आप्रवासन नीति पर President Joe Biden के बड़े फैसले, जिन पर सबकी नजर, भारतीयों के लिए इसमें क्या ?
Joe Biden Immigration Plan: वाशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति बनते ही बुधवार को जो बाइडेन से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादास्पद फैसलों को पलटना शुरू कर दिया है। इन फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण है अमेरिका में बसने वालों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बनाई गई आप्रवसान नीति को पलटना। राष्ट्रपति ऑफिस में पहुंचते ही जो बाइडेन ने आप्रवासन से जुड़े दो एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत किए हैं लेकिन बाइडेन को अभी इसके लिए लंबा रास्ता तय करना है। आइए देखते हैं कि जो बाइडेन आप्रवासन को लेकर अपने पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप से किस तरह अपनाने वाले हैं और क्या है उनका प्लान ?
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पहले ही दिन आप्रवासन से जुड़े बड़े फैसले
ओवल ऑफिस में पहले ही दिन जो दो बड़े फैसले लिए उसमें पहला डिफर्ड एक्शन फॉर चाइल्ड अराइवल प्रोग्राम से जुड़ा है। इसे अगले 4 साल के लिए बढ़ा दिया है। बाइडेन प्रशासन का आप्रवासन नीति को लेकर अभी ये शुरुआत ही है। जल्द ही बाइडेन प्रशासन एक आप्रवसान नीति को लेकर बिल पेश करने वाला है। इस बिल अमेरिका में रह रहे 1.10 करोड़ लोगों को अगले 8 साल में नागरिकता देने की योजना है।
प्रस्तावित बिल में डिफर्ड एक्शन फॉर चाइल्ड अराइवल प्रोग्राम जिसे ड्रीमर्स कहा जाता है के तहत अमेरिका में आने वाले युवा आप्रवासियों को स्थायी सुरक्षा मिलेगी। ड्रीमर्स प्रोग्राम को पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में शुरू किया गया था।
इस प्रोग्राम के तहत DACA कार्ड रखने वालों को तीन साल में ही नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था। इसके साथ ही ऐसे देश जहां पर गृहयुद्ध की स्थिति हो या फिर आपदा से प्रभावित हैं वहां लोगों को जबरन भेजने से सुरक्षा के साथ ही वर्क परमिट देने की भी इस प्रोग्राम में व्यवस्था की है।
बाइडेन जल्द ही डिपार्टममेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी और अटार्नी जनरल को ड्रीमर्स को सुरक्षा देने का प्रावधान करने का आदेश दे सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कार्यकाल में DACA को खत्म करने की कोशिश की थी लेकिन कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है।

यात्रा और वीजा प्रतिबंध
डीएसीए प्रोग्राम के साथ ही बाइडेन ने राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में मुस्लिम देशों पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध को भी खत्म कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पद संभालते ही 2017 में कई मुस्लिम बाहुल्य देशों पर यात्रा और वीजा प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी जिसके बाद ट्रंप प्रशासन ने एक संशोधित प्रतिबंध लगाया था जिसे कोर्ट ने बरकरार रखा था।
इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस के दौरान कई सारे अस्थायी श्रमिकों और ग्रीन कार्ड धारकों के भी अमेरिका में आने पर रोक लगा दी थी। बाइडेन ने इन प्रतिबंधों की आलोचना की थी। हालांकि नये राष्ट्रपति ने अभी ये नहीं बताया है कि वह इनमें कब ढील देने की योजना बना रहे हैं।

H1-B वीजा है सबसे खास
डोनाल्ड ट्रंप के शासन काल में जिस नीति का भारत से सबसे ज्यादा जुड़ाव था वह H1-B वीजा पॉलिसी थी। पिछले साल डोनाल्ड ट्रंप ने एच1-बी वीजा पर रोक लगा दी थी। इस वीजा का इस्तेमाल ज्यादातर टेक कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल करती हैं। भारत से बहुत सारे टेक इंडस्ट्री से जुड़े और आईटी प्रोफेशनल इस वीजा के तहत काम करने अमेरिका पहुंचते रहे हैं। ट्रंप ने इसे अमेरिकी लोगों की नौकरी पर खतरा बताते हुए रोक लगा दी थी और इसमें बदलाव करने की बात कही थी। ट्रंप प्रशासन ने कार्यकाल के आखिरी दिनों में एक बदलाव को मंजूरी दी थी जिसे अगले 60 दिनों में लागू किया जाना है।
इसके तहत H-1B वीजा में कम्प्यूटरीकृत लॉटरी सिस्टम को समाप्त कर इसकी जगह वेतन आधारित चयन प्रक्रिया लागू कर दी थी। नए नियमों के मुताबिक अब एच1 बी वीजा में उन्हें वरीयता दी जाएगी जिनका अपने पेशे के अनुसार वेतन ज्यादा होगा। इसके लिए वेतन के चार स्तर बनाए गए हैं। कम्पनियों को विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करते समय सबसे पहले लेवल-4 (जो कि सबसे ज्यादा सेलरी वाले हैं) के अंदर आने वालों का चयन करना होगा। इसके बाद कम्पनी को लेवल-3 और फिर नीचे के क्रम में जाना होगा जब तक कि 85000 एच1 बी वीजा की सीमा पूरी नहीं हो जाती।

टेक कंपनियों ने कांग्रेस को लिखा पत्र
एच1-बी वीजा पर टेक कंपनियों ने भी आपत्ति जताई थी। जो बाइडेन ने भी ट्रंप की वीजा पॉलिसी को भेदभाव पूर्ण बताया था ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि वह इसे पलटने की पहल कब करेंगे।
अमेरिका के टेक्नॉलॉजी ट्रेड ग्रुप टेकनेट ने कांग्रेस को लिखे एक पत्र में बाइडेन की आप्रवासन नीति को शीघ्र मंजूरी दिए जाने की बात कही है। टेकनेट में अमेजन, गूगल, ट्विटर जैसे बड़े समूह शामिल है। समूह कांग्रेस को लिखे पत्र में कहा है 'हम एक आधुनिक, मानवीय और प्रभावी इमिग्रेशन सिस्टम बना सकते हैं जो अमेरिका के ऐसे देश होने के वादे पर खरा उतरता है जिसमें पूरी दुनिया से लोग काम करने और अपने व अपने परिवार के साथ ही एक बेहतर समाज का निर्माण करने आ सकते हैं।'
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