वैज्ञानिकों का नया प्रयोग 'टाइम-क्रिस्टल' टू-बॉडी सिस्टम, जानें कैसे दे रहा फिजिक्स के नियमों को चुनौती
वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग में 'टाइम-क्रिस्टल' टू-बॉडी सिस्टम बनाया है जो भौतिकी (Physics) के नियमों को चुनौती देता हुआ प्रतीत होता है। 'टू-लेवल सिस्टम' क्वांटम कंप्यूटर का एक बुनियादी बिल्डिंग ब्लॉक है। कमरे के तापमान पर
लंदन, 14 जून : वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ऐसे प्रयोग में टू-बॉडी सिस्टम बनाया है जो भौतिकी (Physics) के नियमों को चुनौती दे रहा है। हम बात कर रहे हैं 'टाइम क्रिस्टल' की। लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी, रॉयल होलोवे लंदन, लैंडौ इंस्टीट्यूट और हेलसिंकी में आल्टो यूनिवर्सिटी की शोधकर्ताओं की एक टीम ने हीलियम-3 का उपयोग करते समय क्रिस्टल को देखा। यह हीलियम का एक दुर्लभ आइसोटोप है, जिसमें एक लुप्त न्यूट्रॉन है। टाइम क्रिस्टल, पदार्थ का एक नया चरण वैज्ञानिकों द्वारा पहली बार देखने के बाद इसे बनाया गया है।

भौतिकी के नियमों को चुनौती
लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी, रॉयल होलोवे लंदन, लैंडौ इंस्टीट्यूट और हेलसिंकी में आल्टो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने हीलियम -3 का उपयोग करके टाइम क्रिस्टल को देखा। यह हीलियम का एक दुर्लभ आइसोटोप है जिसमें एक न्यूट्रॉन है जो कि लुप्त अवस्था में है। उन्होंने टाइम क्रिस्टल को खत्म होने से लगभग 1,000 सेकंड के रिकॉर्ड समय तक देखा।

टाइम क्रिस्टल क्या है
नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि टाइम क्रिस्टल periodic motion अवस्था में आवधिक गति में एक मैक्रोस्कोपिक क्वांटम सिस्टम है। वैज्ञानिकों की टीम ने अब यह साबित कर दिया है कि पदार्थ के इस नए चरण को न केवल बनाया जा सकता है, बल्कि इसका उपयोग क्वांटम कंप्यूटिंग सहित उपयोगी उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है।

टाइम क्रिस्टल standard क्रिस्टल जैसी धातुओं या चट्टानों से अलग होते हैं, जो अंतरिक्ष में नियमित रूप से दोहराए जाने वाले पैटर्न में व्यवस्थित परमाणुओं से बने होते हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता फ्रैंक विल्जेक 2012 में समय क्रिस्टल को सिद्धांतित करने वाले पहले व्यक्ति थे। Time Crystal में परमाणु लगातार oscillate कर रहे हैं, घूम रहे हैं, या पहले एक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
लैंकेस्टर विश्वविद्यालय के प्रमुख लेखक डॉ समुली ऑट्टी ने एक बयान में कहा, हर कोई जानता है कि परपेचुअल मोशन मशीनें असंभव हैं। हालांकि, क्वांटम फिजिक्स में, जब तक हम अपनी आंखें बंद रखते हैं, तब तक सतत गति ठीक है। उन्होंने कहा, समय देखते ही चुपके से हम समय क्रिस्टल बना सकते हैं।
क्वांटम कंप्यूटरों को विकसित करने में उपयोगी साबित हो सकता है
टीम ने सुपरफ्लुइड हीलियम -3 को निरपेक्ष शून्य से लगभग दस-हज़ार डिग्री तक ठंडा किया और सुपरफ्लुइड के अंदर दो बार क्रिस्टल बनाए। तब टीम ने क्वांटम भौतिकी द्वारा वर्णित दो बार के क्रिस्टल को परस्पर क्रिया करते देखा। इससे यह जानकारी निकलकर सामने आई कि, क्वांटम कंप्यूटरों को विकसित करने में उपयोगी साबित हो सकता है ।जानकारी के मुताबिक, प्रत्येक को एक कक्षा के रूप में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया था।
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