LPG Crisis Explainer: भारत में कितने LPG सिलेंडर हैं? हर दिन कितने लाख खपत? Ujjwala Yojana कितनी मददगार?
LPG Crisis Explainer: मार्च 2026 में होर्मुज पर तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच LPG संकट ने पूरे देश को झकझोर दिया है। बुकिंग पर 25 दिन का इंतजार, ब्लैक मार्केट में 1800-3000 रुपये तक सिलेंडर बिक रहा है।
लेकिन सवाल ये है कि आखिर भारत में LPG का पूरा सिस्टम कितना बड़ा है? कितने सिलेंडर हैं? रोज कितनी खपत होती है? और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (Pradhan Mantri Ujjwala Yojana) ने गरीब परिवारों की रसोई को कितना मजबूत बनाया? आइए जानते हैं...

LPG Gas Cylinders Connections In India: भारत में कुल LPG कनेक्शन कितने हैं?
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ता देशों में से एक बन चुका है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, देश में 32.9 करोड़ से ज्यादा सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ता हैं। अगर इसे सरल तरीके से समझें तो देश में लगभग हर परिवार के पास गैस कनेक्शन मौजूद है। कई परिवारों के पास 2 सिलेंडर भी होते हैं, जिससे सिलेंडर खत्म होने पर तुरंत दूसरा सिलेंडर इस्तेमाल किया जा सके।
अगर हर कनेक्शन के पास औसतन दो सिलेंडर मानें, तो देश में कुल गैस सिलेंडरों की संख्या 60 से 65 करोड़ के बीच बैठती है। अगर इन सिलेंडरों को एक के ऊपर एक रख दिया जाए, तो ऊंचाई बुरज खलीफा (828 मीटर) से कई गुना ज्यादा हो जाएगी। इतनी बड़ी मांग को पूरा करने के लिए देश में हजारों बॉटलिंग प्लांट्स, लाखों डिलीवरी एजेंट और तीनों ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) दिन-रात काम करती हैं। भारत में LPG कवरेज अब 100 प्रतिशत से भी अधिक यानी करीब 102 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसका मतलब यह है कि देश के लगभग हर घर तक गैस कनेक्शन पहुंच चुका है।
LPG Cylinders Daily Used In India: भारत में रोज कितने LPG सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं?
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, भारत में हर दिन औसतन 55 लाख से अधिक LPG सिलेंडर की डिलीवरी होती है। इसका मतलब यह हुआ कि हर 24 घंटे में लाखों घरों और कारोबारों तक गैस सिलेंडर पहुंचाए जाते हैं। अगर इसे बड़े पैमाने पर देखें तो यह संख्या और भी चौंकाने वाली लगती है। हर महीने लगभग 1.6 करोड़ सिलेंडर की खपत होती है। वहीं साल भर में यह संख्या 20 करोड़ से भी ज्यादा हो जाती है। इन आंकड़ों में मुख्य रूप से घरेलू इस्तेमाल वाले 14.2 किलोग्राम सिलेंडर शामिल होते हैं, हालांकि इसमें कुछ हद तक होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर भी शामिल होते हैं।
रोजाना, मासिक और सालाना खपत: आंकड़े जो चौंकाते हैं
- प्रतिदिन: 55 लाख से ज्यादा सिलेंडर
- प्रति माह: करीब 1.65 करोड़ सिलेंडर
- प्रति वर्ष: 20 करोड़ से ज्यादा सिलेंडर
LPG Consumption In India: भारत में कुल LPG खपत कितनी है?
भारत में LPG की कुल खपत पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2017 में देश की कुल LPG खपत लगभग 21.6 मिलियन टन थी। यह आंकड़ा 2025 तक बढ़कर करीब 31 मिलियन टन (MMT) के आसपास पहुंच गया। अनुमान है कि 2026 तक यह 33 से 34 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। इसका मतलब यह है कि पिछले आठ साल में LPG की खपत में लगभग 44 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है।

8 साल में 44% उछाल
| वित्तीय वर्ष | कुल खपत (मिलियन मीट्रिक टन) | बढ़ोतरी |
| FY 2017 | 21.6 | - |
| FY 2025 | 31.3 | 0.44 |
| FY 2026 (अनुमान) | 33-34 | - |
LPG का सबसे ज्यादा उपयोग कहां होता है?
भारत में LPG का सबसे ज्यादा उपयोग घरेलू रसोई में होता है। कुल खपत का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। इसके अलावा करीब 10 प्रतिशत गैस होटल, रेस्टोरेंट और फूड सर्विस इंडस्ट्री में उपयोग होती है। वहीं लगभग 5 से 6 प्रतिशत गैस छोटे उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल होती है। हाल के वर्षों में कमर्शियल और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में भी बढ़ोतरी देखी गई है। फूड सर्विस सेक्टर, बड़े किचन और छोटे मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर अब तेजी से LPG अपना रहे हैं।

| सेक्टर | खपत का हिस्सा |
| घरेलू रसोई | 84-86% |
| होटल/रेस्तरां | 10% |
| छोटे उद्योग/कमर्शियल | 6% |
Ujjwala Yojana Revolution: उज्ज्वला योजना- गरीब महिलाओं की रसोई में क्रांति
मई 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (Pradhan Mantri Ujjwala Yojana) ने LPG को सिर्फ अमीरों का ईंधन नहीं, बल्कि गरीबों का भी बना दिया।
उज्ज्वला की उपलब्धियां (मार्च 2026 तक):
- 10.41 करोड़ से 10.53 करोड़ गरीब परिवारों को फ्री कनेक्शन (सिलेंडर, चूल्हा, रेगुलेटर, पाइप सब मुफ्त)
- कुल लक्ष्य 10.60 करोड़ के करीब
- अब तक 276 करोड़ से ज्यादा रिफिल उज्ज्वला परिवारों को दिए गए
- FY 2024-25 में रोजाना 13.6 लाख रिफिल सिर्फ उज्ज्वला परिवारों को
उज्ज्वला के चरण समझें...
- 2016-2019: 8 करोड़ कनेक्शन (लक्ष्य पूरा)
- उज्ज्वला 2.0 (2021): 1 करोड़ अतिरिक्त (जनवरी 2022 में पूरा)
- 2022: 60 लाख और
- 2023-24 से 2025-26: 75 लाख अतिरिक्त (जुलाई 2024 में पूरा)
योजना के तहत महिलाओं को बिना जमा राशि कनेक्शन मिला। 5 किलो डबल बॉटल ऑप्शन, 14.2 किलो से 5 किलो स्वैप, प्रवासी परिवारों के लिए स्व-घोषणा-सब कुछ आसान बनाया गया। जागरूकता के लिए LPG पंचायतें, ओओएच होर्डिंग्स, रेडियो जिंगल और विकसित भारत संकल्प यात्रा चलाई गई।
उज्ज्वला का असली प्रभाव:
- स्वास्थ्य: लाखों महिलाएं धुएं से बच गईं। WHO के अनुसार, पारंपरिक चूल्हे से सालाना 4 लाख मौतें होती थीं-उज्ज्वला ने इसे कम किया।
- महिला सशक्तिकरण: घर की मालकिन अब समय बचाकर पढ़ाई, काम या परिवार पर फोकस करती हैं।
- पर्यावरण: लकड़ी-कोयले की कटाई कम हुई, कार्बन उत्सर्जन घटा।
- रिफिल रेट: उज्ज्वला परिवारों में रिफिल 3.9 से बढ़कर 4.5 हो गया। यानी गरीब घर भी अब पूरी तरह गैस पर निर्भर।
मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जनवरी 2026 में कहा था: 'उज्ज्वला सिर्फ कनेक्शन नहीं, बल्कि आदत बदल रही है।'
LPG GAS Imports: गैस कहां से आती है? 60% आयात पर निर्भरता
भारत अपनी LPG जरूरत का 55-60% आयात करता है (कतर, सऊदी अरब, UAE से)। 90% आयात होर्मुज से गुजरता है। इसी वजह से मौजूदा संकट। घरेलू उत्पादन FY2017 के 11.2 MMT से FY2025 में 12.8 MMT हो गया, लेकिन मांग इतनी तेज कि 25% बढ़ोतरी के बावजूद पूरा नहीं हो पाता।
मार्च 2026 में सरकार की सतर्कता:
- रिफाइनरियों को 25% ज्यादा LPG उत्पादन का आदेश
- घरेलू उत्पादन को 100% घरेलू उपभोक्ताओं के लिए
- बुकिंग गैप 25 दिन (शहरी) और 45 दिन (ग्रामीण)
- व्यावसायिक LPG पर कटौती, होटलों को प्राथमिकता नहीं
इन कदमों से घरेलू उत्पादन 25% बढ़ा, जो रोजाना खपत का करीब 10% कवर करता है।
दिलचस्प तथ्य
- LPG कवरेज 102.8% पहुंच गया (कुछ घरों में 2 कनेक्शन)।
- सीएनजी-PNG बढ़ने के बावजूद सिलेंडर की मांग नहीं घटी।
- उज्ज्वला ने ग्रामीण LPG कवरेज को 62% से 100%+ कर दिया।
संकट के बीच उम्मीद की किरण
33 करोड़ कनेक्शन, 55 लाख रोजाना डिलीवरी और उज्ज्वला की बदौलत भारत का LPG नेटवर्क दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत है। सरकार ने घरेलू प्राथमिकता, अतिरिक्त केरोसिन आवंटन और वैकल्पिक आयात से बैकअप प्लान तैयार कर लिया है। पेट्रोल-डीजल की कोई समस्या नहीं, रिफाइनरियां 100%+ क्षमता पर चल रही हैं।
LPG संकट अस्थायी है, लेकिन यह हमें याद दिलाता है कि हम कितनी बड़ी ऊर्जा व्यवस्था को संभाल रहे हैं। उज्ज्वला योजना ने करोड़ों गरीब परिवारों को धुएं से मुक्ति दी, महिलाओं को सम्मान दिया और भारत को क्लीन एनर्जी की ओर ले गई। आज हर गांव-शहर में गैस स्टोव जल रहा है-यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी सामाजिक क्रांति है।
घबराएं नहीं। बुकिंग समय पर करें, अफवाहों पर ध्यान न दें और सरकार के बैकअप प्लान पर भरोसा रखें। 33 करोड़ परिवारों की रसोई एक साथ चल रही है-यह भारत की ताकत है। संकट आएगा, लेकिन उज्ज्वला और मजबूत कूटनीति के साथ हम पहले की तरह उबर जाएंगे।












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