चीन परीक्षा प्रणाली: NEET लीक के बाद भारत को क्या करना चाहिए?
भारत में NEET पेपर लीक ने लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका दिया है। ऐसे में चीन की सख्त परीक्षा प्रणाली एक मिसाल पेश करती है। जानें कैसे चीन गाओकाओ जैसी सबसे कठिन परीक्षाओं को भी लीक-प्रूफ बनाता है, जहां प्रश्न पत्र बनाना एक 'टॉप सीक्रेट मिशन' होता है। क्या भारत इस मॉडल से सीख सकता है?
China Exam System: भारत में मेडिकल एज्युकेशन का एंट्री गेट मानी जाने वाली NEET परीक्षा का प्रश्न पत्र एक बार फिर लीक हो गया है। 5 मई, 2024 को आयोजित हुई इस परीक्षा में 22.7 लाख छात्रों ने भाग लिया था, और अब उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। इस घटना से छात्र बेहद गुस्से में और निराश हैं। शिकायतों के बाद, National Test Agency (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी और इसे दोबारा आयोजित करने की घोषणा की है। इस व्यापक पेपर लीक ने NTA के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि हमारा पड़ोसी चीन कैसे इस परीक्षा को बिना लीक के कैसे करा लेता है।
किस आधार पर चीन में बनता है परीक्षा का सिस्टम?
चीन को दुनिया में ऐसी परीक्षाओं का जन्मदाता माना जाता है, जहां पुराना 'के-जू' सिस्टम दुनिया की सबसे पुरानी योग्यता-आधारित सिविल सर्विस सिलेक्श प्रोसेस था। इसमें आम लोगों को कन्फ्यूशियस शिक्षाओं पर आधारित परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी पदों के लिए चुना जाता था।

दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल है Gaokao
आज के दौर में भी चीन की प्रतियोगी परीक्षाएं दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती हैं। इनमें "गाओकाओ (Gaokao)" यानी National College Entrance Examination और "गुओकाओ (Guokao)" यानी Civil Service Exam सबसे प्रमुख हैं। खासकर Gaokao को लेकर चीन में अलग ही माहौल देखने को मिलता है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं और इसे उनके भविष्य का सबसे बड़ा फैसला माना जाता है। चीन का मानना है कि अगर परीक्षा निष्पक्ष नहीं होगी तो पूरे सिस्टम पर लोगों का भरोसा टूट जाएगा।
पेपर लीक सिर्फ अपराध नहीं बल्कि...
चीन अपनी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को बेहद गंभीरता से लेता है। वहां पेपर लीक को सिर्फ अपराध नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला माना जाता है। यही कारण है कि प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा खत्म होने तक अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है। चीन का पूरा सिस्टम इस तरह बनाया गया है कि किसी भी छात्र को अनुचित फायदा न मिले और परीक्षा पूरी तरह ट्रांसपेरेंट बना रहे।
'टॉप सीक्रेट मिशन' होता है प्रश्न पत्र बनाना
चीन की सरकारी मीडिया CCTV के मुताबिक, गाओकाओ का प्रश्न पत्र तैयार करना किसी सैन्य ऑपरेशन से कम नहीं होता। परीक्षा से करीब तीन महीने पहले स्कूलों और यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ शिक्षकों का चयन किया जाता है। इसके बाद उन्हें बीजिंग के दूरदराज सैन्य शिविरों या जेल जैसे हाई सिक्योरिटी इलाकों में भेजा जाता है। वहां उन्हें पूरी गोपनीयता बनाए रखने की ट्रेनिंग दी जाती है। सिंपल भाषा में यह कह सकते हैं कि चीन में प्रश्न पत्र बनाने में बजट बनाने जैसी गोपनीयता बरती जाती है।
24 घंटे सर्विलांस पर रहते हैं शिक्षक
प्रश्न पत्र तैयार करने वाले शिक्षकों को पूरी तरह निगरानी में रखा जाता है। उन्हें इंटरनेट इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती। वे केवल लैंडलाइन फोन के जरिए अपने परिवार से बात कर सकते हैं। जब तक परीक्षा पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें इन गुप्त स्थानों से बाहर जाने की इजाजत नहीं होती। यानी पेपर तैयार करने वाले लोग पूरी तरह बाहरी दुनिया से कटे रहते हैं।
जेलों के अंदर छपते हैं करोड़ों प्रश्न पत्र
पेपर तैयार होने के बाद उसकी लाखों कॉपियां छापी जाती हैं। South China Morning Post की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के Gaokao में करीब 1.3 करोड़ छात्रों ने हिस्सा लिया था। इतने बड़े स्तर पर पेपर प्रिंट करने का काम जेलों के अंदर बने हाई सिक्योरिटी प्रिंटिंग प्रेस में किया जाता है। इस प्रक्रिया की निगरानी चीन का शिक्षा मंत्रालय और National State Secrets Protection Administration मिलकर करते हैं।
हर प्रिंटिंग प्रेस में होती है मल्टी लेयर सिक्योरिटी
जहां प्रश्न पत्र छपते हैं वहां 24 घंटे कैमरे और सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। प्रिंटिंग स्टाफ को भी अलग परिसर में रखा जाता है और उन पर लगातार नजर रखी जाती है ताकि किसी भी तरह की जानकारी बाहर न जा सके। चीन पेपर लीक की संभावना को लगभग खत्म करने की कोशिश करता है।
बख्तरबंद सुरक्षा में भेजे जाते हैं प्रश्न पत्र
प्रिंटिंग के बाद प्रश्न पत्रों को देशभर में भेजने के लिए बेहद हाई सिक्योरिटी का इस्तेमाल किया जाता है। इनकी सुरक्षा बैंक कैश वैन से भी ज्यादा कड़ी होती है। प्रश्न पत्र विशेष वाहनों में ले जाए जाते हैं जिनमें सैटेलाइट नेविगेशन और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम लगे होते हैं। इन वाहनों में पुलिस, सेना और परीक्षा एजेंसी के अधिकारी मौजूद रहते हैं।
स्टील वाले स्ट्रॉन्ग रूम में रखे जाते हैं पेपर
परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले प्रश्न पत्र विशेष सुरक्षित गोदामों में रखे जाते हैं जहां 24 घंटे निगरानी होती है। परीक्षा केंद्रों पर भी इन्हें स्टील-प्रबलित यानी steel reinforced कमरों में रखा जाता है, इन्हें आप स्ट्रॉन्ग रूम भी कह सकते हैं। इन कमरों में अलार्म और मोशन सेंसर लगे होते हैं जो सीधे पुलिस सिस्टम से जुड़े रहते हैं। अगर कोई संदिग्ध गतिविधि होती है तो तुरंत अलर्ट चला जाता है।
पेपर के साथ रहती है स्पेशल सिक्योरिटी टीम
चीन में एक विशेष सुरक्षा टीम प्रश्न पत्रों के साथ ही रहती है। यही टीम उन्हीं कमरों में खाती-पीती और सोती है ताकि पेपर पूरी तरह सुरक्षित रहे। परीक्षा खत्म होने तक यही टीम सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है।
परीक्षा के दौरान बंद हो जाते हैं AI टूल्स
चीन सिर्फ फिजिकल सिक्योरिटी पर ही निर्भर नहीं रहता। The Guardian की रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा के दौरान बड़ी टेक कंपनियां अपने AI फीचर्स तक बंद कर देती हैं। अगर कोई छात्र ByteDance के AI टूल से सवाल पूछने की कोशिश करता है, तो उसे मैसेज मिलता है कि "कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम के दौरान यह सेवा अस्थायी रूप से बंद है।"
DeepSeek और दूसरे AI ऐप्स भी हो जाते हैं बंद
2025 में चीन में लॉन्च हुए लोकप्रिय AI टूल DeepSeek ने भी परीक्षा के समय अपनी सेवाएं कुछ घंटों के लिए रोक दी थीं। Tencent के Yuanbao, Alibaba के QuicKen और Moonshot के Kimi जैसे ऐप्स ने भी अपने इमेज रिकग्निशन फीचर बंद कर दिए थे ताकि कोई छात्र फोटो खींचकर उत्तर न खोज सके।
AI से पकड़े जाते हैं संदिग्ध छात्र
चीन के कई प्रांत परीक्षा के दौरान AI आधारित निगरानी सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। ये सिस्टम छात्रों के "असामान्य व्यवहार" जैसे बार-बार इधर-उधर देखना, फुसफुसाना या आंखों से संकेत देना तक पकड़ लेते हैं। Jiangxi प्रांत में परीक्षा खत्म होने के बाद CCTV फुटेज की समीक्षा की जाती है और किसी भी गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई की जाती है।
बायोमेट्रिक चेक से लेकर सिग्नल ब्लॉकर तक इस्तेमाल
इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक पहचान, डिजिटल डिवाइस स्कैनिंग और रेडियो सिग्नल ब्लॉकर जैसे हाई-टेक इंतजाम भी किए जाते हैं। यानी मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के जरिए नकल की संभावना लगभग खत्म कर दी जाती है।
परीक्षा के लिए बदल जाता है पूरा शहर
चीन में Gaokao परीक्षा को इतना गंभीर माना जाता है कि कई शहरों में सार्वजनिक कार्यक्रम तक रोक दिए जाते हैं। छात्रों को समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचाने के लिए विशेष ट्रैफिक लेन बनाई जाती हैं। इससे साफ पता चलता है कि चीन में परीक्षा की निष्पक्षता सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
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