Greek Blue-White Houses: क्या है ग्रीस के नीले और सफेद घरों का रहस्य? परंपरा के पीछे छुपा गहरा साइंस समझें

Greek Blue-White Houses: ग्रीस के सायक्लाड्स (Cyclades) द्वीपों पर बने नीले और सफेद रंग के घर पूरी दुनिया में बेहद मशहूर हैं। सोशल मीडिया, ट्रैवल पोस्ट और फिल्मों में अक्सर ये घर दिखाई देते हैं। ज्यादातर लोग मानते हैं कि इन रंगों का संबंध ग्रीक झंडे या एजियन सागर से है। लेकिन असल सच्चाई इससे काफी अलग है। इन घरों का डिजाइन सिर्फ सुंदरता या अच्छे दिखने के लिए नहीं बनाया गया था, बल्कि इसके पीछे साइंस है। आइए जानते हैं क्यों वहां सिर्फ नीले और सफेद रंग से घरों को पोतने का चल है।

कहां से आया सफेद रंग?

दरअसल इन घरों को सफेद रंग से रंगने की शुरुआत एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या के कारण हुई थी। 'एलक्सिस' के मुताबिक, 1930 के दशक के आखिर में ग्रीस हैजा (Cholera) की गंभीर महामारी से जूझ रहा था। साल 1938 में इओनिस मेटाक्सस (Ioannis Metaxas) की सरकार ने आदेश दिया कि लोगों को अपने घरों को चूने से सफेद रंगना ह

Greek Blue-White Houses

उस समय इस्तेमाल होने वाला चूना यानी Lime, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (Calcium Hydroxide) से बना होता था। इसमें ऐसे गुण होते हैं जो बैक्टीरिया और रोगाणुओं को फैलने से रोकते हैं। यही वजह थी कि मिट्टी जैसे पुराने रंगों वाले घर धीरे-धीरे चमकदार सफेद दिखाई देने लगे। यानी आज जो सफेद घर लोगों को खूबसूरत लगते हैं, उनकी शुरुआत असल में बीमारी रोकने के लिए हुई थी।

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सफेद रंग बना प्राकृतिक AC

सिर्फ बीमारी ही नहीं, सफेद रंग का एक और बड़ा फायदा था। ग्रीस के इन द्वीपों में गर्मियों के दौरान तापमान काफी ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में सफेद रंग की दीवारें सूरज की किरणों को वापस परावर्तित यानी Reflect कर देती हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों में भी यह साबित हो चुका है कि सफेद सतहें गर्मी को कम सोखती हैं। इससे घरों की मोटी दीवारें ज्यादा गर्म नहीं होतीं और अंदर का तापमान बाहर की तुलना में ठंडा बना रहता है। आसान शब्दों में कहें तो यह एक तरह का प्राकृतिक एयर कंडीशनिंग सिस्टम था, जो बिना बिजली के घरों को ठंडा रखने में मदद करता था।

तो फिर नीला रंग कहां से आया?

इन घरों में इस्तेमाल होने वाले नीले रंग के पीछे भी कोई बड़ी कलात्मक सोच नहीं थी। असल में नीला रंग इसलिए चुना गया क्योंकि वह सबसे सस्ता विकल्प था। उस समय स्थानीय लोगों के पास 'लूलाकी' (Loulaki) नाम का नीला लॉन्ड्री पाउडर आसानी से उपलब्ध होता था। लोग इसे चूने के साथ मिलाकर सस्ती और चमकदार नीली पेंट तैयार कर लेते थे। यही वजह थी कि दरवाजों, खिड़कियों और छतों पर नीला रंग तेजी से इस्तेमाल होने लगा।

1967 में सरकार ने बना दिया नियम

बाद में यह सिर्फ लोगों की पसंद तक सीमित नहीं रहा। साल 1967 में ग्रीस में सैन्य शासन आया। उस समय सरकार ने आदेश दिया कि द्वीपों पर इमारतों में नीले और सफेद रंग का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। वहां की सरकार चाहती थी कि पूरे इलाके में एक जैसी वास्तुकला दिखाई दे। इसके पीछे उद्देश्य राष्ट्रीय एकता और ग्रीक पहचान को मजबूत करना था। यानी जो रंग पहले स्वास्थ्य और सस्ते विकल्प की वजह से इस्तेमाल हो रहे थे, वे बाद में राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बन गए।

अब कानून से तय होते हैं घरों के रंग

आज के समय में भी सायक्लाड्स द्वीपों पर नीले और सफेद रंगों का इस्तेमाल सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि कानूनी नियम है। 'एलक्सिस' के मुताबिक, ग्रीक सरकार ने बाद में महसूस किया कि यह रंग योजना दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बन चुकी है।

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इसी वजह से सरकार ने इन द्वीपों की सांस्कृतिक विरासत और वास्तुकला को सुरक्षित रखने के लिए सख्त नियम लागू किए। अब वहां नई इमारत बनानी हो या किसी पुराने घर का नवीनीकरण करना हो, लोगों को इन्हीं रंगों का पालन करना पड़ता है। आज ग्रीस के ये Blue-White Houses सिर्फ एक ट्रैवल डेस्टिनेशन नहीं बल्कि दुनिया की सबसे पहचान योग्य वास्तुकला में शामिल हो चुके हैं।

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