Air India Crash: UK पैसेंजर्स के शवों की अदला-बदली? आरोप-'गलत शव भेजे गए', 260 लाशों के DNA-पहचान में झोल!
Ahmedabad Air India Plane Crash: 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे ने न केवल 260 जिंदगियों को छीन लिया, बल्कि अब पीड़ितों के परिवारों को एक और दुखदायी अनुभव से गुजरना पड़ रहा है।
ब्रिटेन में दो परिवारों को उनके प्रियजनों के बजाय गलत शव भेजे गए, जिससे उनकी पीड़ा और गहरी हो गई है। इस भयावह गड़बड़ी ने न केवल परिवारों का दिल तोड़ा, बल्कि पहचान प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। आइए जानते हैं विस्तार से...

गलत शवों का दर्दनाक खुलासा कैसे हुआ?
लंदन में इनर वेस्ट की कोरोनर डॉ. फियोना विलकॉक्स ने जब ब्रिटेन भेजे गए शवों की डीएनए जांच की, तो यह गड़बड़ी सामने आई। एक परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली थीं, लेकिन उन्हें बताया गया कि ताबूत में उनके रिश्तेदार का शव नहीं, बल्कि किसी अज्ञात व्यक्ति का है। एक अन्य परिवार को और भी भयानक स्थिति का सामना करना पड़ा, जब उनके ताबूत में दो अलग-अलग पीड़ितों के अवशेष मिश्रित पाए गए। अंतिम संस्कार से पहले इन अवशेषों को अलग करना पड़ा।
परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे विमानन वकील जेम्स हीली-प्रैट ने डेली मेल को बताया, 'मैं पिछले एक महीने से इन ब्रिटिश परिवारों के साथ उनके घरों में बैठ रहा हूं। उनकी पहली इच्छा अपने प्रियजनों को वापस पाने की है, लेकिन कुछ को गलत अवशेष मिले हैं। यह बेहद दुखद है।' उन्होंने आगे यह भी कहा कि एक परिवार, जिसे हम 'फैमिली X' कह रहे हैं, के पास दफनाने के लिए कोई शव नहीं है। अगर ताबूत में उनका रिश्तेदार नहीं है, तो सवाल यह है कि वह कौन है? संभवतः किसी और यात्री के अवशेष हैं, और उनके परिवार को भी गलत शव मिला होगा।
अहमदाबाद सिविल अस्पताल में डीएनए प्रक्रिया?
हादसे के बाद अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में शवों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट किए गए, क्योंकि 1500 डिग्री सेल्सियस की भीषण आग और दुर्घटना के प्रभाव से अधिकांश शव बुरी तरह जल चुके थे या क्षत-विक्षत हो गए थे। डॉ. मीनाक्षी पारिख, बीजे मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल की डीन, ने कहा, 'हम पूरी तरह डीएनए मिलान पर निर्भर हैं। हम जल्दबाजी नहीं कर सकते, क्योंकि कोई गलती नहीं होनी चाहिए।'
सूत्रों के अनुसार, अस्पताल ने डीएनए टेस्ट के बाद शवों को सीलबंद ताबूतों में परिजनों को सौंपा। कई मामलों में शवों के बजाय अवशेष प्लास्टिक कंटेनरों में दिए गए, क्योंकि पहचान केवल डीएनए या दंत रिकॉर्ड से ही संभव थी। परिवारों को अवशेष देखने की अनुमति नहीं थी, और उन्हें केवल एक कागज का लेबल दिया गया, जिस पर पहचान संख्या लिखी थी।
ब्लैकबर्न के अल्ताफ ताजू, जिन्होंने अपने माता-पिता (एडम, 72, और हसीना, 70) और बहनोई (अल्ताफुसेन पटेल, 51) को हादसे में खोया, ने कहा, 'हमें अवशेष देखने नहीं दिया गया। उन्होंने बस कहा, 'यह आपके माता-पिता हैं', और एक नंबर वाला लेबल दे दिया। हमें उनकी बात माननी पड़ी।' सौभाग्य से, उनके परिवार के अवशेष भारत में ही दफनाए गए, इसलिए वे इस गड़बड़ी से बचे।

एयर इंडिया की भूमिका नहीं, लेकिन जवाबदेही की मांग
सूत्रों ने बताया कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने शवों की पहचान और हस्तांतरण की प्रक्रिया संभाली, जबकि एयर इंडिया और उनकी आपातकालीन सेवा एजेंसी, केन्यन्स इंटरनेशनल इमरजेंसी सर्विसेज, ने केवल परिवहन और परिवारों की सहायता की। इस गड़बड़ी में एयरलाइन की सीधी भूमिका नहीं थी, लेकिन परिवारों ने एयर इंडिया और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगे हैं।
हीली-प्रैट ने कहा, 'हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि शव कैसे बरामद किए गए और उनकी पहचान कैसे हुई? इस प्रक्रिया में भयावह खामियां थीं, और परिवार जवाब के हकदार हैं।' उन्होंने एयर इंडिया और केन्यन्स से औपचारिक जवाब की मांग की है।
क्या है अहमदाबाद एयर इंडिया हादसा?
12 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171, जो अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही थी, टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद ही बीजे मेडिकल कॉलेज के छात्रावास पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर में 242 लोग सवार थे, जिनमें 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, सात पुर्तगाली और एक कनाडाई नागरिक शामिल थे। केवल एक यात्री, ब्रिटिश-भारतीय विश्वास कुमार, जीवित बचे। हादसे में 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के साथ-साथ जमीन पर कम से कम 19 लोगों की मौत हुई। कुल 260 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि टेकऑफ के तुरंत बाद विमान के ईंधन आपूर्ति स्विच 'कट-ऑफ' स्थिति में चले गए, जिससे इंजन को ईंधन नहीं मिला और पूरी शक्ति खो गई। इसकी वजह अभी स्पष्ट नहीं है।
28 जून तक 260 मृतकों की पहचान हुई
हादसे के बाद शवों की पहचान के लिए गुजरात के 40 से अधिक अधिकारियों, फोरेंसिक साइंस निदेशालय और राष्ट्रीय फोरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय की टीमें जुटीं। 28 जून तक 260 मृतकों की पहचान DNA टेस्ट से हो चुकी थी, लेकिन गलत शव भेजे जाने की घटनाओं ने प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
मसले पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
एयर इंडिया दुर्घटना पर एक रिपोर्ट के संबंध में मीडिया के सवालों के उत्तर में, विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा - 'हमने रिपोर्ट देखी है और जब से ये चिंताएं और मुद्दे हमारे ध्यान में लाए गए हैं, हम ब्रिटिश पक्ष के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। दुखद दुर्घटना के मद्देनजर, संबंधित अधिकारियों ने स्थापित प्रोटोकॉल और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुसार पीड़ितों की पहचान की थी। सभी पार्थिव अवशेषों को अत्यंत व्यावसायिकता और मृतकों की गरिमा का पूरा ध्यान रखते हुए संभाला गया। हम इस मुद्दे से संबंधित किसी भी चिंता के समाधान के लिए ब्रिटिश अधिकारियों के साथ काम करना जारी रखे हुए हैं।'
परिवारों ने ब्रिटेन के सांसदों, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क कर जवाबदेही की मांग की है। उम्मीद है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर इस सप्ताह भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। यह हादसा और उसके बाद की गड़बड़ियां न केवल पीड़ित परिवारों के लिए दुखद हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि इतने बड़े पैमाने की त्रासदी में शवों की पहचान और हस्तांतरण कितना जटिल और संवेदनशील हो सकता है। परिवार अब न केवल अपने प्रियजनों के नुकसान का दुख मना रहे हैं, बल्कि इस भयावह त्रुटि ने उनकी पीड़ा को और गहरा कर दिया है।
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