Iran New Praposal: ईरान ने Trump को भेजा नया प्रस्ताव, क्या-क्या नई शर्तें जोड़ीं? 3 पर अटक सकती है डील!
Iran War Update: मिडिल ईस्ट वापस जंग के मुहाने पर खड़ा है। पहले चल रहा कांच के जैसा नाजुक सीजफायर कभी भी टूट सकता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में एक बार फिर न्यूक्लियर को लेकर कूटनीति तेज होती दिखाई दे रही है। Iran ने United States को एक बार फिर से 14 प्वॉइंट वाला नया न्यूक्लियर प्रस्ताव भेजा है। जानेंगे क्या है इस नए प्रस्ताव में।
पाकिस्तान के जरिए पहुंचा अमेरिका
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के गृह मंत्री Mohsin Naqvi के जरिए वाशिंगटन तक पहुंचाया गया। नकवी इस बातचीत में Qasim Ghalibaf के साथ ईरान के मुख्य वार्ताकारों में शामिल बताए जा रहे हैं। अपनी हालिया ईरान यात्रा के दौरान नकवी ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से भी मुलाकात की थी। हालांकि इस नए प्रस्ताव का खाका बाहर तो नहीं आया लेकिन ये जानकारी बाहर आ रही है कि 3 मुद्दे हैं जिन पर कोई पीछे नहीं हटना चाहता।

तीन बड़े मुद्दों पर फंसी हुई है पूरी डील
1. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही न्यूक्लियर वार्ता फिलहाल तीन बड़े विवादों पर अटकी हुई है।पहला मुद्दा 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम का है। अमेरिका चाहता है कि यह स्टॉक उसे सौंप दिया जाए, जबकि ईरान इसे अपने देश में ही डाउनब्लेंड करना चाहता है।
2. दूसरा विवाद जमी हुई वैश्विक संपत्तियों को लेकर है। अमेरिका का कहना है कि अंतिम समझौते के बाद ही फंड जारी किए जाएंगे। वहीं ईरान चाहता है कि उसकी 25% जमी हुई संपत्ति बातचीत के दौरान ही तुरंत रिलीज की जाए।
3. तीसरा और सबसे संवेदनशील मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण का है। अमेरिका इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर ईरानी प्रभुत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। यही वजह है कि बातचीत जारी रहने के बावजूद दोनों देशों के बीच अब भी बड़ा अविश्वास बना हुआ है।
न्यूक्लियर हथियार बनाने का इरादा नहीं- ईरान
अपने नए प्रस्ताव में ईरान ने साफ कहा है कि उसका न्यूक्लियर हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है। तेहरान का कहना है कि किसी भी संभावित न्यूक्लियर समझौते की सफलता केवल आपसी भरोसे और विश्वसनीयता पर निर्भर करेगी। ईरान ने यह भी कहा कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका को पहले यह साबित करना होगा कि वह एक भरोसेमंद साझेदार बन सकता है।
440 किलोग्राम यूरेनियम बना सबसे बड़ा मुद्दा
इस पूरी बातचीत में सबसे बड़ा विवाद ईरान के 440 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को लेकर है। अमेरिका इस स्टॉक को लेकर बेहद सतर्क है और उस पर लगातार निगरानी रख रहा है। वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान यह यूरेनियम अमेरिका को सौंप दे ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिखाया जा सके कि अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर नियंत्रण हासिल कर लिया है।दूसरी तरफ ईरान इस भंडार को देश से बाहर भेजने को तैयार नहीं है। उसका कहना है कि वह इसे अपने ही देश में डाउनब्लेंड यानी कम शुद्धता वाले स्तर में बदल सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी अड़ा ईरान
ईरान ने अपने प्रस्ताव में Strait of Hormuz पर क्षेत्रीय अधिकारों की औपचारिक मान्यता की मांग भी रखी है। तेहरान का दावा है कि यह रणनीतिक समुद्री मार्ग उसके क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है।ईरान चाहता है कि अमेरिका यह स्वीकार करे कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका पूरा कंट्रोल है और वह वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल सकता है।
कतर के पीएम का क्या रोल?
बताया जा रहा है कि ईरान का यह 14-सूत्रीय प्रस्ताव अमेरिका के पहले दिए गए 5-सूत्रीय एजेंडे का जवाब है। इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया में कतर के प्रधानमंत्री Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई। कतर लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल बातचीत करवाने की कोशिश करता रहा है और इस बार भी वही दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने में अहम कड़ी बना।
अमेरिका पर भरोसा नहीं- ईरानी मीडिया
ईरानी मीडिया Tasnim News Agency के मुताबिक, तेहरान अभी भी अमेरिका को पूरी तरह भरोसेमंद नहीं मानता। रिपोर्ट में कहा गया कि सफल बातचीत के लिए वाशिंगटन को पहले अपनी विश्वसनीयता और सही नीयत दिखानी होगी। ईरान का मानना है कि पहले हुए समझौतों और पश्चिमी सेंक्शन के अनुभवों ने दोनों देशों के बीच अविश्वास बढ़ाया है।
ट्रंप दोबारा हमले की मूड में! नेतन्याहू लगा रहे तीली
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में संकेत दिए कि उनका धैर्य अब खत्म हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप प्रशासन एक बार फिर सैन्य हमले के विकल्प पर विचार कर रहा है। दूसरी तरफ स्थिति ट्रंप और नेतन्याहू की फोन पर बात हुई। जानकार मानते हैं कि अगर न्यूक्लियर पर बातचीत विफल होती है, तो जंग दोबारा शुरू हो सकती है।
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