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Nari Shakti Vandan Act क्‍या है? BJP ने सांसदों को जारी किया व्हिप, कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक की मांग

Nari Shakti Vandan Act: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 16 से 18 अप्रैल तक होने वाले संसद के विशेष सत्र को लेकर अपने सभी सांसदों के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। भाजपा ने रविवार को अपने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों के लिए तीन-लाइन व्हिप जारी किया है।

याद रहे संसद के विशेष सत्र का मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण संशोधन विधेयक है। भाजपा ने अपने निर्देश में लिखा, "सभी माननीय केंद्रीय मंत्रियों और सदस्यों से अनुरोध है कि वे तीनों तिथियों में पूरे समय सदन में उपस्थित रहें। सदन में उपस्थिति अनिवार्य है। कोई छुट्टी नहीं दी जाएगी। सदस्यों से अनुरोध है कि वे व्हिप का कड़ाई से पालन करें और सदन में अपनी निर्बाध उपस्थिति सुनिश्चित करें। आपके सहयोग की अत्यधिक सराहना की जाती है।"

Nari Shakti Vandan Act

पीएम मोदी बोले- महिलाओं के लिए आरक्षण है जरूरी

वहीं नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को एक लेटर लिखा है। जिसमें पीएम मोदी ने लिखा कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना आवश्‍यक है।

कांग्रेस की सर्वदलीय बैठक की मांग

मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि 16 अप्रैल से प्रस्तावित विशेष संसद सत्र विपक्ष को विश्वास में लिए बिना बुलाया गया है और चर्चा के लिए जरूरी जानकारी, खासकर परिसीमन से जुड़े विवरण, अब तक स्पष्ट नहीं किए गए हैं। खड़गे ने कहा कि इन अहम पहलुओं के बिना इस ऐतिहासिक कानून पर सार्थक चर्चा संभव नहीं है।

कांग्रेस बोली- राजनीतिक लाभ के लिए सरकार कर रही जल्दबाजी

खड़गे ने सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि उसने सभी दलों से संवाद किया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल 29 अप्रैल 2026 को चुनावी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक की मांग कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि चुनावों के बीच विशेष सत्र बुलाना यह संकेत देता है कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी कर रही है। अंत में उन्होंने सुझाव दिया कि 29 अप्रैल के बाद बैठक बुलाकर परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक सहमति बनाई जानी चाहिए।

मोदी सरकार क्‍यों जल्‍द लागू करना चाहती है महिला आरक्षण?

गौरतलब है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण कानून में दो मुख्य संशोधन प्रस्तावित कर रही है। मूल 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने महिला आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन से जोड़ा था। चूंकि जनगणना में देरी हुई है, इसलिए अब 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर ही विधेयक को लागू करने की योजना है।

क्या है 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम'?

'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए लाया गया कानून है। इसके तहत भारतीय संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटों का आरक्षण तय किया गया है। यानी हर तीसरी सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। यह आरक्षण सामान्य, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटों पर भी लागू होगा। हालांकि, यह कानून तुरंत लागू नहीं होगा, बल्कि अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (delimitation) के बाद ही लागू किया जाएगा।

लोकसभा में कितनी बढ़ेंगी सीटें?

सीटों की संख्या सीधे इस बिल से नहीं बढ़ती, लेकिन परिसीमन के बाद कुल सीटों में वृद्धि संभव है। अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिनमें से करीब 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं (33% के हिसाब से)। यदि परिसीमन के बाद सीटें बढ़ती हैं (जैसा कि पहले भी संकेत मिले हैं), तो महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी।

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