India US trade Deal: भारत के कृषि बाजार पर अमेरिका की नजर! आयात बढ़ाने की मांग से देश में बढ़ेगा सियासी टकराव?
India US Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर कृषि क्षेत्र में नई बहस छिड़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका ने साफ तौर पर कहा है कि भारत में अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात की महत्वपूर्ण संभावनाएं मौजूद हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्र सरकार संसद में यह भरोसा दिला रही है कि भारत के किसानों और कृषि क्षेत्र के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। आइए जानते हैं भारतीय कृषि बाजारों पर अमेरीका ने क्या कहा...

US Agriculture Imports India: भारतीय कृषि बाजार पर अमेरिका ने क्या कहा?
द इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए लिखित जवाब में, अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के एक प्रवक्ता ने कहा कि भारत में अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात को अब तक "ऊंचे और अनुचित टैरिफ" तथा गैर-टैरिफ बाधाओं के कारण नुकसान उठाना पड़ा है।
USDA के अनुसार, भारत में अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात को बढ़ाने की बड़ी संभावना है। ऊंचे टैरिफ, गैर-जरूरी प्रतिबंध और अत्यधिक सब्सिडी जैसी नीतियां अमेरिकी किसानों के लिए असमान स्थिति पैदा करती हैं। अगर इन बाधाओं में कमी लाई जाए, तो यह अमेरिकी किसानों, पशुपालकों और उत्पादकों के लिए बेहतर अवसर पैदा करेगा और दोनों देशों के बीच संतुलित व लाभकारी व्यापार संभव होगा।
अमेरिकी कृषि विभाग ने यह भी बताया कि सितंबर 2025 में घोषित USDA की 'थ्री-प्वाइंट प्लान' का मकसद 50 अरब डॉलर के कृषि व्यापार घाटे को कम करना है। इसमें बाजार विस्तार, व्यापार समझौतों पर तेज प्रतिक्रिया और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना शामिल है।
Indian Agriculture Market पर अमेरिका की मंशा पहले से साफ
अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक लेस्ली रोलिंस ने 3 फरवरी को X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता "अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजार तक पहुंच देगा", जिससे अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में आय बढ़ेगी। रोलिंस के मुताबिक, 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था। भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बड़ा बाजार है और यह समझौता उस घाटे को कम करने में मदद करेगा।"
भारत सरकार का क्या कहना है?
अमेरिकी दावों के बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने राज्यसभा में साफ कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की बातचीत में भारत की खाद्य और कृषि क्षेत्र से जुड़ी संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा गया है।
पीयूष गोयल ने कहा, भारत के किसानों, कृषि हितों और खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है। सभी बातचीत राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर की गई है। सरकार का कहना है कि भारत किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, जिससे घरेलू किसानों को नुकसान पहुंचे या कृषि सब्सिडी व्यवस्था पर दबाव पड़े।
आंकड़े क्या कहते हैं?
अमेरिका लंबे समय से भारतीय कृषि बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। 2024 में भारत का अमेरिका से कृषि आयात 2.4 अरब डॉलर रहा जिसमें मुख्य रुप से फल, ड्राई फ्रूट्स, बादाम-अखरोट, शराब, कच्चा कपास, वनस्पति तेल, प्रोसेस्ड फूड शामिल रहा। 2024 में भारत का अमेरिका को कृषि निर्यात 6.2 अरब डॉलर में हुआ जिसमें मुख्य रुप से समुद्री उत्पाद, मसाले, डेयरी, चावल, हर्बल उत्पाद थे। भारत का कृषि निर्यात अमेरिका को कुल कृषि निर्यात (53.2 अरब डॉलर) का 11.74% है, यानी भारत इस व्यापार में फिलहाल फायदे की स्थिति में है।
क्यों बनेगा विपक्ष के लिए फ्लैश प्वाइंट?
अमेरिका की ओर से टैरिफ कम करने, सब्सिडी सुधारने और बाजार खोलने जैसी बातें विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दे सकती हैं। विपक्ष यह सवाल उठा सकता है कि क्या इस समझौते से भविष्य में भारतीय किसानों पर दबाव बढ़ेगा?
वहीं, BJP सरकार का दावा है कि वह किसानों के हितों से समझौता किए बिना वैश्विक व्यापार को आगे बढ़ा रही है। साफ है कि भारत-अमेरिका कृषि व्यापार को लेकर यह बयानबाजी आने वाले दिनों में BJP और विपक्ष के बीच बड़ी राजनीतिक बहस का मुद्दा बनने वाली है।












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