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पढ़‍िए कौन थी नीरजा भनोट कहानी फिल्‍मी नहीं है

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बेंगलुरु। फिर से एक फिल्‍म की रिलीज और फिर से एक 'रीयल हीरो' की कहानी को कोई 'रील हीरो' आपको और हमें समझाने की कोशिश करेगा। हम बात कर रहे हैं नीरजा भनोट की जिनका जिक्र इस समय उन पर निर्मित फिल्‍म के साथ ही शुरू हो गया है।

नीरजा की उम्र सिर्फ 22 वर्ष थी जब उनकी मौत हो गई। उनकी मौत कोई ऐसी वैसी मौत नहीं थी बल्कि एक ऐसी मौत थी जो अपने साथ कई जिंदगियों को रोशन कर गई।

एक जासूस जो देश की सेवा के लिए बना पाक सेना का हिस्सा

सैंकड़ों लोगों को उनकी जिंदगी के आने वाले सुनहरे दिन सौगात में दे गई। शायद इसलिए ही आज आप उनके बारे में बात करते हैं और हम उनके बारे में लिख रहे हैं।

नीरजा के नाम सबसे कम उम्र में सर्वोच्‍च सैनिक सम्‍मान अशोक चक्र को हासिल करने का रिकॉर्ड दर्ज है लेकिन मरणोपरांत।

आइए आपको बताते हैं कि कौन थी नीरजा भनोट और आखिर क्‍यों करीब तीन दशक बाद न सिर्फ भारत बल्कि पाकिस्‍तान और अमेरिका के लोग भी उनका जिक्र करते हैं।

शादी के बाद लौट आईं माता-पिता के पास

शादी के बाद लौट आईं माता-पिता के पास

नीरजा भनोट का जन्‍म पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में हुआ था। उनके माता-पिता रमा भनोट और हरीश भनोट मुंबई बेस्‍ड जर्नलिस्‍ट थे। वर्ष 1985 में शादी के बंधन में बंधी नीरजा को सिर्फ दो माह बाद दहेज के दबाव के चलते पति को छोड़कर मुंबई वापस आना पड़ा।

पांच सितंबर 1986 की घटना

पांच सितंबर 1986 की घटना

नीरजा ने इसके बाद अमेरिकी एयरलाइंस पैन एम में फ्लाइट अटेंडेंट की जॉब के लिए अप्‍लाई किया था। पांच सितंबर 1986 को जब नीरजा अपनी ड्यूटी के तौर पर पैनएम 73 फ्लाइट का हिस्‍सा बनीं तो इसे हाइजैक कर लिया गया।

लीबिया का मिलता था समर्थन

लीबिया का मिलता था समर्थन

इस फ्लाइट को फिलिस्‍तीन के आतंकी संगठन अबु निदाल के चार आतंकियों ने हाइजैक कर लिया था जिसे लीबिया का समर्थन हासिल था। फ्लाइट को पाकिस्‍तान के कराची होते हुए फ्रैंकफर्ट, जर्मनी और फिर न्‍यूयॉर्क जाना था। मुंबई से फ्लाइट ने टेकऑफ किया था और इसमें 360 पैसेंजर्स थे।

पायलट और को-पायलट्स निकल गए थे

पायलट और को-पायलट्स निकल गए थे

जब विमान कराची में था तो आतंकी सिक्‍योरिटी पर्सनल की ड्रेस में विमान में दाखिल हो गए थे। आतंकियों ने भनोट को आदेश दिया कि वह सारे यात्रियों के पासपोर्ट को कलेक्‍ट करें जिससे उन्‍हें विमान में सवार अमेरिकियों का पता लग सके। नीरजा ने ऐसा ही किया।

ग्रेनेड से लेकर असॉल्‍ट राइफल्‍स तक

ग्रेनेड से लेकर असॉल्‍ट राइफल्‍स तक

आतंकियों के पास ग्रेनेड से लेकर असॉल्‍ट राइफल्‍स से लेकर पिस्‍तौल और प्‍लास्टिक एक्‍सप्‍लोसिव बेल्‍ट्स तक थीं। एयरक्राफ्ट के अंदर आते ही आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी थी और एयरक्राफ्ट को अपने कब्‍जे में ले लिया था। आतंकी इस फ्लाइट को इजरायल में ले जाकर क्रैश करना चाहते थे।

विमान को ब्‍लास्‍ट करने को तैयार थे आतंकी

विमान को ब्‍लास्‍ट करने को तैयार थे आतंकी

17 घंटों के बाद आतंकियों ने फिर से फायरिंग की और एक्सप्‍लोसिव्‍स फिट कर दिए थे। नीरजा ने विमान का इमरजेंसी डोर खोलकर यात्रियों को बाहर निकलने में मदद की। वह चाहतीं तो सबसे पहले निकल सकती थीं लेकिन उन्‍होंने ऐसा नहीं किया। उन्‍होंने कई बच्‍चों को आतंकियों की गोली का निशाना बनने से बचाया।

नीरजा बनी 'हिरोइन ऑफ हाईजैक'

नीरजा बनी 'हिरोइन ऑफ हाईजैक'

इस घटना में 20 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें नीरजा भी शामिल थीं। नीरजा को इसके बाद हिरोइन ऑफ हाईजैक का टाइटल दिया गया था। इसके साथ ही भारत ने उन्‍हें सर्वोच्‍च सैन्‍य सम्‍मान अशोक चक्र से भी नवाजा था। इसके अलावा वर्ष 2004 में उन पर एक डाक टिकट भी सरकार की ओर से जारी किया गया था।

पाकिस्‍तान ने भी दिया सम्‍मान

पाकिस्‍तान ने भी दिया सम्‍मान

पाकिस्‍तान ने नीरजा को तमगा-ए-इंसानियत पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जो मानवता की असाधारण सेवा के लिए दिया जाता है। वहीं अमेरिका के कोलंबिया के अटॉर्नी ऑफिस की ओर से नीरजा को जस्टिस फॉर क्राइम अवॉर्ड दिया गया। इसके अलावा अमेरिकी सरकार कर स्‍पेशल करेज अवॉर्ड और फ्लाइट सेफ्टी फाउंडेशन की ओर से हीरोइज्‍म अवॉर्ड दिया गया।

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English summary
A young air hostess Neerja Bhanot died while saving life of more than 300 passengers when terrorists hijacked a flight in Pakistan.
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