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ट्रंप की 'ज़िम्मेदारी' निभाने सामने आए ब्लूमबर्ग

माइकल ब्लूमबर्ग
Reuters
माइकल ब्लूमबर्ग

अमरीका ने पेरिस जलवायु समझौते से कदम वापस खींचे तो अमरीकी अरबपति माइकल ब्लूमबर्ग ने आगे बढ़कर मदद की पेशकश कर दी है.

न्यूयॉर्क के मेयर रहे ब्लूमबर्ग ने कहा है कि अगर सरकार पैसे नहीं देगी तो वे पेरिस जलवायु समझौते में अमरीका के हिस्से के क़रीब 30 करोड़ रुपये देने को तैयार हैं.

ब्लूमबर्ग के मुताबिक़ राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप जलवायु समझौते से बाहर हो गए हैं इसलिए उनकी ज़िम्मेदारी बनती है कि वे दुनिया की आबोहवा सुधारने में मदद करें.

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले जून में पेरिस जलवायु समझौता छोड़ने का एलान कर दिया था. इसके लिए उनकी दुनिया भर में भारी आलोचना हुई थी.

पेरिस समझौते का मक़सद है कि धरती के तापमान को औद्योगीकरण की शुरुआत से पहले के वैश्विक तापमान से दो डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा न बढ़ने दिया जाए.

दुनिया के सभी देश पेरिस समझौते में भागीदारी कर ऐसा करने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं, लेकिन अब अमरीका अकेला ऐसा देश है जो इसका हिस्सा नहीं है.

पेरिस पर्यावरण समझौता
AFP
पेरिस पर्यावरण समझौता

'ट्रंप अपने फ़ैसले बदलने के लिए जाने जाते हैं'

अमरीकी टीवी चैनल सीबीएस से बात करते हुए माइकल ब्लूमबर्ग ने कहा, "अमरीका ने एक वादा किया था. अगर सरकार उसे पूरा नहीं करती है तो एक अमरीकी होने के नाते ये हमारी ज़िम्मेदारी बन जाती है. मेरे पास ऐसा करने की क्षमता है इसलिए मैं उन्हें उस पैसे का चेक भेजूंगा जिसका वादा अमरीकी सरकार ने किया था."

माइकल ब्लूमबर्ग की चैरिटेबल संस्था 'ब्लूमबर्ग फ़िलैंथ्रोपीज़' ने पिछले साल भी पर्यावरण से जुड़े एक और काम के लिए कम पड़ रहे 99 करोड़ रुपये की भरपाई करने की पेशकश की थी.

ब्लूमबर्ग ने उम्मीद जताई कि अगले साल तक राष्ट्रपति ट्रंप अपने फ़ैसले पर दोबारा विचार करेंगे.

उन्होंने कहा कि "ये सच है कि वे अपना इरादा बदलने के लिए जाने जाते हैं. अमरीका इस समझौते का बड़ा हिस्सा है और हमें दुनिया को एक संभावित तबाही से बचाने में मदद करनी चाहिए."

जनवरी में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अगर उन्हें लगा कि अमरीका के साथ ज़्यादा ईमानदारी से बर्ताव किया जा रहा है तो अमरीका पेरिस जलवायु समझौते का हिस्सा बनने पर दोबारा विचार कर सकता है.

पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा था कि "मुझे समझौते से समस्या नहीं है. मुझे उस समझौते से परेशानी है जो ओबामा सरकार ने साइन किया था."

ग्रीन हाउस गैस
Reuters
ग्रीन हाउस गैस

पेरिस जलवायु समझौता क्या है?

यह समझौता मूल रूप से वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने से जुड़ा है. हालांकि समझौते का ज़ोर तापमान में बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रखने पर है.

यह मांग ग़रीब और बेहद ग़रीब देशों की ओर से रखी गई थी. औद्योगीकरण शुरू होने के बाद से धरती का तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है.

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर ये तापमान 2 डिग्री से ऊपर गया तो धरती की जलवायु में बड़ा बदलाव हो सकता है.

जिसके असर से समुद्र तल का स्तर बढ़ना, बाढ़, ज़मीन धंसने, सूखा, जंगलों में आग जैसी आपदाएं बढ़ सकती हैं.

वैज्ञानिक इसके लिए ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को ज़िम्मेदार मानते हैं. ये गैस इंसानी ज़रूरतों जैसे बिजली बनाने, वाहनों, कारखानों और बाक़ी कई वजहों से पैदा होती हैं.

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