बेलूर मठ की क्या है खासियत? जिनके संतों को देखते ही बंगाल सीएम सुवेंदु अधिकारी हुए नतमस्तक
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को बेलूर मठ का दौरा किया। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह उनकी मठ की पहली यात्रा थी। हावड़ा में स्थित बेलूर मठ में सीएम सुवेंदु अधिकारी ने संतों के समक्ष नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया।
हुगली नदी के किनारे स्थित बेलूर मठ जो रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है, इसके विशाल परिसर में संतों ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का हार्दिक स्वागत किया गया। एक अधिकारी ने इसे "एक आध्यात्मिक यात्रा" बताया और पुष्टि की कि सुवेंदु अधिकारी ने पूजनीय संतों से आशीर्वाद के साथ कुछ समय व्यतीत किया।

पश्चिम बंगाल चुनाव जीतने के बाद से सुवेंदु अधिकारी अपनी विशिष्ट प्रणाम शैली के लिए चर्चा में रहे हैं। यह शैली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साष्टांग प्रणाम विधि से प्रेरित मानी जाती है, और सार्वजनिक मंचों पर अक्सर देखी जाती है।
विधानसभा को किया था दंडवत प्रणाम
13 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद, सुवेंदु अधिकारी जब पहली बार पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे तो उन्होंने सीढ़ियों पर घुटनों के बल बैठकर, सिर झुकाकर पूर्ण दंडवत प्रणाम किया। ये तस्वीरें काफी वायरल हुईं और बंगाल की राजनीति में नई मिसाल के रूप में देखी गईं।
सीएम योगी के पैर छूकर लिया था आर्शीवाद
इससे पहले, अपने शपथ ग्रहण के दिन, सुवेंदु अधिकारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पैर छूकर आशीर्वाद लिया था। यह घटना तब हुई जब चुनाव प्रचार के दौरान, सीएम योगी कांथी विधानसभा में अधिकारी के समर्थन में रैली करने पहुंचे थे। मंच पर आते ही शुभेंदु ने पूरी तरह झुककर उनके चरणों में आशीर्वाद प्राप्त किया था।
वहीं अब बेलूर मठ के संतों को सड़क पर देखते ही सीएम सुवेंदु अधिकारी ने प्रणाम किया। याद रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी बेलूर मठ को हिंदू सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विवेकानंद की विचारधारा से जोड़कर देखती है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी चुनाव के दौरान मठ का दौरा किया था।
Belur Math क्या है और कहां पर स्थित है?
Ramakrishna Math का मुख्यालय, Belur Math पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में हुगली नदी के किनारे स्थित एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है। इसकी स्थापना स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में की थी। यह स्थान केवल एक मठ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और मानव सेवा का प्रतीक माना जाता है।
बेलूर मठ की खासियत क्या है?
- बेलूर मठ की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनोखी वास्तुकला है। इस भवन की बनावट में हिंदू मंदिर, मस्जिद और चर्च - तीनों की स्थापत्य शैली की झलक दिखाई देती है। इसका उद्देश्य सभी धर्मों की एकता और भाईचारे का संदेश देना है।
- स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन का अंतिम समय यहीं बिताया था। उनकी समाधि और उनका कमरा आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
- मठ का मुख्य मंदिर श्री रामकृष्ण परमहंस को समर्पित है। यहां प्रतिदिन पूजा, ध्यान और आरती होती है। मंदिर का शांत वातावरण लोगों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
- बेलूर मठ हुगली नदी के किनारे स्थित है, इसलिए यहाँ का प्राकृतिक वातावरण अत्यंत शांत और सुंदर है। शाम के समय गंगा किनारे होने वाली आरती विशेष रूप से आकर्षक मानी जाती है।
- यह मठ इस विचार पर आधारित है कि सभी धर्म सत्य की ओर ले जाते हैं। यहां किसी भी धर्म के व्यक्ति को आने और ध्यान करने की पूरी स्वतंत्रता है।
- रामकृष्ण मिशन देश-विदेश में विद्यालय, महाविद्यालय, अस्पताल और सेवा संस्थान चलाता है। बेलूर मठ इन सभी सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है।
- यहां आने वाले लोग ध्यान, प्रार्थना और शांत वातावरण के कारण मानसिक शांति का अनुभव करते हैं। यही कारण है कि यह स्थान केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत लोकप्रिय है।













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