारत से मध्यस्थता की अपील करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नई दिल्ली अब सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक खिलाड़ी के रूप में भी उभर रही है।
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