Death Experience: ‘3 बार मर कर जिंदा हुई हूं'...NASA साइंटिस्ट ने बताया कब, कैसे और कहां महसूस की मौत?
Death Experience: कुछ पर्सनल एक्सपीरियंस इंटरनेट पर अचानक सुर्खियां बन जाते हैं, खासकर तब जब उनका संबंध साइंस, चेतना और मौत जैसे बड़े सवालों से हो। ऐसा ही मामला NASA और अमेरिकी नेवी से जुड़ी पूर्व वैज्ञानिक इंग्रिड होनकाला (Ingrid Honkala) का है। इंग्रिड ने अपने जीवन में तीन बार Near-Death Experience यानी मौत के बेहद करीब पहुंचने का अनुभव होने का दावा किया है। इंग्रिड का दावा है कि उन्होंने एक नहीं बल्कि तीन-तीन बार मौत का एक्सपीरियंस लिया है। उनका कहना है कि इन घटनाओं ने जीवन, चेतना और मृत्यु को देखने का उनका नजरिया पूरी तरह बदल दिया।
2 साल की उम्र में पानी की टंकी में गिरीं
New York Post की Jam Press के हवाले से छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्रिड होनकाला का पहला Near-Death Experience तब हुआ जब वह सिर्फ 2 साल की थीं। बताया गया कि वह ठंडे पानी से भरी एक टंकी में गिर गई थीं। उस समय उन्हें शुरुआत में काफी डर और घबराहट महसूस हुई थी। उनका शरीर संघर्ष कर रहा था और स्थिति बेहद खतरनाक थी।

'डर खत्म हुआ और अचानक गहरी शांति महसूस हुई'
इंग्रिड का दावा है कि कुछ ही समय बाद उनका अनुभव पूरी तरह बदल गया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगा जैसे वह किसी ऐसी वास्तविकता में प्रवेश कर गई हों, जो इंसानी शरीर और पांच इंद्रियों से परे हो। उनके मुताबिक, अचानक डर खत्म हो गया और उसकी जगह बेहद गहरी शांति और स्थिरता ने ले ली। उन्होंने कहा कि वह अनुभव किसी सपने जैसा नहीं बल्कि बेहद वास्तविक महसूस हो रहा था।
शरीर से अलग होने जैसा महसूस हुआ
इंग्रिड होनकाला ने अपने अनुभव को "Out of Body Experience" भी बताया। उनके शब्दों में, "ऐसा लगा जैसे मेरी चेतना मेरे शरीर से अलग हो गई हो।" उन्होंने दावा किया कि वह खुद को "शुद्ध चेतना, जागरूकता और प्रकाश" के रूप में महसूस कर रही थीं। उनका कहना है कि उस दौरान वह आसपास हो रही चीजों को समझ पा रही थीं और अपनी मां को पहचान भी पाईं, जिन्होंने बाद में उन्हें बचाया और होश में लाया।
25 और 52 साल की उम्र में फिर हुए ऐसे अनुभव
इंग्रिड के अनुसार, उनके जीवन में सिर्फ एक बार नहीं बल्कि कुल तीन बार ऐसा हुआ। दूसरा अनुभव उन्हें 25 साल की उम्र में मोटरसाइकिल दुर्घटना के बाद हुआ। वहीं तीसरी बार 52 साल की उम्र में एक मेडिकल इमरजेंसी के दौरान उन्हें फिर वैसा ही एहसास हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों घटनाओं में भी उन्हें वही शांति, जागरूकता और शरीर से परे होने का अनुभव महसूस हुआ।
रहस्यमयी अनुभवों के बाद भी नहीं छोड़ा साइंस का साथ
इन गहरे और रहस्यमयी अनुभवों के बावजूद इंग्रिड होनकाला ने साइंस का रास्ता नहीं छोड़ा। उन्होंने समुद्री साइंस (Marine Science) में PhD की और वैज्ञानिक क्षेत्र में अपना करियर बनाया। उनका कहना है कि इन घटनाओं ने उन्हें साइंस से दूर नहीं किया, बल्कि उनकी जिज्ञासा और ज्यादा बढ़ा दी।
'साइंस और आध्यात्मिकता दुश्मन नहीं हैं'
इंग्रिड का मानना है कि साइंस और आध्यात्मिकता को हमेशा एक-दूसरे के विरोधी रूप में नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा, "संभव है कि साइंस और आध्यात्मिकता दोनों एक ही रहस्य को अलग-अलग नजरियों से समझने की कोशिश कर रहे हों।" उनके मुताबिक, चेतना और जीवन को लेकर अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जिसे इंसान पूरी तरह नहीं समझ पाया है।
इन अनुभवों ने बदल दी जीवन को देखने की सोच
इंग्रिड होनकाला ने बताया कि इन Near-Death Experiences के बाद उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। पहले वह खुद को एक अलग इंसान के रूप में देखती थीं, लेकिन अब उन्हें लगता है कि सभी लोग किसी बड़ी चेतना का हिस्सा हो सकते हैं। उनके अनुसार, इंसान शायद सिर्फ शरीर नहीं बल्कि चेतना की अभिव्यक्ति हैं।
मौत को अब अंत नहीं मानतीं इंग्रिड
इन घटनाओं के बाद इंग्रिड का मृत्यु को देखने का नजरिया भी बदल गया। उन्होंने कहा कि अब उन्हें मौत "अंत" जैसी नहीं लगती। उनके मुताबिक, यह सिर्फ चेतना के एक रूप से दूसरे रूप में जाने जैसा बदलाव या ट्रांजिशन हो सकता है।
साइंस किसे मानता है Near Death Experiences?
यह लेख इंग्रिड होनकाला द्वारा किए गए दावों और उनके व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। वैज्ञानिकों में Near-Death Experiences को लेकर अलग-अलग राय मौजूद हैं।
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