What is E-cigarette: क्या है ई सिगरेट? संसद में छुपकर पी रहे थे सांसद! लोकसभा में अनुराग ठाकुर ने उठाया मुद्दा
What is E-cigarette: संसद का शीतकालीन सत्र वैसे ही गर्मा-गर्मी से भरा हुआ है लेकिन गुरुवार (11 दिसंबर) को माहौल तब और गरम हो गया जब बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में ई-सिगरेट पीने का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने किसी सांसद का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इशारे साफ तौर पर टीएमसी के एक नेता की ओर थे। सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा सदन के अंदर ई-सिगरेट पीते देखी गईं। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि TMC सांसद कीर्ति आजाद ई-सिगरेट पी रहे थे। हालांकि ये सारे नाम कयासों पर ही हैं।
इतना तो साफ है कि TMC सांसद पर ही ई-सिगरेट पीने का आरोप है। अनुराग ठाकुर का कहना था कि सदन के भीतर ऐसी गतिविधियां केवल नियमों के खिलाफ नहीं हैं बल्कि यह संसद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती हैं। उन्होंने स्पीकर ओम बिरला से पूछा कि क्या उन्होंने सदन के भीतर ई-सिगरेट पीने की कोई अनुमति दी है। अनुराग ठाकुर ने यह भी मांग की कि इस मामले की जांच की जाए ताकि भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा न हो।

🟡 स्पीकर ओम बिरला ने मामले पर क्या कहा?
स्पीकर ओम बिरला ने भी इसपर सख्त रुख दिखाते हुए कहा कि संसद में किसी भी सदस्य को किसी तरह के धूम्रपान या प्रतिबंधित गतिविधि की अनुमति नहीं है। उन्होंने साफ किया कि अगर कोई प्रमाण मिलता है तो नियमों के मुताबिक कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्पीकर ने कहा कि सदन लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और इसकी गरिमा बनाए रखना हर सांसद की जिम्मेदारी है।
🟡 What is E-cigarette: ई-सिगरेट है क्या? क्यों इसे लेकर इतना विवाद होता है
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ई-सिगरेट इतनी बड़ी बहस का कारण क्यों बन गई है। दरअसल ई-सिगरेट एक बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो निकोटीन युक्त तरल को गर्म करके उसे भाप में बदल देता है। इस भाप को यूज़र सांस के जरिए अंदर लेता है। यह पारंपरिक सिगरेट की तरह तंबाकू नहीं जलाता, इसलिए कई लोग इसे 'कम हानिकारक' मान लेते हैं, जो एक गलतफहमी है।
ई-सिगरेट को कई नामों से जाना जाता है - वेप, वेप पेन, ENDS (Electronic Nicotine Delivery Systems) आदि। दिखने में यह पेन, यूएसबी डिवाइस या छोटी पॉड जैसी लग सकती है, जिसके कारण कई बार लोग इसे पहचान भी नहीं पाते।
🟡 ई-सिगरेट कैसे काम करती है?
ई-सिगरेट में एक बैटरी होती है जो हीटिंग एलिमेंट को गर्म करती है। यह एलिमेंट 'ई-लिक्विड' या 'वेप जूस' नामक तरल को वाष्प में बदल देता है।इस वाष्प में निकोटीन, फ्लेवर और अन्य केमिकल होते हैं जिन्हें यूजर इनहेल करता है।
🟡ई-लिक्विड में क्या-क्या होता है?
ई-लिक्विड में कई तरह के तत्व पाए जाते हैं -
• निकोटीन: यह अत्यधिक लत लगाने वाला पदार्थ है।
• प्रोपलीन ग्लाइकोल और वेजिटेबल ग्लिसरीन: वाष्प बनाने के लिए।
• फ्लेवरिंग एजेंट: सैकड़ों तरह के फ्लेवर उपलब्ध होते हैं।
• अन्य रसायन: जिनमें भारी धातु, कार्सिनोजेन और वाष्पशील ऑर्गैनिक कंपाउंड शामिल हो सकते हैं।
🟡 ई-सिगरेट के प्रकार?
• डिस्पोजेबल ई-सिगरेट: एक बार इस्तेमाल करके फेंक दी जाती है।
• रिफिलेबल डिवाइस: चार्ज और रिफिल किए जा सकते हैं।
• मॉड्स और पॉड सिस्टम: डिजाइन और शक्ति के आधार पर अलग-अलग।
🟡 स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्यों कर रहे थे चेतावनी?
दुनिया भर के स्वास्थ्य संगठनों ने चेताया है कि ई-सिगरेट पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
• इसमें मौजूद एयरोसोल फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।
• युवाओं में निकोटीन की लत तेजी से बढ़ सकती है।
• 'ईवैली' नामक फेफड़ों की गंभीर बीमारी के मामले भी सामने आए हैं।
• इनके दीर्घकालिक प्रभावों पर रिसर्च अभी जारी है।
🟡 भारत में ई-सिगरेट बैन क्यों हुई?
भारत सरकार ने 2019 में 'इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम' के तहत ई-सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। सरकार की चिंता थी कि यह उपकरण स्कूल-कॉलेज के युवा छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा था और कई बच्चों में यह गलत धारणा फैल गई थी कि ई-सिगरेट साधारण सिगरेट से कम हानिकारक है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा करते हुए बताया था कि कुछ युवा ई-सिगरेट के जरिए ड्रग्स तक का सेवन करने लगे थे, जो इसे और खतरनाक बना रहा था। ICMR ने भी सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए इन पर पूर्ण प्रतिबंध की सिफारिश की थी।
इस कानून के तहत ई-सिगरेट का उत्पादन, बिक्री, आयात, निर्यात, भंडारण और विज्ञापन - सबकुछ अवैध है। उल्लंघन पर जेल और भारी जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
🟡 क्या ई-सिगरेट धूम्रपान से बेहतर है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ई-सिगरेट में तंबाकू नहीं होता, इसलिए इसमें कुछ कम विषैले रसायन होते हैं। लेकिन यह 'सुरक्षित' नहीं है। इसमें मौजूद निकोटीन लत पैदा करती है और इसके वाष्प में भारी धातु व अन्य हानिकारक पदार्थ पाए जा सकते हैं। यानी, यह साधारण सिगरेट का सुरक्षित विकल्प बिल्कुल नहीं है।
🟡संसद में ई-सिगरेट विवाद क्यों बना बड़ा मुद्दा
लोकसभा में उठा ताजा विवाद सिर्फ एक सांसद के कथित आचरण का मामला नहीं है, बल्कि इससे बड़ी चिंता यह है कि देश में जिस चीज पर पूर्ण प्रतिबंध लगा है, क्या वह संसद जैसे सर्वोच्च मंच पर भी बेखौफ इस्तेमाल हो रही है। संसद में नियमों और अनुशासन को लेकर उठे सवाल अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं।
ई-सिगरेट क्या है, कैसे काम करती है, क्यों बैन है, इन सभी पहलुओं को समझना जरूरी है, क्योंकि यह केवल एक उपकरण का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और अनुशासन का मुद्दा है।
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