Prateek Yadav Death: मुलायम सिंह यादव के वारिस क्यों नहीं बने प्रतीक? अखिलेश को ही क्यों मिले सारे अधिकार?

Prateek Yadav Death: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के बेटे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का 13 मई की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई। वे अपने घर की किचन में अचेत अवस्था में पाए गए थे जहां से उन्हें लखनऊ सिविल अस्पताल ले जाया गया और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। खबर बाहर आते ही पूरे लखनऊ में सनसनी फैल गई कि कैसे 38 साल के प्रतीक जो फिटनेस फ्रीक थे उनकी अचानक मौत हो गई। इसी बीच ये सवाल कई लोगों के मन में आ रहा है कि क्या प्रतीक यादव को भी वही सब अधिकार मिले हुए हैं जो कि अखिलेश यादव के पास हैं? क्या प्रतीक, मुलायम सिंह यादव के बायोलॉजिकल बेटे हैं? जानेंगे ऐसे सभी सवालों के जवाब

2016 के विवाद में बाहर आई थी सच्चाई

साल 2016 में जब समाजवादी पार्टी में कलह चल रही थी तब न्यूज वेबसाइट 'इंडिया संवाद' ने सीबीआई की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया था कि प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव के जैविक बेटे (Biological Son) नहीं हैं। सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतीक के बायोलॉजिकल पिता चंद्रप्रकाश गुप्ता हैं, जो उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद के रहने वाले हैं।

Prateek Yadav Death

तो फिर प्रतीक कैसे बने मुलायम सिंह के बेटे?

प्रतीक की मां साधना गुप्ता का विवाह फर्रुखाबाद के चंद्रप्रकाश गुप्ता से 4 जुलाई 1986 को हुआ था। जिसके बाद 1988 में प्रतीक का जन्म हुआ और उसके दो साल बाद यानी 1990 में साधना और चंद्रप्रकाश अलग हो गए। इसी के बाद साधना, मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आईं। मुलायम ने अपने रिश्तों के चलते साधना गुप्ता को सार्वजनिक रूप से अपनाकर पत्नी का दर्जा दिया और प्रतीक को भी बेटे के रूप में अपनाया था। हालांकि प्रतीक पर सौतेले बेटे का टैग ताउम्र लगा रहा।

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प्रतीक के स्कूली कागजों में मुलायम सिंह का पता

मुलायम सिंह यादव की संपत्ति जानने के लिए लगाई गई एक अर्जी के माध्यम से यह खुलासा हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, जिसने पड़ताल के दौरान प्रतीक के स्कूल रिकॉर्ड्स खंगाले। 1994 के स्कूली दस्तावेजों में उनका पता मुलायम के सरकारी आवास का था और मां के नाम के कॉलम में साधना का नाम दर्ज था। इससे स्पष्ट हुआ कि 1994 तक साधना और मुलायम औपचारिक रूप से रिश्ते में आ चुके थे। हालांकि तब तक अखिलेश यादव की मां मालती यादव का निधन नहीं हुआ था।

अखिलेश की मां के निधन के बाद साधना गुप्ता

2003 से पहले साधना गुप्ता को कम ही लोग जानते थे। यह तब की बात है जब मुलायम सिंह की पहली पत्नी और अखिलेश यादव की मां, मालती यादव का निधन हुआ। इसी साल, साधना को मुलायम की पत्नी का आधिकारिक दर्जा प्राप्त हुआ। ऐसे में, अखिलेश यादव को ही मुलायम का एकमात्र बायोलॉजिकल नॉमिनी माना जाता है। और, इसी आधार पर मुलायम सिंह की ज्यादातर संपत्ति पर अखिलेश यादव का ही अधिकार रहा।

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आगे क्या?

हालांकि खुद प्रतीक भी सैफई और इटावा कम ही गए हैं। चूंकि प्रतीक का अब निधन हो चुका है और ऐसे में अगर प्रतीक यादव की पत्नी और उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष व बीजेपी नेता अपर्णा यादव कोर्ट का रुख करती हैं तो शायद इस मामले में कुछ बदल सकता है।

इस मामले पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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