अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड देने से क्यों बच रहे हैं नीतीश कुमार

Posted By: BBC Hindi
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अपनी ही परम्परा तोड़ते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बार अपनी सरकार का रिपोर्ट जारी नहीं किया.

नवंबर के अंत के आस-पाास का यही वक्त हुआ करता था जब नीतीश कुमार अपने सरकार के काम-काज की वार्षिक रिपोर्ट जारी किया करते थे. एक दशक से ज्यादा समय से ऐसा होता आ रहा था.

जब 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने उस समय कई नई चीजों को सालाना रिपोर्ट कार्ड भी शामिल किया था.

नीतीश कुमार चाहे भाजपा के साथ रहे हों या राजद-कांग्रेस के साथ, ये सिलसिला नहीं टूटा.

इसका कारण बताते हुए नीतीश कहा था कि 'नई सरकार के बने अभी तीन ही महीने हुए हैं और ये किसी सरकार के मूल्यांकन के लिए बहुम कम समय है.'

लेकिन इसके लिए विपक्ष ने उनपर निशाना साधना शुरू किया है.

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'नीतीश क्रेडिट नहीं देना चाहते'

विपक्ष का कहना है कि नीतीश कुमार राजद-कांग्रेस को उनके अच्छे कामों के क्रेडिट से वंचित रखना चाहते हैं.

राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी कहते हैं, "नीतीश अगर रिपोर्ट कार्ड बनाते तो क्रेडिट राजद-कांग्रेस को भी देना पड़ता. वो ये नहीं चाहते. रिपोर्ट कार्ड जारी होती तो महागठबंधन के अच्छे कामों का जिक्र होता और तब सवाल उठता कि गठबंधन आपने तोड़ा क्यों भाई.''

महागठबंधन सरकार में राजद और कांग्रेस के पास शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त, सड़क निर्माण, सहकारिता जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग थे.

इतना ही नहीं बीते करीब दो साल से नीतीश कुमार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर बने हुए शराबबंदी अभियान से संबंधित विभाग भी कांग्रेस के पास था.

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तेजस्वी यादव और लालू यादव
Getty Images
तेजस्वी यादव और लालू यादव

शिवानंद तिवारी इन महकमों के तहत हुए चंद अच्छे कामों को गिनाते हुए कहते हैं, "तेजस्वी ने दिन-रात एक कर समय पर गंगा नदी पर दो नए पुल शुरु करवाया. शिक्षा विभाग ने शराबबंदी के खिलाफ रिकॉर्ड लंबाई वाली मानव-श्रृंखला बनाई. सहकारिता विभाग ने मछुआरों और सब्जी उत्पादकों को लाभ पहुंचाने वाले प्रावधान बनवाए."

इतना ही नहीं शिवानंद विपक्ष के नेता के रूप में तेजस्वी यादव के भाषण का हवाला देते हुए कहते हैं, "महागठबंधन सरकार में राजद ने विभागों में मंत्री स्तर पर भ्रष्टाचार की संभावनाओं को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री को एक प्रस्ताव दिया था जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया."

हालांकि लालू यादव और उनके परिवार पर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों का हवाला देते हुए ही नीतीश कुमार ने महागठबंधन तोड़ा था.

विपक्ष पूछ रहा है कि जब नीतीश ने 2013 में भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बावजूद रिपोर्ट कार्ड जारी किया था तो इस साल वो ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं?

जबकि नीतीश कुमार की पार्टी के प्रवक्ता और पार्षद नीरज कुमार का कहना है, "राजनीति में जिन्होंने अप-संस्कृति को बढ़ावा दिया, घोटाले किए, उनके द्वारा आज सरकार की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाना बेमानी है."

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राजनीतिक कारण

वो कहते हैं, "2013 में बस गठबंधन टूटा था लेकिन सरकार नहीं बदली थी. ऐेसे में तब रिपोर्ट कार्ड जारी किया गया. अभी मामला अलग है. कानून के राज और भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टोलरेंस के हमारे यूएसपी पर जब गठबंधन के कारण सवाल उठने लगे तो हमने नए हालात में नई सरकार बनाई. नई सरकार का अभी एक साल पूरा नहीं हुआ है और इसलिए हम रिपोर्ट कार्ड जारी नहीं कर रहे हैं."

वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार कहते हैं, "जाहिर है कि नीतीश अभी रिपोर्ट कार्ड जारी करते तो उनके सामने राजद-कांग्रेस के अहम महकमों की उपलब्धियों को गिनाने की मजबूरी भी सामने आती. और जब पुराने साझेदार विपक्ष में हों तो कोई अपने किसी काम से क्यूं उन्हें फायदा पहुंचाना चाहेगा?"

वो कहते हैं, "जब आप राजनीति में होते हैं तो केवल राजनीति ही कर रहे होते हैं. रिपोर्ट जारी करने के पीछे भी राजनीति होती है तो नहीं जारी करने की भी सियासी वजहें होती हैं."

हालांकि बिहार सरकार ने अपने कामकाज की अंतिम सलाना रिपोर्ट जीतन मांझी के ज़माने में भी जारी की गई थी.

साल 2015 का साल चुनावी साल था और बीते साल कानपुर रेल हादसे के कारण पूरी तैयारी के बाद रिपोर्ट कार्ड जारी करने का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था.

तब बाद में पूरी तरह से तैयार रिपोर्ट कार्ड की डिजिटल कॉपी सूचना और जन संपर्क विभाग के वेबसाइट पर जारी की गई थी.

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English summary
Why Nitish Kumar is Surviving Your Governments Report Card
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