Suvendu PA Chandranath हत्याकांड में Raj Singh को क्यों क्लीनचिट? बड़े नेताओं से नाता, UP Police को झटका!
Suvendu Adhikari PA Chandranath Rath Murder Case: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की 6 मई 2026 को मध्यमग्राम में हुई बेरहमी से हत्या ने पूरे देश में सनसनी फैला दी। प्रोफेशनल तरीके से की गई इस हत्या में सुपारी किलर्स, रेकी, फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियां और अंतरराज्यीय गैंग का हाथ होने का शक जताया गया। शुरुआती जांच में यूपी के बलिया का राज सिंह मुख्य शूटर बताकर गिरफ्तार किया गया, लेकिन सीबीआई की जांच में मामला पलट गया।
नाम की भ्रम की वजह से गलत व्यक्ति को यूपी पुलिस ने पकड़ा गया। अब CBI ने राज सिंह को क्लीन चिट दे दी है और असली मुख्य आरोपी राजकुमार सिंह उर्फ राज सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। यह केस यूपी पुलिस के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है, साथ ही राजनीतिक रसूख वाले लोगों के कनेक्शन भी चर्चा में आ गए हैं। आइए विस्तार से एक-एक परत को खोलते हैं...

Who Was Chandranath Rath: चंद्रनाथ रथ कौन थे?
चंद्रनाथ रथ (41 वर्ष) मूल रूप से एयरफोर्स अधिकारी रह चुके थे। VRS लेकर कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया, फिर राजनीति में आए। सुवेंदु अधिकारी के साथ उनकी नजदीकी तब शुरू हुई जब सुवेंदु तृणमूल कांग्रेस में थे। 2019 से वे सुवेंदु की ऑफिशियल टीम का हिस्सा बने। भवानीपुर उपचुनाव में सुवेंदु के अभियान की जिम्मेदारी संभाली, जहां सुवेंदु ने ममता बनर्जी को हराया था। सुवेंदु के मुख्यमंत्री बनने के बाद चंद्रनाथ उनके अत्यंत विश्वसनीय सहायक थे।
Chandranath Rath Death Timeline: 90 मिनट की सटीक टाइमलाइन
6 मई 2026 की रात:
- 9:00 बजे: चंद्रनाथ कोलकाता से अपनी किराए की कार (स्कॉर्पियो) में मध्यमग्राम स्थित घर की ओर रवाना हुए। ड्राइवर गाड़ी चला रहा था।
- 9:58 बजे: CCTV में स्कॉर्पियो मध्यमग्राम में दिखी।
- 10:30 बजे: दोहरिया जंक्शन के पास एक कार ने स्कॉर्पियो का रास्ता रोक दिया।
- बाइक पर सवार हमलावरों ने 6-10 राउंड फायरिंग की। चंद्रनाथ गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
- हमलावर कार छोड़कर दो बाइक्स पर अलग-अलग रास्तों से फरार हो गए।
- कार और बाइक्स की नंबर प्लेट फर्जी थीं, चेसिस और इंजन नंबर मिटाए गए थे। पुलिस को संदेह हुआ कि यह कॉन्ट्रैक्ट किलिंग है।
शुरुआती गिरफ्तारियां और नाम की भूल क्या?
कोलकाता पुलिस और CID की जांच में UPI टोल पेमेंट (बाली टोल प्लाजा) से महत्वपूर्ण क्लू मिला। इससे बिहार के बक्सर से विक्की मौर्य और मयंक मिश्रा गिरफ्तार हुए। पूछताछ में 'राज सिंह' नाम सामने आया। यूपी पुलिस ने 10-11 मई को अयोध्या से बलिया के राज सिंह को गिरफ्तार किया। वह परिवार के साथ लखनऊ में एक BJP MLC की शादी में शामिल होकर लौट रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसके BJP नेताओं के साथ फोटो वायरल हुए, जिससे राजनीतिक रंग चढ़ गया।
Who Is Raj Singh: राज सिंह कौन हैं? BJP कनेक्शन

बलिया सदर कोतवाली क्षेत्र के आनंद नगर निवासी राज सिंह खुद को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का प्रदेश महासचिव बताते थे। सोशल मीडिया पर सक्रिय, BJP नेताओं (जिसमें मंत्री दयाशंकर सिंह, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह आदि) के साथ तस्वीरें और रील्स वायरल थीं।
वे स्थानीय स्तर पर सक्रिय थे- चिलकहर ब्लॉक प्रमुख चुनाव लड़ने की तैयारी (मिशन 2026), सभासद पोस्टर छपवाए। पड़ोसी उन्हें राजनीति में आने वाले महत्वाकांक्षी युवा के रूप में जानते थे। गिरफ्तारी के बाद परिवार ने दावा किया कि वह घटना के समय बलिया में था।

CBI जांच: क्लीन चिट और असली अपराधी की गिरफ्तारी
CBI ने केस अपने हाथ में लिया। गहन जांच में पता चला कि राज सिंह गलत व्यक्ति था। नाम की समानता (Raj Singh vs Rajkumar Singh उर्फ Raj Singh) के कारण भूल हुई। असली मुख्य शूटर राजकुमार सिंह बलिया के ही रसड़ा क्षेत्र (रतोपुर गांव) का रहने वाला है, दोनों घरों के बीच करीब 35 किमी दूरी।
CBI ने 18 मई को मुजफ्फरनगर से राजकुमार सिंह को गिरफ्तार किया। इसके बाद:
- 19 मई: वाराणसी से विनय राय उर्फ पम्पम गिरफ्तार (कई गंभीर मामले दर्ज)।
- 20 मई: बलिया से नवीन कुमार सिंह (हथियार सप्लायर) गिरफ्तार।
नवीन ने पूछताछ में बताया कि 7 मई को मन्नू (जानेंद्र प्रताप सिंह) के साथ राजकुमार और गोलू आए। हथियारों वाला झोला दिया गया, जो बाद में गोदाम में छिपाया गया। STF ने 9mm पिस्टल, .32 बोर हथियार, कारतूस बरामद किए। CBI ने अदालत में अर्जी देकर राज सिंह की संलिप्तता से इनकार किया और उसे रिहा करवा लिया।
यूपी पुलिस को झटका क्यों?
- गलत पहचान पर आधारित गिरफ्तारी।
- राजनीतिक दबाव या जल्दबाजी के आरोप लगे।
- CBI की एंट्री से राज्य पुलिस की छवि प्रभावित हुई।
- राज सिंह की गिरफ्तारी के समय BJP नेताओं से तस्वीरें वायरल होने से मामला और संवेदनशील हो गया।
राज सिंह ने रिहाई के बाद वीडियो जारी कर कहा कि जय श्री राम। बहुत जल्दी सभी को सबका जवाब मिल जाएगा... मीडिया, जवाब देने आ रहे हैं।
हत्याकांड में कितने लोग शामिल? साजिश का स्वरूप
- CBI को संदेह है कि कम से कम 8 लोग शामिल थे।
- कई दिनों की रेकी।
- प्रोफेशनल शूटर।
- सपोर्ट स्टाफ (हथियार सप्लाई, लॉजिस्टिक्स, भागने का रास्ता)।
- UPI, मोबाइल लोकेशन, CCTV और टोल डेटा से चेन बनाई गई।
मामले में कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का एंगल भी ताक में है, हालांकि मोटिव अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है।
मां बोली- मेरा बेटा निर्दोष
राज सिंह की मां जम्वांती देवी ने कहा कि उनका बेटा निर्दोष है। '7 तारीख को वह लखनऊ-अयोध्या गया था, मेरे साथ था।' परिवार ने राजनीतिक साजिश का आरोप भी लगाया।
बड़े सवाल
- नाम की इतनी बड़ी भूल कैसे हुई? क्या जल्दबाजी में काम किया गया?
- राजकुमार सिंह का क्रिमिनल बैकग्राउंड (3 मामले) पहले क्यों नहीं पकड़ा गया?
- हत्या के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या व्यक्तिगत दुश्मनी?
- UP-Bihar-Bengal का इंटरस्टेट क्रिमिनल नेटवर्क कितना मजबूत है?
यह केस दिखाता है कि डिजिटल सबूत (UPI, CCTV, लोकेशन) कितने अहम हैं, लेकिन शुरुआती जांच में मानवीय भूल कितनी महंगी पड़ सकती है। CBI अब पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। 8 में से अधिकांश आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।
राज सिंह को क्लीन चिट मिलने के बाद यूपी पुलिस और बंगाल पुलिस दोनों की छवि पर सवाल उठे हैं। वहीं, सुवेंदु अधिकारी के करीबी की हत्या ने राजनीतिक हिंसा पर फिर बहस छेड़ दी है।












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