कॉमरेड शी जिनपिंग, दुनिया का नया 'स्टालिन', जिनकी खामोशी से भी डराने वाली आवाज निकलती है !
साल 1917 में रूस की क्रांति के बाद लेनिन का उदय हुआ और लेनिन के रहते रहते उनके शागिर्द स्टालिन ने अपनी विचारधारा अपनी बोल्सेविक पार्टी पर थोपनी शुरू कर दी है। लेनिन की मौत के बाद स्टालिन ने रूस में खून की नदियां बहा दीं।
Xi Jinping: साल 1917 में रूस की क्रांति के बाद लेनिन का उदय हुआ और लेनिन के रहते रहते उनके शागिर्द स्टालिन ने अपनी विचारधारा अपनी बोल्सेविक पार्टी पर थोपनी शुरू कर दी है। लेनिन की मौत के बाद स्टालिन ने रूस में खून की नदियां बहा दीं और अपनी निजी विचारधारा को थोपने के लिए लाखों लोगों को मरवा दिया। ये कम्युनिस्ट विचारधारा थी, जिसे दुनियाभर के बुद्धिजीवियों ने सराहा और इस तरह से सराहा, कि इंसानों के बोलने का अधिकार छीनने वाली इस विचारधारा को मानवता का भलाई करने वाली विचारधारा करार दे दिया। चीन में पिछले एक हफ्ते से कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की 20वीं बैठक चल रही थी और इस मंथन ने दुनिया को नया 'स्टालिन' दिया है, नाम है शी जिनपिंग, जिन्होंने अपने तमाम विरोधियों को सदा के लिए अपने रास्ते से हटा दिया है और जिन्होंने अपनी मर्जी से निजी हितों के लिए पार्टी कि विचारधारा से लेकर पार्टी के संविधान में भी ढेर सारे संसोधन कर दिए हैं। आईये जानते हैं, कि काफी कम बोलने वाले शी जिनपिंग की खामोशी भी क्यों उनके विरोधियों के साथ साथ उनके समर्थकों को भी डराती है?

शी जिनपिंग के हर शब्द की अहमियत
कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस के उद्धाटन समारोह में शी जिनपिंग ने पिछले हफ्ते अपने एक नये सफल तीसरे कार्यकाल का आगाज करने से पहले करीब 2 घंटे तक पार्टी की विचारधारा और आगे के लक्ष्यों को लेकर बात की और उनके हर एक शब्द को चीन के अधिकारियों ने नोट किया, कि देश को किस तरह से चलाना है। लेकिन, इसके साथ ही अधिकारियों ने वो भी नोट किया, जो शी जिनपिंग ने अपने शब्दों में नहीं कहा, लेकिन उसका खुलासा हो रहा था। कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस में शी जिनपिंग ने जो अपनी रिपोर्ट पेश की, उसमें दो वाक्य ऐसे थे, जिसने तेजी से अस्थिरता की तरफ बढ़ रही दुनिया के बारे में उनकी चिंताओं को उजागर किया, जिसमें एक छिपा हुआ वाक्य ये था, कि कैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, एक सत्तावादी महाशक्ति के तौर पर आगे बढ़ रहे चीन को रोकने की तैयारियां कर रहा है। कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस में नेताओं ने घोषणा की, कि पिछले दो दशकों में देश महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर की अवधि में था। जिसका मतलब ये हुआ, कि पिछले दो दशकों में चीन नेताओं का मानना था, कि चीन के सामने कोई खतरा नहीं है, लिहाजा पूरा फोकस चीन के आर्थिक विकास पर केन्द्रित रखा गया।

बहुत हुआ विकास... अब
चीनी नेताओं ने लंबे समय तक यही सुझाव दिया, कि दुनिया में अभी "शांति और विकास का युग बना हुआ है" और दुनिया में जहां भी कुछ गलत हो रहा है, उसमें चीन का हाथ नहीं है। लेकिन, इस बार कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस ने शी जिनपिंग ने जो रिपोर्ट पेश किया है और अपना जो 104 मिनट का भाषण दिया है, उसकी प्राथमिकता विकास से खिसककर देश की सुरक्षा पर आ गई थी। शी जिनपिंग के 104 मिनट के भाषण का 72 पन्नों का सारांस ही पत्रकारों को सौंपा गया। लेकिन, उन 72 पन्नों में जिन बातों का जिक्र किया गया था, जो दुनिया के सामने आने वाले 'महातूफान' की चेतावनी है। इन 72 पन्नों में शी जिनपिंग ने कहा कि, दुनिया के सामने 'खतरनाक तूफान' है और उनकी चेतावनी ने संकेत दिया, कि उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय खतरे अब काफी खतरनाक हो गये हैं। इसके साथ ही अब शी जिनपिंग ने ताइवान को अमेरिका और चीन के लिए 'चोक प्वाइंट' करार दिया, लेकिन उन्होंने जो नहीं किया, उसका मतलब ये, कि अब चीन ताइवान को अपनी मुख्य भूमि में मिलाने में देर नहीं करेगा। और शायद इसी डर से अमेरिका के सुरक्षा अधिकारियों ने कहना शुरू कर दिया है, कि अगले एक साल के अंदर चीन ताइवान पर हमला करने वाला है। यानि, अब तक विकास के रास्ते पर बढ़ रहा चीन अब अपनी शक्ति की आजमाइश करने वाला है और इसमें कोई शक नहीं, कि एशिया युद्ध सा नया मैदान बनने वाला है।

ड्रैगन का असली रूप अब आएगा सामने?
शंघाई में विदेश नीति के विद्वान हू वेई ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए गये एक इंटरव्यू में कहा कि, "चीन के बाहरी वातावरण को अब अभूतपूर्व रूप से खतरनाक बताया जा सकता है, और यह चीन के टॉप लीडरशिप का मानना भी है।" कम्युनिस्ट पार्टी में, चीन की नीतियों, कानून और कूटनीति को आकार देने वाले चीनी नेता के एक एक शब्द बहुत मायने रखते हैं और पार्टी कांग्रेस की रिपोर्ट, हर पांच साल में, अधिकारियों के लिए मौलिक मार्गदर्शक है। नेताओं के शब्दों को, उनकी प्राथमिकताओं को इंगित करने के लिए प्रत्येक वाक्यांश, प्रत्येक मोड़ और प्रत्येक चूक को तौला जाता है। अपनी रिपोर्ट में शी जिनपिंग ने कई बार कहा कि, चीन अपनी पहल के माध्यम से वैश्विक शांति और विकास में काफी योगदान देना चाहता है, और व्यापार और राजनयिक लाभ के लिए "रणनीतिक अवसरों" पर चर्चा करना चाहता है। लेकिन वैश्विक रुझानों के बारे में चीनी राष्ट्रपति का आकलन चेतावनियों से भरा हुआ था।

जोखिम और चुनौतियों का बार बार जिक्र
शी जिनपिंग ने अपने भाषण में कहा कि, "हमारे देश ने एक ऐसे दौर में प्रवेश किया है, जब रणनीतिक अवसर जोखिम और चुनौतियों के साथ सह-अस्तित्व में हैं, और अनिश्चितताएं और अप्रत्याशित फैक्टर्स लगातार बढ़ रहे हैं।" उन्होंने कहा कि, हालांकि चीन के पास अंतरराष्ट्रीय विकास और पहल के लिए जगह है, लेकिन, "दुनिया अशांति और परिवर्तन की अवधि में प्रवेश कर चुकी है।" वहीं, चाइना स्ट्रैटेजीज ग्रुप के अध्यक्ष और चीनी राजनीति के पूर्व सीआईए विश्लेषक क्रिस्टोफर जॉनसन ने कहा कि, "यह वैश्विक व्यवस्था के उनके आकलन में एक सार्थक और शायद सबसे प्रमुख बदलाव का प्रतीक है।" उन्होंने कहा कि, "वह मूल रूप से सिस्टम को सख्त कर रहे हैं, क्योंकि संघर्ष की संभावना बढ़ रही है।" कांग्रेस के दौरान शी जिनपिंग ने सार्वजनिक रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका या राष्ट्रपति जो बाइडेन की 'नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति' का उल्लेख नहीं किया, जिसमें चीन को अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया है। लेकिन, शी जिनपिंग ने जो नहीं कहा, वो ये है, कि चीनी अधिकारियों के लिए सबसे बड़ा फोकस अमेरिका ही है।

शी जिनपिंग ने खुद को कैसे प्रोजेक्ट किया?
कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस ने शी जिनपिंग ने खुद को एक ऐसे नेता के तौर पर प्रोजेक्ट किया है, जो भविष्य के बारे में पहले ही चीन को चेतावनी दे रहा है, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर इस बात पर जोर दिया, कि चीनी जनता को भविष्य की खतरनाक परिस्थितियों लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने साफ तौर पर ये कहा, कि चीन की कूटनीतिक ताकतों को मजबूत करना होगा, क्योंकि जलनशीसल शक्तियां चीन की मजबूती से ईर्ष्या कर रही हैं। और जो उन्होंने नहीं कहा, वो ये, कि चीन इसके खिलाफ सैन्य ताकतों का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकेगा और यही वजह है, कि अपने तीसरे कार्यकाल में शी जिनरिंग परमाणु बमों का जखीरा तेजी से बढ़ाने का आदेश देने वाले हैं। उन्होंने कहा, कि ईर्ष्यालु शक्तियां कई तरह से चीन पर दवाब डालती हैं, जिनमें "ब्लैकमेल करना, चीन को रोकना, चीन के खिलाफ नाकाबंदी करना और चीन पर अधिकतम दबाव डालना शामिल है।"

पीएलए के लिए जिनपिंग का प्लान
पहले से ही चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के कमांडरों और कांग्रेस के वरिष्ठ अधिकारियों ने चीन से सेना को एडवांस करने, टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भर बनने और एक चीन के वैचारक सिद्धांत को मजबूत करने में तेजी लाने के लिए शी जिनपिंग की योजनाओं के इर्द-गिर्द ही अपने विचार तैयार करने की चेतावनी दे चुके हैं। जनरल शू किलियांग ने कांग्रेस में सैन्य प्रतिनिधियों से कहा कि, शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी फोर्स का "एक ऐतिहासिक बचाव, आकार बदलने और परिवर्तन" पर फोकस किया है। उन्होंने कहा कि, 'राष्ट्रपति के एक एक शब्द का अक्षरस: पालन किया जाएगा।' शी जिनपिंग ने साल 2035 तक पीएलए को दुनिया में सर्वशक्तिशाली बनाने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए अब असीमित संख्या तक परमाणु बम बनाए जाएंगे। लिहाजा, शी जिनपिंग का तीसरा कार्यकाल निश्चित तौर पर दुनिया के लिए काफी तनावपूर्ण और खतरनाक होने जा रहा है, जिसमें पूरी उम्मीद है, कि दुनिया को एक बड़ी लड़ाई देखने को मिलेगी।
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