Air India विमान हादसे के बाद ब्रिटिश नागरिक को भेजा गया गलत शव? भारत सरकार की सफाई, ब्रिटेन में नाराजगी
Air India Plane Crash Update: भारत से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के अहमदाबाद क्रैश में जान गंवाने वाले एक ब्रिटिश नागरिक के परिवार को कथित तौर पर गलत शव सौंपे जाने की खबर ने भारत और ब्रिटेन दोनों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि शव की पहचान में हुई इस भारी चूक के कारण पीड़ित परिवार को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया रोकनी पड़ी।
इस खबर के सामने आने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और ब्रिटेन की संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि, "हमने यह रिपोर्ट देखी है और जैसे ही यह मामला हमारे संज्ञान में आया, हमने यूके के संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया।"
जायसवाल ने आगे कहा इस दुखद हादसे के बाद संबंधित प्राधिकारियों ने पीड़ितों की पहचान तयशुदा प्रोटोकॉल और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप की थी। सभी मृतकों के शवों को अत्यंत सम्मान और पेशेवर तरीके से संभाला गया। हम इस मामले से जुड़ी सभी चिंताओं को दूर करने के लिए यूके अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
डेलीमेल की रिपोर्ट में गंभीर आरोप
ब्रिटेन के प्रतिष्ठित समाचार पत्र डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ब्रिटिश नागरिक के अंतिम संस्कार को तब रद्द करना पड़ा जब पता चला कि ताबूत में किसी और व्यक्ति के अवशेष रखे गए थे। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि एक अन्य ताबूत में दो शवों के अवशेष "मिश्रित" अवस्था में पाए गए, जिन्हें बाद में अलग करके दफनाया गया।
वकील का बयान: "परिवार तबाह हैं"
ब्रिटेन में हादसे के पीड़ित परिवारों की ओर से मुकदमा लड़ रहे वकील जेम्स हीली-प्रैट ने कहा, "मैं पिछले एक महीने से इन ब्रिटिश परिवारों के घर जाकर उनसे मिल रहा हूं। वे बस यही चाहते हैं कि उन्हें अपने प्रियजनों के शव सही-सलामत वापस मिलें।"
हीली-प्रैट ने कहा कि कुछ परिवारों को गलत अवशेष दिए गए हैं और वे पूरी तरह से टूट चुके हैं। यह स्थिति पिछले कुछ हफ्तों से चल रही है और इन परिवारों को इस चूक की एक ईमानदार और स्पष्ट व्याख्या मिलनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जिन परिवारों को गलत शव मिले हैं, वे भारी असमंजस की स्थिति में फंसे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित परिवारों ने अब इस मामले में न केवल एयर इंडिया, बल्कि आपातकालीन सेवा प्रदाता 'केन्यन्स इंटरनेशनल इमरजेंसी सर्विसेज' से भी औपचारिक जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, डेलीमेल ने रिपोर्ट में यह भी बताया कि पीड़ित परिवार अपने सांसदों, यूके विदेश मंत्रालय (FCDO), प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश सचिव कार्यालय से भी संपर्क कर चुके हैं। यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी लंदन दौरे से पहले सामने आया है, जिससे राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल मच गई है।
गौरतलब है कि 12 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171, जो अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए रवाना हुई थी, उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस भयावह हादसे में कुल 242 यात्रियों में से 241 की मौत हो गई थी, जबकि जमीन पर मौजूद 19 लोग भी इस दुर्घटना का शिकार हुए। मृतकों में 52 ब्रिटिश नागरिक शामिल थे।
कोरोनर की जांच में खुलासा
Inner West London की कोरोनर डॉ. फियोना विलकॉक्स ने शवों की पहचान में हुई गड़बड़ियों की ओर इशारा किया। वकील हीली-प्रैट ने बताया कि, "अगर ताबूत में उनका परिजन नहीं है, तो फिर यह जानना जरूरी है कि आखिर उस ताबूत में है कौन? हो सकता है कि वह कोई और यात्री हो, और उसके परिजनों को भी गलत शव दे दिए गए हों।"
उन्होंने कहा कि कोरोनर के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि अब एक अनजान शव उनके अधिकार क्षेत्र में है।
शवों की पहचान प्रक्रिया सवालों के घेरे में
रिपोर्ट में कहा गया है कि हादसे के बाद मिले अधिकांश शव या तो बुरी तरह जल चुके थे, या क्षत-विक्षत और खंडित अवस्था में थे। शवों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट और डेंटल रिकॉर्ड का सहारा लिया गया था। फिर भी, इस तरह की बड़ी गड़बड़ी से पूरी पहचान प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला बेहद संवेदनशील और मानवीय पीड़ा से जुड़ा हुआ है। मृतकों के शवों को उनके परिवारों तक सही तरीके से पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।
अगर इसमें कहीं भी लापरवाही हुई है, तो न केवल पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए, बल्कि जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। अब यह देखना अहम होगा कि एयर इंडिया और भारतीय सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं, और क्या ब्रिटेन में बढ़ रहे गुस्से को शांत करने में सफल हो पाते हैं या नहीं।












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