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PNG Gas Crisis: घर में सिलेंडर नहीं, पाइप वाली गैस PNG चलती है? दिल्ली-NCR के लोगों के लिए आई बड़ी चेतावनी

PNG Gas Crisis: अगर आपके घर में सिलेंडर नहीं बल्कि पाइपलाइन से आने वाली गैस यानी PNG लगी है, तो यह खबर आपको परेशान कर सकती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात का असर अब भारत की गैस सप्लाई पर भी दिखने लगा है। दिल्ली-NCR में पाइप्ड नेचुरल गैस की सप्लाई संभालने वाली कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) (Indraprastha Gas Limited) ने कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों के लिए गैस सप्लाई में 20 प्रतिशत की कटौती कर दी है।

इस फैसले का असर सबसे ज्यादा होटल, रेस्टोरेंट और बड़े किचन पर पड़ रहा है। कई जगहों पर गैस की कमी के कारण कामकाज प्रभावित हो गया है और कुछ रेस्टोरेंट को अस्थायी तौर पर बंद भी करना पड़ा है।

PNG Gas Crisis IRAN WAR IMPACT

दिल्ली-NCR में PNG सप्लाई पर 20% कटौती (PNG supply cut)

दिल्ली और आसपास के इलाकों में पाइपलाइन गैस की सप्लाई करने वाली IGL ने एक आधिकारिक सलाह जारी करते हुए कहा है कि सभी कमर्शियल और औद्योगिक ग्राहकों को अब अपने पिछले छह महीने के औसत इस्तेमाल का केवल 80 प्रतिशत ही गैस मिलेगी।

यह नियम 11 मार्च की सुबह 6 बजे से लागू किया गया। बताया जा रहा है कि यह फैसला सरकार के निर्देशों के तहत लिया गया है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की सप्लाई सुरक्षित रखी जा सके। वसंत कुंज स्थित एम्बिएंस मॉल ने भी अपने किरायेदारों को एक नोटिस जारी कर इस कटौती की जानकारी दी है।

होटल और रेस्टोरेंट पर सबसे ज्यादा असर (Restaurant PNG crisis)

गैस सप्लाई कम होने का सबसे बड़ा असर दिल्ली के होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर पड़ा है। पहाड़गंज और वसंत कुंज जैसे इलाकों में कई रेस्टोरेंट ने गैस खत्म होने के कारण अपना काम बंद कर दिया है।

रेस्टोरेंट कारोबारियों का कहना है कि अभी तक पाइपलाइन गैस ने दिल्ली को अन्य शहरों के मुकाबले बेहतर स्थिति में रखा था, लेकिन अब जब इसमें भी कटौती हो गई है तो हालात मुश्किल हो सकते हैं। कुछ कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि अगर गैस सप्लाई की स्थिति जल्दी नहीं सुधरी तो आने वाले वीकेंड तक राजधानी के कई रेस्टोरेंट पूरी तरह बंद हो सकते हैं।

Gas shortage In Delhi: गैस खत्म, सिलेंडर भी नहीं मिल रहे

कई रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि पहले वे पाइपलाइन गैस के साथ-साथ एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल करके काम चला लेते थे। लेकिन अब बाजार में कमर्शियल सिलेंडर भी आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

कुछ जगहों पर सिलेंडर ब्लैक मार्केट में भी नहीं मिल रहे या फिर बहुत ऊंची कीमत पर उपलब्ध हैं। ऐसे में छोटे और मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। दिल्ली हाईकोर्ट के वकीलों की कैंटीन को भी बुधवार सुबह कुछ समय के लिए अपना मुख्य भोजन मेन्यू बंद करना पड़ा क्योंकि किचन में गैस उपलब्ध नहीं थी।

इंडक्शन कुकिंग की ओर बढ़ रहे रेस्टोरेंट (Alternative cooking)

स्थिति को संभालने के लिए कई रेस्टोरेंट अब गैस के बजाय बिजली से चलने वाले इंडक्शन सिस्टम की ओर जाने की योजना बना रहे हैं। हालांकि यह बदलाव तुरंत संभव नहीं है क्योंकि बड़े किचन को पूरी तरह इंडक्शन आधारित सिस्टम में बदलने में समय और लागत दोनों लगते हैं। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गैस संकट लंबा चला तो राजधानी के फूड बिजनेस को बड़ा झटका लग सकता है।

PNG, LPG और CNG में क्या फर्क है? (Gas types explained)

एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस वह गैस है जो सिलेंडर में भरी जाती है और घरों में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होती है। यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का मिश्रण होती है और कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान निकलती है।

पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों, रेस्टोरेंट और उद्योगों तक पहुंचती है। यह मीथेन आधारित गैस होती है और सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती। रिसाव होने पर यह हवा में जल्दी घुल जाती है इसलिए इसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

वहीं सीएनजी यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस भी मीथेन ही होती है, लेकिन इसे बहुत ज्यादा दबाव में संकुचित करके वाहनों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

ईरान और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा खतरा (Strait of Hormuz crisis)

बिजनेस एक्सपर्ट सरथक आहूजा के मुताबिक मौजूदा संकट का बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है। उन्होंने बताया कि दुनिया के लिए सबसे अहम तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz है।

करीब 30 किलोमीटर चौड़ा यह समुद्री रास्ता वह जगह है जहां से सऊदी अरब, कतर, इराक, यूएई, कुवैत और बहरीन जैसे देशों का तेल दुनिया के बाकी हिस्सों में पहुंचता है।

अगर यहां शिपमेंट प्रभावित होते हैं तो वैश्विक तेल बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है और इसमें से करीब आधा तेल इसी रास्ते से आता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का संकट भारत की ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे तो कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ दिनों में 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। इसका असर गैस, पेट्रोल और डीजल समेत कई ईंधनों की कीमत पर पड़ सकता है।

भारत के सामने मुश्किल विकल्प (Energy challenge)

मौजूदा हालात में भारत के सामने दो बड़े विकल्प हैं। एक तरफ उसे रूस से फिर ज्यादा तेल आयात करना पड़ सकता है, जिससे अमेरिका के साथ कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है।

दूसरी तरफ अगर तेल महंगा हुआ तो देश में महंगाई बढ़ सकती है और उद्योगों की लागत भी बढ़ जाएगी। इससे कंपनियों के मुनाफे और शेयर बाजार पर भी असर पड़ सकता है।

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते दबाव ने अब यह साफ कर दिया है कि वैश्विक संकट का असर सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच सकता है। फिलहाल सरकार घरेलू उपभोक्ताओं की सप्लाई बचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे तो गैस बाजार में और बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।

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