Bihar Heatwave: भीषण गर्मी के बीच बिहार में सूखे की टेंशन! 10 साल के आंकड़ों ने डराया, कब आएगा इस बार मानसून?

Bihar Heatwave Alert: बिहार इस समय तेज गर्मी की चपेट में है। कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और अगले कुछ दिनों तक राहत मिलने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है। मौसम विभाग ने इस बार लंबे समय तक हीटवेव चलने की आशंका जताई है। इसी बीच कमजोर मानसून और सूखे का खतरा भी बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत महासागर में बन रही अल-नीनो की स्थिति बिहार समेत पूरे देश के मानसून को प्रभावित कर सकती है। अगर यह और मजबूत हुआ तो सुपर अल-नीनो की वजह से बारिश सामान्य से काफी कम हो सकती है। पिछले 10 साल के आंकड़े भी बताते हैं कि बिहार में मानसून की बारिश लगातार बदलती रही है। खेती पर निर्भर राज्य होने के कारण कम बारिश का असर सीधे किसानों और आम लोगों पर पड़ सकता है।

Bihar Heatwave Alert

पिछले 10 साल में कैसी रही बिहार में बारिश

बिहार में मानसून की सामान्य बारिश 992.2 मिमी मानी जाती है। हालांकि कई सालों में बारिश सामान्य से कम रही है। 2025 में अब तक 686.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है। 2024 में 798.2 मिमी और 2023 में 760.5 मिमी बारिश हुई थी।

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2022 में 683.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि 2021 में 1044.5 मिमी बारिश हुई थी। 2020 में सबसे ज्यादा 1272.5 मिमी बारिश दर्ज की गई।

Bihar Monsoon Data

इसके अलावा 2019 में 1050 मिमी, 2018 में 771 मिमी, 2017 में 937 मिमी और 2016 में 975 मिमी बारिश हुई थी। आंकड़े बताते हैं कि हर साल मानसून का पैटर्न बदल रहा है।

बिहार में इस साल कब पहुंचेगा मानसून

मौसम विभाग के अनुसार इस बार बिहार में मानसून 8 से 10 जून के बीच पहुंच सकता है। आमतौर पर मानसून 15 जून के आसपास राज्य में प्रवेश करता है। वहीं दक्षिण-पश्चिम मानसून के 26 मई तक केरल पहुंचने की संभावना जताई गई है।

इस साल बिहार में सामान्य से करीब 20% कम बारिश होने का अनुमान लगाया जा रहा है। अगर अल-नीनो ज्यादा मजबूत हुआ तो बारिश में और कमी आ सकती है।

मई में और बढ़ सकती है गर्मी

मौसम एजेंसी Accuweather के मुताबिक मई के आखिर तक बिहार में भीषण गर्मी बनी रह सकती है। पटना में कई दिनों तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहने की संभावना है। कुछ दिनों में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। गया, रोहतास और दक्षिण बिहार के कई इलाकों में भी लू का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।

क्या होता है अल-नीनो

अल-नीनो एक प्राकृतिक मौसम चक्र है, जो प्रशांत महासागर में समुद्र के पानी का तापमान बढ़ने से बनता है। जब समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है तो हवाओं का पैटर्न बदलने लगता है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है।

भारत में इसका असर सबसे ज्यादा मानसून पर दिखाई देता है। अल-नीनो एक्टिव होने पर हिंद महासागर और अरब सागर से आने वाली ठंडी और नम हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इससे मानसून की बारिश कम हो सकती है।

सुपर अल-नीनो क्यों बढ़ा रहा चिंता

जब समुद्र का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है तो उसे सुपर अल-नीनो कहा जाता है। यह स्थिति कम बार बनती है, लेकिन इसके असर काफी बड़े होते हैं।

इससे सूखा, तेज गर्मी और कमजोर मानसून जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। मौसम एजेंसियों के मुताबिक इस बार सुपर अल-नीनो बनने की संभावना काफी ज्यादा है।

मानसून कैसे लाता है बारिश

गर्मी के मौसम में भारत की जमीन तेजी से गर्म होती है। इससे कम दबाव का क्षेत्र बनता है। दूसरी तरफ समुद्र की हवा ठंडी रहती है। इसी कारण हिंद महासागर और अरब सागर से नमी वाली हवाएं भारत की ओर बढ़ती हैं।

ये हवाएं हिमालय से टकराकर ऊपर उठती हैं और फिर बारिश होती है। लेकिन अल-नीनो की स्थिति में समुद्र से आने वाली यही ठंडी हवाएं कमजोर हो जाती हैं, जिससे मानसून पर असर पड़ता है।

खेती पर पड़ सकता है असर

बिहार की खेती काफी हद तक मानसून की बारिश पर निर्भर करती है। धान की खेती के लिए अच्छी बारिश जरूरी मानी जाती है। अगर मानसून कमजोर रहा तो किसानों की परेशानी बढ़ सकती है।

इस साल पहले ही सर्दियों में कम बारिश हुई थी। इसके बाद फरवरी से अप्रैल के बीच हुई बेमौसम बारिश ने भी फसलों को नुकसान पहुंचाया। ऐसे में किसान अब मानसून की बारिश पर उम्मीद लगाए बैठे हैं।

क्या बन सकते हैं सूखे जैसे हालात

बिहार ने पहले भी सूखे का दौर देखा है। 1965-66 के बाद सूखे की वजह से राज्य में अनाज उत्पादन में बड़ी गिरावट आई थी। हालांकि अब हालात पहले जैसे नहीं माने जा रहे।

बिहार आज गेहूं, धान और मक्का उत्पादन में देश के बड़े राज्यों में शामिल है। राज्य और देश में अनाज का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसलिए बड़े स्तर पर खाद्यान्न संकट की संभावना कम मानी जा रही है।

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