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चीन में हटाए गये प्रधानमंत्री, शी जिनपिंग के विरोधी 'शंघाई गुट' का सफाया, CPC बैठक में क्या हुआ, जानें सबकुछ

प्रधानमंत्री ली केकियांग कम्युनिस्ट पार्टी की सर्व शक्तिशाली पोलित ब्यूरो की स्टैंडिंग कमेटी के सात सदस्यों में से उन चार सदस्यों में शामिल थे, जो कम्युनिस्ट पार्टी की सभी अलग अलग स्तर के पोलित ब्यूरो में शामिल थे।

China News: चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लगातार तीसरी बार सत्ता सौंपने के साथ ही चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं कांग्रेस खत्म हो गई है और आज शी जिनपिंग को फिर से राष्ट्रपति बनाने का ऐलान किया जाएगा। इस बैठक में चीन को लेकर कई अहम फैसले लिए गये हैं और सबसे महत्वपूर्ण फैसला ये लिया गया, कि कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी तानाशाही प्रवृति की एक बार फिर से पुष्टि कर दी है। इस बैठक के खत्म होते होते चीन में शी जिनपिंग का प्रभुत्व अत्यंत मजबूत हो गया है और यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी, कि कम्युनिस्ट पार्टी पर एक वक्त जिस तरह से माओ जेदोंग का कब्जा था, अब उसी तरह से पार्टी पर शी जिनपिंग का कब्जा हो गया है।

हटाए गये प्रधानमंत्री

हटाए गये प्रधानमंत्री

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस में नंबर-2 नेता ली केकियांग को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया गया है। ली केकियांग देश के नंबर-2 अधिकारी माने जाते थे और बाजार-सुधार के लिए कार्यक्रम चलाने के लिए जाने जाते थे। इसके साथ ही वो राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ज़ीरो कोविड पॉलिसी के भी समर्थक नहीं थे। प्रधानमंत्री ली केकियांग शी जिनपिंग की इस नीति का भी विरोध करते थे, कि देश की अर्थव्यवस्था पर पूरी तरह से सरकार का नियंत्रण होना चाहिए, लिहाजा वो हमेशा से शी जिनपिंग की आंखों की किरकिरी बने रहते थे। इन सबके साथ ही ली केकियांग कम्युनिस्ट पार्टी के शंघाई गुट का भी हिस्सा माने जाते थे, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति हू जिताओ और प्रसिद्ध उद्योगपति जैक मा भी शामिल हैं। हू जिंताओ को पार्टी कांग्रेस की बैठक के समापन समारोह से शी जिनपिंग ने बाहर निकलवा दिया, जबकि जैक मा के खिलाफ शी जिनपिंग पिछले दो सालों से लगातार एक्शन ले रहे हैं, जिससे उनके व्यापार को भारी नुकसान भी पहुंचा है। वहीं, अब शंघाई गुट के सबसे बड़े नेता ली केकियांग को भी शी जिनपिंग ने अपने रास्ते से हटा दिया है।

सीपीसी बैठक में क्या सब हुआ?

सीपीसी बैठक में क्या सब हुआ?

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की एक हफ्ते तक चली बैठक में पार्टी के संविधान, देश की अर्थव्यवस्था और चीन की सेना पर फैसले लेने के तमाम अधिकार शी जिनपिंग को दे दिए गये। इसके साथ ही ये फैसला भी लिया गया, कि देश के विकास के केन्द्र में कम्युनिस्ट पार्टी ही रहेगी, लिहाजा पार्टी के विकास पर पूरी तरह से जोर दिया जाएगा और इसके लिए शी जिनपिंग हर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं। एक हफ्ते तक चली इस बैठक को कवर करने गये दुनियाभर के पत्रकार और विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी थी, कि क्या कोई संकेत इस बात को लेकर भी मिलते हैं, कि शी जिनपिंग की स्थिति कमजोर हो रही है, लेकिन इस तरह के कोई संकेत देखने को नहीं मिले, बल्कि बैठक खत्म होने के बाद शी जिनपिंग की शक्ति में असीमित इजाफा हो गया है।

शी जिनपिंग के विचार सर्वप्रथम

शी जिनपिंग के विचार सर्वप्रथम

प्रधानमंत्री ली केकियांग को हटाया जाना कोई आश्चर्चजनक घटना नहीं थी और पिछले कई महीनों से इस बात के संकेत मिल रहे थे। ली केकियांग और शी जिनपिंग के बीच के मतभेद को कई बार देखा गया था, जब चीन के हाउसिंग सेक्टर में आए भूकंप और कोविड लॉकडाउन को लेकर दोनों नेताओं ने अलग अलग फैसले लिए थे। ली केकियांग को प्रधानमंत्री पद से हटाना दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में शी की सत्ता पर लगातार मजबूत पकड़ का संकेत था। शनिवार को कांग्रेस के समापन सत्र में कम्युनिस्ट पार्टी के नये संविधान को मंजूरी दी गई और एक प्रस्ताव भी पास किया गया है, जिसमें कहा गया है, कि "ये कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी के सभी सदस्यों से पार्टी की केंद्रीय समिति और पूरी पार्टी में कॉमरेड शी जिनपिंग की मुख्य स्थिति को स्थापित करने और शी जिनपिंग के विचार की मार्गदर्शक भूमिका स्थापित करने के निर्णायक महत्व की गहरी समझ हासिल करने का आह्वान करती है।" प्रस्ताव में कहा गया है, कि शी जिनपिंग की सोच पार्टी की विचारधारा को संदर्भित करता है। वहीं, संक्षिप्त समापन टिप्पणी में शी जिनपिंग ने कहा कि, संविधान में संशोधन "पार्टी के समग्र नेतृत्व को बनाए रखने और उसे मजबूत करने के लिए स्पष्ट आवश्यकताओं को निर्धारित करता है।"

प्रधानमंत्री को हटाए जाने का मतलब

प्रधानमंत्री को हटाए जाने का मतलब

प्रधानमंत्री ली केकियांग कम्युनिस्ट पार्टी की सर्व शक्तिशाली पोलित ब्यूरो की स्टैंडिंग कमेटी के सात सदस्यों में से उन चार सदस्यों में शामिल थे, जो कम्युनिस्ट पार्टी की सभी अलग अलग स्तर के पोलित ब्यूरो में शामिल थे। लेकिन, इस बार ली केकियांग का नाम 205 सदस्यीय सेन्ट्रल कमेटी में भी शामिल नहीं किया गया और औपचारिक तौर पर सेन्ट्रल कमेटी को पार्टी की बैठक में पास कर दिया गया। इसका मतलब यह है, कि आज अनावरण किए जाने वाले नेतृत्व फेरबदल में उन्हें स्थायी समिति में फिर से नियुक्त नहीं किया जाएगा। वहीं, महासचिव के रूप में तीसरा कार्यकाल प्राप्त करते हुए शी जिनपिंग के शीर्ष स्थान पर बने रहने की व्यापक रूप से उम्मीद है। जिन तीन अन्य लोगों को हटा दिया गया है, उनमें शंघाई गुट के प्रमुख हान झेंग, पार्टी सलाहकार निकाय के प्रमुख वांग यांग और लंबे समय से शी जिनपिंग के सहयोगी और विधायिका के प्रमुख ली झांशु थे। ली केकियांग अगले साल मार्च तक, अपना कार्यकाल खत्म होने तक प्रधाननंत्री बन रहेंगे, जब तक सरकार के नये मंत्रियों की नई लिस्ट तैयार नहीं कर ली जाती है। अगर ली केकियांग सेन्ट्रल कमेटी का हिस्सा होते, तो इस बात की उम्मीद रहती, कि वो मंत्रियों के चुनाव में कुछ धक्का-मुक्की कर सकते थे, खासकर आर्थिक नीतियों को लेकर वो शी जिनपिंग से कुछ फैसले मनवा सकते थे।

बड़े-बड़े नेताओं का सफाया

बड़े-बड़े नेताओं का सफाया

ली केकियांग को पहले ही काफी हद तक दरकिनार कर दिया गया था और शी जिनपिंग ने सरकार के ज्यादातर हिस्सों पर नियंत्रण कर लिया था। कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस में 2,300 से ज्यादा प्रतिनिधि, चीन की सख्त "शून्य-कोविड" नीति के तहत नीले सर्जिकल मास्क पहने हुए मध्य बीजिंग में स्थित 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में मिले। जब मतदान हुआ तो सभी विदेशी पत्रकारों सहित अधिकांश मीडिया को बैठक के पहले भाग में जाने की अनुमति नहीं थी। वहीं, समापन समारोह के शुरू होने से ठीक पहले जब मीडिया को फिर से एंट्री दी जा रही थी, उस वक्त पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ को बैठक से जबरन बाहर कर दिया गया। जिसका वीडियो भी वायरल हो रहा है। 79 साल के पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ को ज्यादा बोलने का मौका नहीं दिया गया। वहीं, एक और पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन, जो हू जिंताओ से पहले चीन के राष्ट्रपति थे औ जिनका ताल्लुक भी शंघाई गुट से है, उन्हें इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने दिया गया।

सिर्फ 11 महिलाओं को चुना गया

सिर्फ 11 महिलाओं को चुना गया

कम्युनिस्ट पार्टी की 205 सदस्यीय सेन्ट्रल कमेटी में इस बार सिर्फ 11 महिलाओं को चुना गया। वहीं, करीब 4 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुहों से आने वाले नेताओं को चुना गया। पिछली बार भी सेन्ट्रल कमेटी में करीब 4 प्रतिशत ही अल्पसंख्यक समूह के नेता थे। वहीं, तिब्बत से आने वाले कम्युनिस्ट पार्टी के नेता वांग जुन्झेंग, जिनपर मानवाधिकार उल्लंघन के लिए अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखा है, उन्हें भी सेन्ट्रल कमेटी में शामिल गया है। इस बैठक के दौरान किसी भी तरह के संभावित व्यवधान को कंट्रोल करन के लिए नियमित अंतराल पर पुलिस फोर्स बैठक स्थल के पास वाले सड़कों पर मार्च कर रही थी। वहीं, मुख्य सड़कों पर भी पुलिस फोर्स को तैनात किया गया था और कार्यक्रम स्थल तक जाने वाली सड़कों को ब्लॉक कर दिया गया था।

विश्वासपात्रों को अहम जिम्मेदारियां

विश्वासपात्रों को अहम जिम्मेदारियां

शी जिनपिंग ने अपने वफादारों को कम्युनिस्ट पार्टी की अलग कमेटियों में प्रमुख पदों पर रखा है और नीतिगत कार्य समूहों का व्यक्तिगत प्रभार दिया है। वहीं, पार्टी के भीतरी गुटों ने हू जिंताओ और जियांग जेमिन के नेतृत्व में अलग अलग चर्चा की। वहीं, जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय में राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर हो-फंग हंग ने कहा कि, "अभी, आप वास्तव में इन विभिन्न नीतियों के बारे में बहुत सारी आंतरिक पार्टी बहस को नहीं देख पाएंगे, क्योंकि अब वहां पर सिर्फ एक ही आवाज है।" वहीं, शी जिनपिंग ने समाज और अर्थव्यवस्था पर राज्य के नियंत्रण का विस्तार करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया है। अपनी टिप्पणी में उन्होंने कहा कि, पिछले साल अपनी 100वीं वर्षगांठ मनाने वाली पार्टी अभी भी अपने चरम पर है। उन्होंने कहा कि, "चीन की कम्युनिस्ट पार्टी एक बार फिर एक नई यात्रा पर निकल रही है, जिस पर उसे नए परीक्षणों का सामना करना पड़ेगा।" कांग्रेस का समापन कम्युनिस्ट गान "द इंटरनेशनेल" को बजाकर किया गया।

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