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India US Trade Deal का फ्रेमवर्क जारी, भारत में ये 10 अमेरिकी सामान मिलेंगे बेहद सस्ते, देखें पूरी लिस्ट

India US Trade Deal Framework 2026: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर चल रही खींचतान अब दोस्ती में बदलती दिख रही है। दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) का खाका (फ्रेमवर्क) जारी कर दिया है, जो भविष्य में होने वाली एक बहुत बड़ी ट्रेड डील की पहली सीढ़ी है।

इस नए मोड़ के साथ ही अब यह साफ हो गया है कि दोनों देश एक-दूसरे के सामान पर टैक्स (टैरिफ) कम करने के लिए राजी हो गए हैं। फरवरी 2025 में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस 'Bilateral Trade Agreement' की नींव रखी थी, यह समझौता उसी को हकीकत में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस डील के जरिए न केवल सामानों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक तनाव पर भी विराम लगेगा।

India US Trade Deal Framework

अमेरिकी खेती के सामान पर कम टैक्स

भारत ने अमेरिका से आने वाली कई चीजों पर टैक्स कम करने या हटाने का फैसला किया है। इसमें पशुओं का चारा, सोयाबीन तेल, बादाम-अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स, ताजे फल और शराब (वाइन-स्पिरिट्स) शामिल हैं। इससे भारतीय बाजार में ये अमेरिकी चीजें सस्ती मिल सकेंगी और अमेरिकी किसानों को फायदा होगा।

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भारतीय कपड़ों और जूतों पर 18% टैरिफ

अमेरिका ने एक आदेश के जरिए भारत से आने वाले कुछ सामानों पर 18% का टैक्स लगाने की बात कही है। इसमें कपड़े, रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़े के जूते, प्लास्टिक, रबर और कुछ रसायनों (केमिकल्स) को रखा गया है। यह फैसला व्यापार की नई शर्तों के हिसाब से लिया गया है।

दवाइयों और गहनों को मिलेगी छूट

भारतीय व्यापार के लिए एक अच्छी खबर यह है कि समझौता पूरा होने पर अमेरिका भारत की जेनेरिक दवाइयों, हीरे और आभूषणों पर से एक्स्ट्रा टैक्स हटा लेगा। साथ ही विमानों के पुर्जों पर जो टैक्स सुरक्षा कारणों से लगाए गए थे, उन्हें भी खत्म करने पर विचार होगा।

गाड़ियों के कलपुर्जों का कोटा

भारत को अपनी गाड़ियों के पार्ट्स अमेरिका भेजने के लिए एक विशेष कोटा (TRQ) मिलेगा। यानी एक तय सीमा तक भारत कम टैक्स देकर ये पार्ट्स अमेरिका भेज सकेगा। बदले में भारत भी अमेरिकी विमानों और उनसे जुड़ी तकनीकों को बेहतर बाजार देगा।

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India US Bilateral Trade Agreement : कागजी रुकावटों को करेंगे खत्म

दोनों देश व्यापार के बीच आने वाली फालतू की कागजी और तकनीकी रुकावटों (Non-Tariff Barriers) को कम करेंगे। भारत ने अमेरिकी मेडिकल मशीनों और कंप्यूटर से जुड़े सामानों (ICT) के लिए लाइसेंस प्रक्रिया आसान करने का वादा किया है, ताकि अमेरिका से ये चीजें बिना किसी देरी के भारत आ सकें।

India America Trade deal hindi: 500 अरब डॉलर की खरीदारी का लक्ष्य

भारत ने तय किया है कि अगले 5 सालों में वह अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा। इसमें पेट्रोल-गैस (एनर्जी), हवाई जहाज के पार्ट्स, कीमती धातुएं और कोयला जैसी चीजें शामिल हैं। यह कदम दोनों देशों के व्यापारिक संतुलन को बेहतर बनाने के लिए है।

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हाई-टेक मशीनों पर जोर

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भारत और अमेरिका मिलकर तकनीकी सामानों का व्यापार बढ़ाएंगे। इसमें डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) जैसी आधुनिक तकनीक शामिल हैं। दोनों देश मिलकर नई टेक्नोलॉजी पर काम करने के लिए भी राजी हुए हैं।

India US Trade Tariff: बराबरी का रहेगा समझौता

समझौते में साफ कहा गया है कि यह बराबरी का सौदा होगा। अगर एक देश टैक्स में कोई बदलाव करता है, तो दूसरा देश भी अपनी शर्तों को बदल सकेगा। साथ ही, दोनों देश मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि इस डील का फायदा सिर्फ भारत और अमेरिका को ही मिले, किसी तीसरे देश को नहीं।

'विकसित भारत' की ओर एक ऐतिहासिक छलांग-PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे (Framework) की घोषणा को दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक और सुखद समाचार बताया है। उन्होंने इस दिशा में राष्ट्रपति ट्रंप के व्यक्तिगत प्रयासों और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। पीएम मोदी के अनुसार, यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते गहरे विश्वास और हमारी साझेदारी की गतिशीलता का प्रमाण है।

यह नया ढांचा सीधे तौर पर 'मेक इन इंडिया' अभियान को सशक्त करेगा, जिससे भारत के मेहनती किसानों, उद्यमियों, लघु उद्योगों (MSMEs), स्टार्टअप नवाचारों और मछुआरों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए द्वार खुलेंगे। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अतिरिक्त, यह समझौता तकनीकी साझेदारी और निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ एक सुरक्षित और विश्वसनीय वैश्विक सप्लाई चेन बनाने में भी सहायक होगा। 'विकसित भारत' की ओर बढ़ते कदमों के बीच, यह साझेदारी साझा समृद्धि और जन-सशक्तीकरण की दिशा में एक भविष्योन्मुखी मील का पत्थर साबित होगी।

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