गाजियाबाद में खत्म हुई 'रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो' पदयात्रा, पश्चिमी यूपी में बदलाव की नई बहस शुरू

मेरठ की पावन धरती से 16 मई 2026 को शुरू हुई "रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो" पदयात्रा का समापन बुधवार को गाजियाबाद के अंबेडकर पार्क में भारी जनसमर्थन के बीच हुआ। पांच दिनों तक चली इस यात्रा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। युवाओं, किसानों, कर्मचारियों और आम जनता की बड़ी भागीदारी ने यह संकेत दिया कि अब प्रदेश की जनता सिर्फ वादों और नारों से संतुष्ट नहीं है, बल्कि रोजगार, शिक्षा, सम्मान और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सीधा जवाब चाहती है।

जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरी राजनीति

इस पदयात्रा के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों पर जनता का गुस्सा और उम्मीद दोनों साफ दिखाई दिए। युवाओं के हाथों में डिग्रियां थीं, लेकिन रोजगार नहीं। किसानों के चेहरों पर मेहनत थी, लेकिन सम्मान और उचित लाभ की कमी साफ झलक रही थी। शिक्षामित्र, आशा बहनें, कर्मचारी, छोटे व्यापारी और गरीब परिवार एक ही सवाल पूछते नजर आए कि आखिर आम आदमी कब तक संघर्ष करता रहेगा और सरकारें केवल आश्वासन देती रहेंगी।

aam aadmi party

संजय सिंह हर कदम पर जनता के बीच दिखे

पदयात्रा की सबसे खास बात यह रही कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी Sanjay Singh लगातार जनता के बीच सक्रिय दिखाई दिए। गांव-गांव और गली-गली जाकर उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज संसद से लेकर सड़क तक उठाई जाएगी।

यात्रा के दौरान न तो सत्ता का अहंकार दिखाई दिया और न ही राजनीतिक दिखावा। यही वजह रही कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोगों ने उनका जगह-जगह जोरदार स्वागत किया। इससे साफ संकेत मिला कि जनता अब उन नेताओं को पसंद कर रही है जो सिर्फ चुनावी मंचों तक सीमित न रहकर लोगों के बीच संघर्ष करते दिखाई दें।

युवाओं की सबसे बुलंद आवाज बनी पदयात्रा

पूरी यात्रा में सबसे ज्यादा ऊर्जा युवाओं की दिखाई दी। हर जगह एक ही मांग सुनाई दी-रोजगार चाहिए, सामाजिक न्याय चाहिए, पेपर लीक बंद होने चाहिए और भर्ती घोटालों का हिसाब चाहिए।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने बताया कि वर्षों की मेहनत के बावजूद पेपर लीक और भ्रष्टाचार ने उनके सपनों को तोड़ दिया। हालांकि उनके अंदर निराशा जरूर है, लेकिन संघर्ष की भावना अभी भी कायम है। यही कारण रहा कि बड़ी संख्या में युवा इस यात्रा से जुड़े और उन्होंने इसे अपने भविष्य की लड़ाई बताया।

दिल्ली-पंजाब मॉडल की भी हुई चर्चा

पदयात्रा के दौरान आम आदमी पार्टी द्वारा दिल्ली और पंजाब में किए गए कार्यों की चर्चा भी लगातार होती रही। लोगों के बीच सरकारी स्कूलों में सुधार, मुफ्त इलाज, बिजली-पानी में राहत और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

जनता का कहना था कि यदि अन्य राज्यों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में सुधार संभव है तो उत्तर प्रदेश में भी ऐसा मॉडल लागू किया जा सकता है। इससे साफ हुआ कि अब मतदाता केवल बड़े राजनीतिक नारों से प्रभावित नहीं हो रहा, बल्कि जमीन पर दिखने वाले कामों की तुलना कर रहा है।

2027 चुनाव में बदल सकते हैं राजनीतिक मुद्दे

इस पदयात्रा ने यह संकेत भी दिया कि 2027 का विधानसभा चुनाव केवल राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला नहीं रहेगा, बल्कि यह युवाओं के भविष्य, किसानों के सम्मान, महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर केंद्रित हो सकता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिस तरह जनता ने भागीदारी दिखाई, उससे यह भी स्पष्ट हुआ कि लोग अब जाति और धर्म की राजनीति से आगे बढ़कर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन जैसे मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं।

गाजियाबाद में समापन, लेकिन संदेश पूरे प्रदेश के लिए

गाजियाबाद के अंबेडकर पार्क में पदयात्रा का समापन जरूर हो गया, लेकिन इस यात्रा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में बदलाव की नई चर्चा शुरू कर दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता ने साफ संदेश दिया है कि अब राजनीति केवल भाषणों और वादों से नहीं चलेगी। जनता अब ऐसे नेतृत्व की तलाश में है जो उनके दर्द को समझे, संघर्ष में साथ खड़ा रहे और जमीन पर काम करके दिखाए।

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