सुवेंदु अधिकारी को हराने के लिए TMC ने पानी की तरह बहाए 100 करोड़? लिफाफे में बंटे नोट, दावों से हड़कंप!
Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की सबसे हॉट सीट माने जाने वाली नंदीग्राम विधानसभा एक बार फिर भीषण सियासी संग्राम के केंद्र में आ गई है। इस बार विवाद किसी चुनावी रैली या बयानबाजी को लेकर नहीं, बल्कि एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर आरोप के बाद खड़ा हुआ है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के नंदीग्राम से उम्मीदवार शाहिदुल हक ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शीर्ष नेतृत्व पर एक ऐसा बम फोड़ा है, जिसने बंगाल से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है।
शाहिदुल हक का सीधा दावा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम में धूल चटाने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने कोई छोटी-मोटी रकम नहीं, बल्कि पूरे 100 करोड़ रुपये का एक खास 'चुनावी बजट' तैयार किया था। उन्होंने इस पूरे खेल में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और टीएमसी के लिए रणनीति बनाने वाली चुनावी कंसल्टिंग कंपनी आई-पैक (I-PAC) को सीधे कटघरे में खड़ा किया है।

घर-घर बांटे गए कैश से भरे लिफाफे, नंदीग्राम के वोटरों ने ऐसे पलटा गेम
चुनाव प्रचार के दौरान पर्दे के पीछे हुए कथित खेल का पर्दाफाश करते हुए एजेयूपी (AJUP) के उम्मीदवार शाहिदुल हक ने बेहद चौंकाने वाली बातें कही हैं। उनका आरोप है कि मतदान से ठीक पहले नंदीग्राम के कोने-कोने में टीएमसी कार्यकर्ताओं और आई-पैक के सदस्यों के जरिए वोटरों को लुभाने के लिए जमकर पैसे बांटे गए थे। शाहिदुल के मुताबिक, नंदीग्राम के हर घर में गुपचुप तरीके से कैश से भरे लिफाफे पहुंचाए गए, जिनमें 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की नकदी भरी हुई थी।
हालांकि शाहिदुल हक ने इस दौरान नंदीग्राम की समझदार जनता की जमकर तारीफ भी की। उन्होंने कहा,
"नंदीग्राम के आम लोगों ने टीएमसी उम्मीदवार पवित्र कार और अभिषेक बनर्जी के लोगों से नोटों से भरे वो लिफाफे जरूर ले लिए, लेकिन जब वे वोटिंग बूथ के अंदर गए, तो उन्होंने ईवीएम पर बीजेपी का बटन ही दबाया।"
हक ने आगे कहा कि जनता ने पैसे जेब में रखने के बावजूद राज्य में एक साफ-सुथरी और मजबूत सरकार बनाने के लिए पवित्र कार की जगह सुवेंदु अधिकारी को चुना। वे नंदीग्राम के इन जागरूक और समझदार मतदाताओं को दिल से सलाम करते हैं।
विदेशी फंडिंग का गंभीर आरोप, पाकिस्तान-बांग्लादेश कनेक्शन का दावा
शाहिदुल हक के आरोप सिर्फ पैसे बांटने तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने इस पैसे के सोर्स को लेकर देश की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर और डरावना दावा कर दिया है। पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर की पार्टी के उम्मीदवार हक का कहना है कि चुनाव अभियान में इस्तेमाल की गई यह भारी-भरकम रकम किसी लीगल या वैध रास्ते से नहीं आई थी।
उनके मुताबिक, "नंदीग्राम के चप्पे-चप्पे में जो 100 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए गए, वे असल में बांग्लादेश, पाकिस्तान और कई अन्य विदेशी मुल्कों से भारत भेजे गए थे। इस बहुत बड़े विदेशी फंड को हवाला या अन्य अवैध रास्तों के जरिए राज्य के विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किया गया था।" हक ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि विदेशों से इस फंड को देश में मंगवाने और इसे जमीन पर बंटवाने के पीछे सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी का हाथ था।
अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग, केंद्रीय एजेंसियों से जांच की अपील
इस पूरे मामले को देश के खिलाफ एक बड़ी वित्तीय साजिश करार देते हुए एजेयूपी नेता शाहिदुल हक ने अब देश की केंद्रीय जांच एजेंसियों से कड़े एक्शन की मांग की है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया है कि उनके पास इन गंभीर दावों को सच साबित करने के लिए क्या पुख्ता सबूत या सूत्र हैं, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर टीएमसी को पूरी तरह घेर लिया है।
शाहिदुल हक ने मांग की है कि इस देश विरोधी वित्तीय साजिश के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को तुरंत एक्शन में आना चाहिए। उन्होंने कहा,
"इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए और इस काले धन के असली सोर्स का पता लगाने के लिए एक बड़ी जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही इस साजिश के मुख्य सूत्रधार अभिषेक बनर्जी को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनसे कड़ी पूछताछ होनी चाहिए।"
अब देखना यह होगा कि इस विस्फोटक दावे के बाद बंगाल की राजनीति क्या नया मोड़ लेती है और टीएमसी इस पर क्या पलटवार करती है।
(नोट: ये स्टोरी सोशल मीडिया पर किए गए दावों के आधार पर लिखी गई है, वनइंडिया हिंदी इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है।)














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