BSF की 'शेरनियां' फतह करेंगी 'डेथ जोन'! Everest में लहराएगा तिरंगा, ‘Vande Mataram’ से गूंजेगा हिंदुस्तान
BSF All-Woman Everest Team: विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) पर कल यानी 21 मई की सुबह बीएसएफ की पहली ऑल-वुमन टीम 'मिशन वंदे मातरम' के तहत शिखर पर चढ़ाई का अंतिम प्रयास करेगी। दक्षिण कोल (South Col) पर पहुंच चुकी यह टीम शिखर पर पहुंचकर 'वंदे मातरम' का उद्घोष कर भारत की मातृभूमि को समर्पित करेगी। यह अभियान महज एक पर्वतारोहण अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद, महिला सशक्तिकरण और सीमा सुरक्षा बल की 60 वर्षीय विरासत का प्रतीक है।

हीरक जयंती और वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ
सीमा सुरक्षा बल (BSF) की स्थापना 1 दिसंबर 1965 में हुई थी। वर्ष 2025-26 में बल अपनी हीरक जयंती (Diamond Jubilee) मना रहा है। इसी उपलक्ष्य में और राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ (1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित) के अवसर पर 'मिशन वंदे मातरम' शुरू किया गया।
इस मिशन के तहत बीएसएफ की महिला टीम एवरेस्ट और पुरुष टीम ल्होत्से (8,516 मीटर) पर चढ़ाई कर रही है। 6 अप्रैल 2026 को डीजी बीएसएफ प्रवीण कुमार, आईपीएस द्वारा दिल्ली से झंडी दिखाकर रवाना की गई इस टीम ने अब तक की चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी कर ली है।
टीम में शामिल चार महिला पर्वतारोही:
- एम/सीटी कौसर फातिमा : लद्दाख
- एम/सीटी मुनमुन घोष : पश्चिम बंगाल
- एम/सीटी रबेका सिंह : उत्तराखंड
- एम/सीटी त्सेरिंग चोरोल : लद्दाख/कारगिल
ये चारों साधारण परिवारों से आईं, लेकिन असाधारण साहस और अनुशासन वाली जवान हैं। देश के विभिन्न कोनों का प्रतिनिधित्व करती यह टीम 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' और 'नारी शक्ति वंदन' का जीवंत उदाहरण है।
यात्रा का सफर: अनुकूलन से दक्षिण कोल तक
टीम ने नेपाल के खुम्बु ग्लेशियर क्षेत्र में आधार शिविर से शुरूआत की। अप्रैल-मई में उन्होंने क्रमिक अनुकूलन (Acclimatization) चरण पूरे किए, कैंप 1, कैंप 2, कैंप 3 तक की चढ़ाई की और वापसी भी की। वर्तमान में टीम साउथ कोल (7,900 मीटर) पर स्थित है, जहां से अंतिम शिखर अभियान शुरू होगा।
21 मई की सुबह अनुकूल मौसम की उम्मीद में शिखर चढ़ाई का प्रयास होगा। एवरेस्ट की दक्षिण-पूर्वी रिज (South East Ridge) मार्ग से चढ़ाई की जाएगी, जो सबसे सामान्य लेकिन फिर भी बेहद खतरनाक रूट है।
एवरेस्ट चढ़ाई की चुनौतियां: मौत का दरवाजा
माउंट एवरेस्ट को 'डेथ जोन' कहा जाता है। 8,000 मीटर से ऊपर ऑक्सीजन बेहद कम होती है, तापमान माइनस 30-40 डिग्री तक गिर जाता है, तेज हवाएं और हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) जानलेवा साबित हो सकते हैं।
- खतरे: हिमस्खलन, दरारें, थकान, फ्रॉस्टबाइट, Altitude Sickness।
- सफलता दर: हर साल सैकड़ों लोग प्रयास करते हैं, लेकिन कई असफल रहते हैं या जान गंवा देते हैं।
- महिलाओं की भूमिका: विश्व में पहली महिला एवरेस्त विजेता जापान की जुंको ताबेई (1975) थीं। भारत में बचेंद्री पाल (1984) ने यह गौरव हासिल किया। अब बीएसएफ की यह टीम केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की पहली ऑल-वुमन एवरेस्ट टीम बनकर इतिहास रचने जा रही है।
प्रतीकात्मक महत्व: सिर्फ चोटी नहीं, संदेश
शिखर पर पहुंचकर ये जवान 'वंदे मातरम' का उच्चारण करेंगी और भारतीय तिरंगा फहराएंगी। यह क्षण:
- महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बनेगा।
- सीमा पर तैनात महिला जवानों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करेगा।
- देश के युवाओं को साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देगा।
- 'आत्मनिर्भर भारत' और 'नारी शक्ति' की सरकारी दृष्टि को मजबूती प्रदान करेगा।
बीएसएफ न सिर्फ सीमाओं की रक्षा करता है, बल्कि खेल, साहसिक गतिविधियों और आपदा राहत में भी अग्रणी रहा है। इस अभियान से बल की 'ऑपरेशनल एक्सीलेंस' और 'सॉफ्ट पावर' दोनों सामने आ रही हैं।
भारत की पर्वतारोहण विरासत
भारत ने हाल के वर्षों में कई महिलाओं को एवरेस्ट पर भेजा है। सेना, आईटीबीपी, बीएसएफ जैसी फोर्सेस नियमित रूप से ऐसे अभियान चलाती हैं। ये न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि हैं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव भी।
'मिशन वंदे मातरम' 2025-26 के पूरे वर्ष चलने वाले उत्सव का हिस्सा है, जिसमें स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर सामूहिक गान कार्यक्रम हो रहे हैं।
क्या कहती हैं टीम की सदस्यें?
टीम सदस्यों ने पहले दिए बयानों में कहा है कि यह चढ़ाई सिर्फ व्यक्तिगत सपना नहीं, बल्कि बीएसएफ परिवार, देश की बेटियों और उन सभी महिलाओं के लिए है जो चुनौतियों का सामना कर आगे बढ़ रही हैं। लद्दाख और उत्तराखंड की ठंडी वादियों से आई इन जवानों के लिए एवरेस्ट भी सीमा की तरह ही एक चुनौती है, जिसे पार करना उनका कर्तव्य है।
आगे की राह और प्रेरणा
चाहे कल का मौसम अनुकूल रहे या चुनौतियां आएं, यह प्रयास पहले ही सफलता हासिल कर चुका है। क्योंकि यह साहस की कहानी है, जो लाखों युवा लड़कियों को प्रेरित करेगी कि कोई भी ऊंचाई असंभव नहीं जब इरादे मजबूत हों।
21 मई 2026, यह तारीख बीएसएफ की हीरक जयंती में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगी। अगर टीम सफल हुई तो न सिर्फ एवरेस्ट शिखर, बल्कि 'नारी शक्ति' की नई ऊंचाई हासिल हो जाएगी।
वंदे मातरम- मां तुझे सलाम।













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