Hajj-Umrah पर क्यों जाते हैं लोग? जानिए कब शुरू हुई ये पवित्र यात्रा और क्या गैर मुस्लिमों को मिलती है एंट्री?
OI Explained: Hajj और Umrah इस्लाम धर्म की सबसे पवित्र धार्मिक यात्राओं में गिने जाते हैं। हर साल दुनिया भर से लाखों मुस्लिम श्रद्धालु Saudi Arabia के मक्का और मदीना शहर पहुंचते हैं। भारत से भी बड़ी संख्या में लोग हज और उमराह के लिए जाते हैं। हालांकि इस साल ईरान द्वारा किए गए हमलों के बाद इस यात्रा के लिए मिलने वाले वीजा को सस्पेंड किया था लेकिन अब ये सर्विस 31 मई से फिर खुल रही हैं। आइए जानते हैं कि भारत से हर साल कितने लोग इन तीर्थ यात्राओं पर जाते हैं और सरकार का उसमें क्या रोल रहता है।
क्या है हज और उमराह में फर्क?
Hajj इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है और हर सक्षम मुस्लिम के लिए जीवन में कम से कम एक बार हज करना जरूरी माना जाता है। हज सिर्फ इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने “जिलहिज्जा” में तय तारीखों पर ही किया जाता है। इसमें मक्का, मदीना, अराफात और मुजदलिफा जैसी जगहों पर कई धार्मिक रस्में पूरी करनी होती हैं।

1. मक्का (Mecca): यह इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की जन्मस्थली है। यहां काबा (Kaaba) स्थित है, जिसे अल्लाह का घर माना जाता है। दुनिया भर के मुसलमान नमाज़ पढ़ते समय काबा (किबला) की ओर मुंह करते हैं। हज और उमराह के दौरान यहां 'तवाफ' (काबा की परिक्रमा) किया जाता है।
2. मदीना (Madinah): इसे "मदीनत-उन-नबी" (पैगंबर का शहर) भी कहा जाता है। मक्का से हिजरत (प्रवास) करने के बाद पैगंबर मुहम्मद ने यहीं अपना जीवन बिताया था। यहां 'अल-मस्जिद अल-नबवी' (पैगंबर की मस्जिद) स्थित है, जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद है। इसी मस्जिद के परिसर में पैगंबर मुहम्मद साहब की कब्र (रौजा) मौजूद है। हज के बाद या पहले यात्री यहां की जियारत (दर्शन) के लिए आते हैं।
3. अराफात (Arafat): हज के दौरान ज़ुल-हिज्जा की 9 तारीख को अराफात के मैदान में रुकना (वुकूफ) हज का सबसे मुख्य और जरूरी हिस्सा है। अगर कोई हाजी अराफात नहीं पहुंचता, तो उसका हज अधूरा माना जाता है। यहीं पर 'जबल-ए-रहमा' (दया का पहाड़) स्थित है। इसी स्थान पर पैगंबर मुहम्मद ने अपना अंतिम ऐतिहासिक उपदेश (खुत्बा-ए-हज) दिया था। हाजी यहां दोपहर से लेकर सूर्यास्त तक अल्लाह की इबादत और दुआ में लीन रहते हैं।
4. मुजदलिफा (Muzdalifah): यह अराफात और मदीना के बीच स्थित एक खुला मैदान है। अराफात में दिन बिताने के बाद, हाजी सूर्यास्त के बाद मुजदलिफा पहुंचते हैं और रात भर खुले आसमान के नीचे इबादत करते हैं। मुजदलिफा में हाजी मगरिब और ईशा की नमाज़ एक साथ अदा करते हैं। यहीं से वे शैतान (जमरात) को मारने के लिए छोटे-छोटे कंकड़ चुनते हैं।

क्या है उमराह?
वहीं उमराह को “छोटा हज” भी कहा जाता है। इसे साल में लगभग किसी भी समय किया जा सकता है। उमराह में मुख्य रूप से काबा का तवाफ और सई जैसी रस्में होती हैं। उमराह जरूरी नहीं है, लेकिन इसे बेहद पुण्य का काम माना जाता है।
क्या दूसरे धर्म का व्यक्ति हज कर सकता है?
Saudi Arabia के नियमों के मुताबिक केवल मुस्लिम ही मक्का और हज क्षेत्रों में प्रवेश कर सकते हैं। गैर-मुस्लिम लोगों को मक्का शहर में जाने की अनुमति नहीं होती। इसलिए कोई दूसरे धर्म का व्यक्ति हज नहीं कर सकता। हालांकि मदीना के कुछ हिस्सों में गैर-मुस्लिमों के प्रवेश को लेकर नियम हैं, लेकिन हज की धार्मिक प्रक्रिया सिर्फ मुसलमानों के लिए ही है।
कब से शुरू हुई हज यात्रा?
इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक हज की परंपरा पैगंबर इब्राहिम और उनके परिवार के समय से जुड़ी हुई मानी जाती है। माना जाता है कि काबा को पैगंबर इब्राहिम और उनके बेटे इस्माइल ने बनवाया था। बाद में पैगंबर मोहम्मद ने 7वीं सदी में हज की मौजूदा धार्मिक प्रक्रिया को एक सामाजिक और व्यवस्थित रूप दिया। तभी से दुनिया भर के मुसलमान हज यात्रा करते आ रहे हैं।
भारत से हर साल कितने लोग हज और उमराह जाते हैं?
भारत से भी सदियों से लोग समुद्री रास्तों और बाद में हवाई मार्ग से हज के लिए जाते रहे हैं। पहले यह यात्रा महीनों में पूरी होती थी, लेकिन अब फ्लाइट्स और डिजिटल सिस्टम की वजह से प्रक्रिया काफी आसान हो चुकी है। भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां से सबसे ज्यादा हज यात्री जाते हैं। 2018 में भारत का हज कोटा लगभग 1.75 लाख था।
भारत सरकार और Haj Committee of India के जरिए हर साल करीब 1.2 से 1.5 लाख लोग हज यात्रा करते हैं, जबकि हजारों लोग प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स के जरिए जाते हैं। वहीं उमराह के लिए संख्या इससे भी ज्यादा होती है। इसके आंकड़े 10-12 लाख हर साल उमराह के लिए जाते हैं, जबकि 2023 में सऊदी अरब ने डेटा जारी किया था जिसके मुताबिक उस साल 18 ला लोग उमराह करने सऊदी अरब पहुंचे थे। इसके अलावा रमजान के दिनों में इनकी संख्या सबसे ज्यादा होती है।

क्या भारत सरकार अभी भी हज सब्सिडी देती है?
बहुत से लोगों को लगता है कि भारत सरकार अभी भी हज सब्सिडी देती है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। भारत सरकार ने 2018 में हज सब्सिडी खत्म कर दी थी। पहले यह सब्सिडी मुख्य रूप से हवाई किराए में छूट के रूप में दी जाती थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2017 में सरकार ने एयरफेयर पर लगभग 1,030 करोड़ रुपये खर्च किए थे। सरकार ने बाद में कहा कि सब्सिडी का पैसा अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा।
बिना सब्सिडी के कितना खर्च आता है?
आज के समय में भारत से हज यात्रा का खर्च पैकेज और सुविधाओं के हिसाब से लगभग 3.5 लाख रुपये से 8 लाख रुपये तक जा सकता है। इसमें फ्लाइट, होटल, खाना, ट्रांसपोर्ट और वीज़ा शामिल होते हैं। वहीं उमराह का खर्च आम तौर पर 1.5 लाख रुपये से 3 लाख रुपये के बीच होता है। रमजान या पीक सीजन में यह खर्च और बढ़ सकता है।
हज और उमराह के लिए आवेदन कैसे होता है?
भारत में हज यात्रा के लिए आवेदन Haj Committee of India के जरिए किया जाता है। यहां ऑनलाइन फॉर्म भरना, पासपोर्ट, फोटो और मेडिकल दस्तावेज जमा करना जरूरी होता है। उमराह के लिए लोग अधिकतर प्राइवेट ट्रैवल एजेंसियों या सऊदी सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। अब Nusuk ऐप काफी अहम हो गया है।
क्या है Nusuk App?
Nusuk सऊदी अरब का आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए तीर्थयात्री परमिट, होटल बुकिंग, ट्रैवल पैकेज और कई दूसरी सुविधाएं हासिल कर सकते हैं। सऊदी सरकार ने भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और यात्रा प्रबंधन के लिए इसे जरूरी बनाया है। कई देशों के यात्रियों को अब हज और उमराह परमिट के लिए Nusuk प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना पड़ता है।
हज यात्रा भारत-सऊदी रिश्तों में क्यों अहम है?
India और Saudi Arabia के रिश्तों में हज और उमराह का बड़ा रोल है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय मुस्लिम श्रद्धालुओं के सऊदी जाने से दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत होते हैं। भारत सरकार लगातार सऊदी अरब के साथ बेहतर हज कोटा, फ्लाइट्स और सुविधाओं को लेकर बातचीत करती रही है। पिछले कुछ सालों में सऊदी अरब ने भारत का हज कोटा बढ़ाया भी है।
इसके अलावा सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार भी रहते हैं। ऐसे में हज और उमराह सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि दोनों देशों की डिप्लोमेसी, पर्यटन और आर्थिक रिश्तों का भी अहम हिस्सा बन चुके हैं।
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