Pakistan Betrayed US: किसी का सगा नहीं पाकिस्तान, Trump को भी दिया धोखा, ईरान को दी सीक्रेट मदद
Pakistan Betrayed US: पाकिस्तान और पाकिस्तान की लीडरशिप दुनिया के लिए कभी भरोसे के लायक नहीं रही। जिस अमेरिका ने सालों तक पाला उसी में 9/11 करने वाले ओसामा बिन लादेन को अपने यहां सालों तक छुपाए रखा। ऐसा ही एक और मामला अब सामने आ रहा है। दरअसल जिस अमेरिका के रहम-ओ-करम पर पाकिस्तान चल रहा है अब उसी की पीठ में पाकिस्तानी लीडरशिप ने एक बार फिर खंजर घोंप दिया है।
जैसा कि आपको पता है अमेरिका, ईरान के साथ जंग लड़ रहा है। ऐसे में उसे लगा था कि पाकिस्तान तो उसकी टीम में है। लेकिन पाकिस्तान ने अपना असली रंग दिखाते हुए दुनिया को बता दिया वह किसी का सगा नहीं और किसी के भरोसे के लायक भी नहीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ईरान की साइलेंट मदद करते हुए पकड़ा गया है। क्या है पूरा मामला डिटेल में समझेंगे।

अमेरिका की पीठ में मुनीर ने घोंपा खंजर
ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे टकराव के बीच पाकिस्तान को लेकर छपी एक रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने खुद को तेहरान और वाशिंगटन के बीच एक Diplomatic Bridge की तरह पेश किया। इसी दौरान उसने कथित तौर पर ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर खड़ा होने की सीक्रेट परमीशन भी दी वो भी अमेरिका को बिना बताए। पाकिस्तान ने ऐसा ऐसा इसलिए किया ताकि अमेरिकी एयरस्ट्राइक की स्थिति में ईरानी विमानों को सुरक्षित रखा जा सके।
जो एयरबेस Op Sindoor में हुआ तबाह, वहीं उतरे ईरानी विमान
CBS News में एक अमेरिकी अधिकारी से हुई गोपनीय बातचीत के हवाले से छपी रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान किए जाने के तुरंत बाद ईरान ने अपने कई विमान पाकिस्तान भेजे थे। ये विमान रावलपिंडी के बाहर स्थित पाकिस्तान एयर फोर्स के रणनीतिक नूर खान एयरबेस पर उतारे गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक इन विमानों में ईरानी वायुसेना का RC-130 भी शामिल था। यह Lockheed C-130 Hercules विमान का एक Reconnaissance वर्जन माना जाता है, जिसका इस्तेमाल निगरानी और खुफिया मिशनों के लिए किया जाता है।
पाकिस्तान ने क्या दी सफाई?
हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि नूर खान एयरबेस शहर के बीचों-बीच मौजूद है और वहां इतने बड़े सैन्य विमानों को छिपाना संभव ही नहीं है। अधिकारी ने साफ कहा कि ये दावे सही नहीं हैं।
पाकिस्तान क्यों फंसा दो बड़े देशों के बीच?
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने खुद को एक न्यूट्रल मीडिएटर के तौर पर पेश करने की कोशिश की। इस्लामाबाद ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे ईरान या चीन नाराज हों। खास तौर पर चीन, जो लंबे समय से ईरान का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थक माना जाता है। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान की चीन पर सैन्य और आर्थिक निर्भरता काफी बढ़ गई है। SIPRI यानी Stockholm International Peace Research Institute की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान को मिलने वाले लगभग 80% बड़े हथियार चीन से आए थे।
युद्ध में अब क्या हो रहा?
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार तेहरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी शर्तें रखी थीं। इनमें अमेरिका ने युद्ध में जो नुकसान किया उसकी भरपाई, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना और अमेरिकी प्रतिबंध हटाना शामिल था। Islamic Republic of Iran Broadcasting ने इन शर्तों को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा किया था। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ईरान के प्रस्ताव को TOTALLY UNACCEPTABLE यानी पूरी तरह अस्वीकार्य बता दिया। दूसरी ओर होर्मुज के आस-पास अभी भी झड़पें चल रही हैं जो कभी भी बड़े युद्ध की शक्ल ले सकती हैं। इसीलिए एक्सपर्ट ये मान कर चल रहे हैं कि सीजफायर अब सिर्फ नाम का रह गया है।
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